Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    पुलिस अधिकारियों को आपराधिक अवमानना नोटिस:फतेहपुर का मामला, 16 सितंबर को जिम्मेदार अफसर हाजिर हों

    9 hours ago

    1

    0

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सात साल से कम सजा वाले अपराध में सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार केस में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना आरोपी को गिरफ्तार करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए चार पुलिस अधिकारियों को 16 सितंबर बुधवार को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एस डी सिंह तथा न्यायमूर्ति संदीप जैन की खंडपीठ ने अंकित सिंह की याचिका पर दिया है। क्या है फतेहपुर का मामला जानिए मामला फतेहपुर जिले के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पहुर निवासी अंकित सिंह परिहार की गिरफ्तारी से जुड़ा है। याची अधिवक्ता अमित सिंह परिहार ने दलील दी कि पुलिस ने अर्नेश कुमार मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय दिशा-निर्देशों का पालन किए बिना उन्हें गिरफ्तार कर लिया। हाईकोर्ट ने संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करते हुए नोटिस जारी किया था। आरोप है कि नोटिस जारी होने के बावजूद अधिकारी न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने फतेहपुर के डीएसपी सुशील कुमार दुबे, थाना कल्याणपुर के एसएचओ रमाशंकर सरोज, एसआई चंद्रपाल और चौकी प्रभारी चौडगरा को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन अपराधों में अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है, उनमें आरोपी की गिरफ्तारी स्वतः या यांत्रिक तरीके से नहीं की जा सकती। पुलिस को गिरफ्तारी से पहले कानून में निर्धारित शर्तों और गिरफ्तारी की आवश्यकता पर विचार करना जरूरी है। गिरफ्तारी इसलिए नहीं की पुलिस के पास शक्ति कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी को केवल इसलिए नहीं किया जा सकता कि पुलिस के पास ऐसा करने की शक्ति है। गिरफ्तारी की आवश्यकता और उसके औचित्य का निर्धारण कानून में तय मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए। मौजूदा मामले में इन्हीं दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप है, जिस पर हाईकोर्ट ने आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    रायबरेली में पुश्तैनी मकान विवाद में महिला पर जानलेवा हमला:दो भाई गिरफ्तार, तकिये से मुंह दबाकर जान से मारने की कोशिश; 4600 रुपये बरामद
    Next Article
    बस्ती में 119 साल पुराने BSA कार्यालय का जीर्णोद्धार शुरू:72 लाख रुपए से बदलेगी सूरत, जून से चल रहा काम

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment