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    जा रहा मॉनसून, देश में बारिश की 15% कमी... 218 जिले सूखे

    मॉनसून 19 सितंबर के आसपास पश्चिमी राजस्थान से लौटना शुरू होगा. पूरे देश में 15% बारिश की कमी है. पंजाब, हरियाणा, बिहार, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में घाटा भरने की संभावना कम है जिससे सूखे का खतरा बना हुआ है.

    घर के बाहर मिर्च सुलगाई, धुआं फैलते ही बदमाशों ने कर दिया कांड

    भोजपुर के कलछीना गांव में बदमाशों ने मिर्च जलाकर धुआं फैलाया. मकान का दरवाजा खुलते ही 5-6 बदमाश सद्दाम के घर में घुस गए और परिवार को दो घंटे बंधक बनाकर जेवर-नकदी लूट ली. विरोध पर महिला पर धारदार हथियार से वार भी किया. पुलिस सीसीटीवी जांच कर रही है.

    गाजियाबाद पुलिस पर FIR के लिए Supreme Court पहुंचे पूर्व मेयर, याचिका खारिज

    उच्चतम न्यायालय ने गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली दिल्ली के पूर्व महापौर फरहाद सूरी की याचिका पर मंगलवार को विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका में सूरी ने एक आपराधिक मामले के सिलसिले में एक पत्रकार की तलाश में दिल्ली स्थित अपने आवास पर ‘‘अवैध’’ छापेमारी का आरोप लगाया था। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सूरी को सीधे शीर्ष अदालत का रुख करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 का सहारा लेने के बजाय प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए दिल्ली पुलिस से संपर्क करने का निर्देश दिया।पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध याचिकाकर्ता द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत संबंधित थाने का रुख करने पर उचित तरीके से निपटाया जा सकता है। हमें इस बात पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है कि सक्षम पुलिस कानून के मुताबिक सख्ती से कार्रवाई नहीं करेगी।’’ सूरी ने आरोप लगाया था कि 22 और 23 अगस्त की मध्यरात्रि को गाजियाबाद पुलिस के अधिकारियों का एक बड़ा दल सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुए विवाद के एक मामले में आरोपी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की तलाश में बिना वारंट के दिल्ली स्थित उनके आवास में दाखिल हुआ था। सूरी की ओर से पेश अधिवक्ता अनूप प्रकाश अवस्थी ने पक्ष रखा।पीठ ने अंतरराज्यीय पुलिस छापेमारी को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने के अनुरोध वाली सूरी की अन्य याचिका पर भी विचार करने से इनकार कर दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि सूरी बीएनएसएस के तहत उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल किए बिना प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे शीर्ष अदालत का रुख नहीं कर सकते। सरकार के विधि अधिकारी ने पुलिस की छापेमारी को अवैध बताए जाने का भी विरोध किया।उन्होंने कहा, ‘‘हम एक व्यक्ति को गिरफ्तार करने की कोशिश कर रहे थे। सामान्य डायरी (जीडी) में इसकी उचित प्रविष्टि मौजूद थी। पुलिस अधिकारियों ने केवल यह पता लगाने के लिए उस व्यक्ति के घर की घंटी बजाई कि क्या वह (उपाध्याय) वहां मौजूद था।जब उन्होंने (सूरी) मना किया तो हम वहां से चले आए। हम उनके घर में दाखिल भी नहीं हुए।’’ सूरी के वकील ने राज्य सरकार की दलीलों का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों के बड़े दल करीब 15 पुलिस वाहनों में याचिकाकर्ता के आवास पर पहुंचे थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि सामान्य डायरी में प्रविष्टि कथित छापेमारी के बाद दर्ज की गई थी।उपाध्याय सड़क पर वाहन चलाने को लेकर हुए एक कथित विवाद के संबंध में गाजियाबाद पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी का सामना कर रहे हैं।

    बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 नेताओं को मौत की सजा, 2024 हिंसा मामले में दोषी करार

    बांग्लादेश में बैन हो चुकी पार्टी अवामी लीग के सात नेताओं को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. इन नेताओं पर 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हिंसक बयान देने और हिंसा भड़काने का आरोप है. इस हिंसा में 1400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी.

    दो परिवारों की रंजिश और गैंगस्टरों का कनेक्शन... दिल्ली में जिम ट्रेनर के कत्ल की Inside Story

    दिल्ली के फतेहपुर बेरी में जिम ट्रेनर विजय कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी गई. पुलिस को दो परिवारों की पुरानी रंजिश और गैंगस्टरों के शामिल होने का शक है. पढ़ें इस सनसनीखेज वारदात की पूरी कहानी.

    गुरुग्राम हिट-एंड-रन केस में सिया ने लगाए गंभीर आरोप

    गुरुग्राम हिट-एंड-रन मामले में पीड़ित बाइकर सिया ने आरोपी कल्याण बैंसला के दावों को झूठा बताया। सिया ने कहा कि उन्हें जानबूझकर टक्कर मारी गई और अगर आरोपी को सच में पछतावा था, तो उसे मौके पर रुककर मदद करनी चाहिए थी।

    83 की उम्र में रिटायरमेंट ले रहे अमिताभ, KBC को कहेंगे अलविदा?

    Amitabh Bachchan Retirement: 83 की उम्र में भी कैमरे के सामने पूरी एनर्जी के साथ डटे रहने वाले महानायक अमिताभ बच्चन ने अपनी रिटायरमेंट की अफवाहों पर विराम लगा दिया है. अपने ब्लॉग में 'रिटायरमेंट' शब्द के इस्तेमाल पर फैली गलतफहमी को दूर करते हुए बिग बी ने साफ कर दिया कि उनका सेट से दूरी बनाने का कोई प्लान नहीं है.

    इस खाड़ी देश में 30 सितंबर के बाद क्या होगा, एयर डिफेंस सिस्टम हटा रहा US!

    अमेरिका बड़े नाजुक समय में इराक से 'घर वापसी' कर रहा है. अमेरिकी सेनाएं 2003 में सद्दाम हुसैन को हटाने के लिए इराक आई थीं. लेकिन अमेरिकी की इस वापसी को इराक के मिलिशया अपने लिए मौके की तरह देख रहे हैं और इराक के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं.

    UCC पर Home Minister Amit Shah से मिलेंगे JDU नेता, Sanjay Jha के बयान से बढ़ी हलचल

    जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि उनकी पार्टी के नेता जल्द ही गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर UCC पर चर्चा करेंगे। इससे कई सवाल खड़े हो गए हैं, जैसे: क्या BJP के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) की अहम सहयोगी पार्टी JD(U) सच में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर चर्चा करना चाहती है? क्या यह गठबंधन के अंदर राजनीतिक मतभेदों को दिखाने वाला एक सोच-समझकर किया गया कदम है, या फिर यह अल्पसंख्यक वोटरों को लुभाने या BJP के पक्ष में हिंदू वोटरों के ध्रुवीकरण के लिए राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश है?इसे भी पढ़ें: समान नागरिक संहिता पर Omar Abdullah का BJP पर तंज, कहा संख्या बल है तो संसद में लाएं UCC बिलइन सवालों पर काफी चर्चा हो रही है और NDA के सत्ता के गलियारों में भी इन पर बात हो रही है। BJP, जो केंद्र और बिहार दोनों जगह NDA का नेतृत्व करती है, ने पूरे देश में UCC लागू करने को अपनी विचारधारा से जुड़ा एक अहम संकल्प बना लिया है। फिर भी, JD(U), LJP और दूसरे सहयोगी दल, जो माइनॉरिटी वोट का कुछ हिस्सा अपने पास बनाए रखना चाहते हैं, UCC जैसे मुद्दों पर मतभेदों के बावजूद NDA में बने हुए हैं।2024 के लोकसभा चुनाव में, JD(U) ने किशनगंज, पूर्णिया और कटिहार जैसे माइनॉरिटी-बहुल इलाकों में उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2029 के आम चुनाव के करीब आने के साथ, झा के हालिया बयानों ने इस बात पर अटकलें तेज कर दी हैं कि क्या JD(U) NDA में मजबूती से बने रहते हुए UCC पर राजनीतिक जगह बनाने की कोशिश कर रही है और अप्रत्यक्ष रूप से ही सही, लेकिन हिंदू वोट बैंक के ध्रुवीकरण के लिए BJP के लिए जगह बना रही है।इसे भी पढ़ें: संसद में लाया जाना...UCC पर उमर अब्दुल्ला ने गृह मंत्री को क्या सलाह दे दी, क्या मानेगी मोदी सरकार?नाम न बताने की शर्त पर BJP के कुछ सीनियर नेताओं ने कहा कि JD(U) ने पहले भी BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ बने रहते हुए कुछ मुद्दों से खुद को अलग किया है। BJP के एक सीनियर नेता ने कहा कि राजनीति में शतरंज की तरह कई चालें भविष्य के फ़ायदों को ध्यान में रखकर चली जाती हैं। अगर JDU UCC से दूर रहती है, तो इसका मकसद अपने माइनॉरिटी वोट बैंक को मज़बूत करना होगा। 2029 में JDU और दूसरे सहयोगी दलों को फ़ायदा हो सकता है और BJP को नॉन-माइनॉरिटी इलाकों में फ़ायदा होगा। यह बात सभी के लिए साफ़ है।

    मेरठ: एक महीने में 3 हत्याओं से सनसनी, 2 का खुलासा... एक से बढ़ी टेंशन

    मेरठ के हस्तिनापुर में करीब एक महीने के भीतर तीन हत्याओं से सनसनी फैल गई. 16 अगस्त को सरवर की गोली मारकर हत्या हुई, 11 सितंबर को दिल्ली पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे 27 वर्षीय नितिन नागर को गोली मार दी गई, जबकि 13 सितंबर को 65 वर्षीय विमला देवी की ईंट से कुचलकर हत्या कर दी गई.

    UPI लेनदेन पर शुल्क की तैयारी का आरोप, Rahul Gandhi बोले- अमेरिकी दबाव में झुकी सरकार

    कांग्रेस ने मंगलवार को आरोप लगाया कि यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने की तैयारी की जा रही है और ‘‘कॉम्प्रोमाइज्ड’’ (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने व्यापार समझौते की तरह इस मामले में भी अमेरिका के सामने समर्पण कर दिया है। पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह दावा भी किया कि 2,000 रुपये से अधिक के व्यापारिक यूपीआई लेनदेन की संख्या भले ही करीब पांच प्रतिशत हो, लेकिन यूपीआई के कुल लेनदेन मूल्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 65 प्रतिशत है तथा उसका बोझ अंततः कीमतों में बढ़ोतरी के जरिये ग्राहकों की जेब पर ही पड़ेगा। सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है।सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अभी तक किसी भी राशि के यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने इसको लेकर ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘ सरकार का कहना है कि ग्राहक से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, लेकिन दुकानदार पर लगने वाली फीस आखिर आएगी कहां से?कीमतों में जुड़कर ग्राहक की जेब से। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी भुगतान कंपनियां लंबे समय से भारत की शून्य एमडीआर नीति का विरोध करती रही हैं और अब मोदी सरकार ने ठीक उसी दिशा में नीति बदलने का रास्ता खोल दिया है। गांधी ने कहा, ‘‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की तरह ही, कॉम्प्रोमाइज्ड (समझौता कर चुके) प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर अमेरिकी दबाव के सामने समर्पण कर रहे हैं।’’ उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ग्राहक से सीधे शुल्क नहीं लिए जाने के बावजूद व्यापारी पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी यूपीआई शुल्क को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि सरकार ने ‘‘यूपीआई पर कोई शुल्क नहीं’’ की व्यवस्था को बदलकर दो हजार रुपये तक के यूपीआई लेनदेन पर शुल्क नहीं लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खरगे ने दावा किया कि पांच हजार रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10 हजार रुपये के लेनदेन पर 50 रुपये तक की संभावित वसूली की जा सकती है।उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या यह वास्तव में प्रस्तावित है? कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि व्यापारियों पर एमडीआर (व्यापार रियायत दर) का अतिरिक्त बोझ डाला जाता है तो वह अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल होकर आम उपभोक्ता से ही वसूला जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय सरकार उसकी जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने की तैयारी कर रही है।खरगे ने कहा, ‘‘10 वर्ष पहले नोटबंदी को डिजिटल भुगतान और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उपाय के तौर पर पेश किया गया था। ऐसे में अब यूपीआई पर शुल्क लगाने की संभावित व्यवस्था सरकार की उस नीति पर सवाल खड़े करती है।’’ कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में सरकार से सवाल किया कि क्या यह कदम अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत के डिजिटल भुगतान क्षेत्र का रास्ता खोलने और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खुश करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। रमेश ने आरोप लगाया कि ‘‘साफ तौर पर हम सभी से यूपीआई लेनदेन पर शुल्क वसूलने की जमीन तैयार की जा रही है।

    Rahul Gandhi की मोहब्बत की दुकान सिर्फ भ्रष्टाचार का कारोबार, Bansuri Swaraj का Congress पर वार

    भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सांसद बांसुरी स्वराज ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के खास नारे पर तंज कसते हुए कांग्रेस पर कई राज्यों में नौकरी चाहने वाले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। मीडिया से बात करते हुए, स्वराज ने कांग्रेस पार्टी की मौजूदा या पिछली सरकारों वाले राज्यों में भर्ती में कथित गड़बड़ियों और प्रवर्तन की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधा।इसे भी पढ़ें: समान नागरिक संहिता पर Omar Abdullah का BJP पर तंज, कहा संख्या बल है तो संसद में लाएं UCC बिलबांसुरी स्वराज ने कहा कि ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी की तथाकथित 'मोहब्बत की दुकान' सिर्फ़ भ्रष्टाचार का कारोबार करती है। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं कि एक तरफ़ तो वह छात्रों की बात करते हैं, लेकिन जब उनकी ही पार्टी के सदस्य देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं, तो क्या यह शोर उन तक नहीं पहुंचता? स्वराज ने विपक्षी पार्टी के भीतर व्यवस्थित भ्रष्टाचार और राजनीतिक संरक्षण के अपने आरोपों को साबित करने के लिए तीन खास मामलों का ज़िक्र किया: उत्तराखंड VPDO परीक्षा घोटाला, छत्तीसगढ़ CGPSC पेपर लीक और हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्स भर्ती।उत्तराखंड में, उन्होंने विलेज पंचायत डेवलपमेंट ऑफिसर (VPDO) भर्ती घोटाले के सिलसिले में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के पूर्व और मौजूदा पर्सनल असिस्टेंट्स (PAs) के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी का ज़िक्र किया और बताया कि आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज़्यादा संपत्ति बरामद हुई। स्वराज ने छत्तीसगढ़ पब्लिक सर्विस कमीशन (CGPSC) परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों से जुड़े छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पूर्व OSD (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) की गिरफ्तारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में आउटसोर्सिंग के ज़रिए भर्ती प्रक्रिया में एक सीनियर नेता के बेटे के शामिल होने और कमीशन या कट मनी मांगने के हालिया आरोपों की ओर भी इशारा किया।इसे भी पढ़ें: West Bengal Bypolls: BJP ने Nandigram से हसिरानी रथ और रेजीनगर से सखाराव सरकार को उतारास्वराज ने सवाल किया कि जब कांग्रेस पार्टी के अपने ही सदस्य पेपर लीक और भर्ती में गड़बड़ियों के मामलों में फंसे होते हैं, तो पार्टी लीडरशिप इस पर सार्वजनिक रूप से चुप क्यों रहती है। उन्होंने कहा कि आप युवाओं के भविष्य और बेरोज़गारी के मुद्दे पर बात करते हैं। फिर भी, जब बात आपकी अपनी पार्टी—आपके अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं की आती है, और जब राजनीतिक संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं, तो आप चुप रहना ही क्यों पसंद करते हैं?