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    30 किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले टेक्नीशियन का मुंह छिपाकर सरेंडर:कानपुर में पुलिस को चकमा देकर कोर्ट पहुंचा; 25 हजार का इनामी था

    4 hours ago

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    कानपुर में अवैध तरीके से 30 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी ने गुरुवार को सरेंडर कर दिया। वह पुलिस को चकमा देकर ACJM–6 की कोर्ट में पहुंचा। सिर पर टोपी और मुंह पर मास्क लगा रखा था। कोर्ट ने आरोपी मुदस्सर अली को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया। पुलिस उसकी तलाश में नोएडा, गाजियाबाद, उत्तराखंड समेत कई जिलों की खाक छान रही थी। 25 हजार इनाम भी रखा था। पुलिस किडनी रैकेट में शामिल 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मुदस्सर 11वां आरोपी है। वह डॉक्टर अली के नाम मशहूर है। पुलिस की फाइल में भी उसका यही नाम लिखा गया है। डॉ. अली के अधिवक्ता मोहित द्विवेदी ने बताया, उनके मुवक्किल का नाम एफआईआर में नहीं था। पुलिस की जांच में सामने आया था। सोमवार को कोर्ट में आख्या दाखिल की गई थी। इसकी सुनवाई के लिए कोर्ट ने विवेचक मनोज कुमार से रिपोर्ट मांगी थी। सुनवाई की तय तारीख 16 मई को विवेचक रिपोर्ट के साथ कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में बताया कि डॉ. अली मुकदमे में वांछित है, जिसके बाद कोर्ट ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। 2 तस्वीर देखिए… अब पूरा मामला जानिए… रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में 29 मार्च को अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया था। कल्याणपुर के मेडलाइफ हाॅस्पिटल में बिहार का डाेनर आयुष कुमार और प्रिया अस्पताल के डीलक्स रूम में मुजफ्फर नगर की पारुल तोमर भर्ती मिली थी। 23 साल के आयुष से उसकी किडनी 6 लाख रुपए में खरीदी गई थी। बाद में महिला मरीज प्रिया तोमर को करीब 80 लाख रुपए में बेच दी गई थी। किडनी देने वाले छात्र ने ही पुलिस से शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मेडलाइफ हॉस्पिटल, आहूजा हॉस्पिटल और प्रिया हॉस्पिटल में एक साथ छापेमारी की थी। इसके बाद किडनी रैकेट का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने के लिए लखनऊ और दिल्ली से डॉक्टरों की टीम आती थी। देश के अलग-अलग राज्यों से युवकों को जाल में फंसाकर किडनी का सौदा किया जाता था। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट में शामिल आहूजा अस्पताल की डॉ. प्रीति आहूजा उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. राम प्रकाश, डॉ. नरेंद्र सिंह व एजेंट शिवम अग्रवाल को अरेस्ट किया गया। पुलिस ने जांच शुरू की तो सामने आया कि किडनी के इस अवैध कारोबार का सरगना डॉ. रोहित था। उसके लिए कानपुर में काम करने वाले एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल, मेडलाइफ अस्पताल के मालिक राजेश कुमार व राम प्रकाश कुशवाहा प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह को जेल भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की तो ओटी मैनेजर राजेश कुमार और ओटी संचालक कुलदीप सिंह राघव गाजियाबाद से पकड़े गए थे। तीन दिन पहले पुलिस 25 हजार के इनामी डॉ. रोहित को गिफ्तार किया गया। इसके बाद गुरुवार दोपहर ओटी टेक्नीशियन मुदस्सर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली ने ACJM-6 की कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। इस पूरे किडनी कांड में जेल जाने वाला यह 11 वां आरोपी है। अब डॉ. अली को जानिए… डॉ. मुदस्सिर अली दिल्ली के द्वारिका का रहने वाला है। ऑपरेशन थिएटर के अंदर डॉ. अली मुख्य भूमिका में रहता था। वो पेट में सर्जिकल कट लगाता था। किडनी को पेट के अंदर से निकालकर दूसरे मरीज (रिसीवर) के पेट में शिफ्ट करता था। डॉ. अली कभी अकेले कानपुर नहीं आता था। उसके साथ एक डॉक्टर और दो सहायक होते थे। जब ऑपरेशन हो जाता, तब दो लोग लखनऊ और दो गाजियाबाद की तरफ चले जाते थे। गाजियाबाद के राजेश कुमार का कहना है कि जनवरी से अब तक 5 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं। सभी में डॉ. अली रहा है। ओटी टेक्नीशियन अली ने दिल्ली में ली थी ट्रेनिंग किराए पर अस्पतालों की ओटी (ऑपरेशन थियेटर) लेकर किडनी ट्रांसप्लांट जैसा बड़ा ऑपरेशन करने वाले मुद्स्सिर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली ने बाकायदा दिल्ली में इसकी ट्रेनिंग ली थी। डॉक्टर रोहित की टीम में अली अकेला नहीं, बल्कि अन्य ओटी स्पेशलिस्ट भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने ट्रेनिंग हासिल की थी। पुलिस की जांच में सामने आया था कि गिरोह में शामिल डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अमित चौधरी, डॉ. अली कोई भी सर्जन नहीं है। डॉ. अली ओटी मैनेजर है। उसने दिल्ली में कुछ साल पहले किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी ट्रेनिंग ली है। पुलिस कमिश्नर ने बताया था कि डॉ. रोहित एनीस्थीसिया, डॉ. वैभव डेंटिस्ट, डॉ. अनुराग उर्फ अमित अल्फा हॉस्पिटल संचालक, डॉ. अफजल फिजीशियन, डॉ. अली ओटी टेक्नीशियन है। डोनरों पर प्रेशर बनाता था डॉ. अली पुलिस की जांच में सामने आया था कि रैकेट से जुड़े मेंबर को पहले साइबर फ्रॉड के जरिए फंसाते थे। गिरोह के सदस्य पहले उन्हें साइबर फ्रॉड के ग्रुप में जोड़ते। हैंडलर डॉ अफजाल और डॉ अली थे। इसके बाद उन्हें छोटे-छोटे टास्क दिए जाते थे, टास्क जीतने पर उन्हें रकम मुहैया कराई जाती। यह सब बकायदा विदेशी गेम ब्लू व्हेल की तर्ज पर होता था। मामूली टास्क कंप्लीट होने के बाद अगली स्टेज में उन्हें और कठिन टास्क दिए जाते, जिसमें उन्हें भारी रकम लगानी पड़ती थी। रकम हारने पर गिरोह के सदस्य पीड़ितों को उधार देते थे, फिर उन्हें अपने इस किडनी के गोरखधंधे में फंसाते थे। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया, किडनी डोनेट करने के लिए लोगों की बकायदा कांउसलिंग कराई जाती थी। उन पर साइकोलॉजिकल प्रेशर बनाया जाता था, विदेशों की यूनिवर्सिटियों की स्टडीज के बारे में बताया जाता था। टेलीग्राम ग्रुप से संचालित होता सिंडिकेट पूरा सिंडिकेट एक टेलीग्राम ग्रुप से संचालित होता था। पारूल से फरार डॉक्टर अफजल ने ट्रांसप्लांट कराने को कहा था, इसके बाद कल्याणपुर निवासी शिवम अग्रवाल ने मूलरूप से बिहार के रहने वाले आयुष को 6 लाख में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए राजी किया था। ट्रांसप्लांट होने के बाद शिवम को 7 लाख रुपए दिए थे, जिसमें से 3.50 लाख उसने आयुष के खाते में डाले, 2.75 लाख आहूजा हॉस्पिटल को दिए, 25 हजार मेड लाइफ हॉस्पिटल को ट्रीटमेंट के लिए और 50 हजार रुपए उसने अपने पास रखे थे। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने बताया, कानपुर में 50 से अधिक ऑपरेशन किए गए हैं। इनमें से 30 से अधिक ऑपरेशन डॉ. अली ने किए हैं। इनमें से 7 ऑपरेशन आहूजा हॉस्पिटल किए गए थे -------------------- ये खबर भी पढ़िए- नोएडा बवाल- RJD की 2 महिला प्रवक्ताओं पर FIR, गलत VIDEO पोस्ट कर माहौल बिगाड़ने का आरोप नोएडा में 2 दिन हुए बवाल के बाद आज यानी बुधवार को फैक्ट्रियां खुल गई हैं। हालात सामान्य हैं। जगह-जगह फोर्स तैनात है। CCTV और ड्रोन से निगरानी की जा रही है। 16 कंपनी RAF और पीएसी लगाई गई है। नोएडा सेक्टर 63, 84, 85, 80, फेस 2 में पुलिस ने फ्लैगमार्च किया। इस बीच, नोएडा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में राजद की दो महिला प्रवक्ताओं कंचना यादव और प्रियंका भारती पर FIR दर्ज की गई है। पूरी खबर पढ़िए
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