Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Nandigram Bypoll में Mamata Banerjee ने Congress उम्मीदवार को दिया समर्थन

    11 minutes from now

    2

    0

    (फाइल फोटो के साथ जारी) (सौगत मुखोपाध्याय) कोलकाता, 20 सितंबर पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देना राज्य में विपक्ष की राजनीति में नए समीकरण बनने का संकेत हो सकता है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि जब तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे गंभीर संगठनात्मक संकट से जूझ रही है, तब ऐसे समय में यह कदम राज्य में विपक्ष की राजनीति में बहुत मायने रखता है। बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का फैसला ऐसे समय में किया जब उनके धड़े की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से कोलकाता में मुलाकात के बाद उपचुनाव से अपना नाम वापस ले लिया।उपचुनाव छह अक्टूबर को होना है। बनर्जी ने 18 सितंबर को प्रधान को समर्थन देने की घोषणा करते हुए कांग्रेस को ‘‘सहयोगी दल’’ और ‘‘स्वाभाविक सहयोगी’’ बताया था। उन्होंने कहा था कि यह फैसला देश के व्यापक हित और ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) गठबंधन को मजबूत करने के लिए लिया गया है।बनर्जी ने यह भी कहा था कि वह विपक्षी गठबंधन के भविष्य को लेकर बंगाल से एक संदेश देना चाहती हैं। हालांकि, यह कदम जिस समय उठाया गया है, उसके स्पष्ट रणनीतिक मायने हैं। बनर्जी के खेमे ने शुरुआत में नंदीग्राम से अपना उम्मीदवार उतारा था और उम्मीदवार के चुनाव मैदान से हटने के बाद उसने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया।पर्यवेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस को उनका समर्थन देना भाजपा विरोधी मतों को बंटने से रोकने की कोशिश होने के साथ ही उनके खेमे के लिए असामान्य रूप से मुश्किल दौर का राजनीतिक जवाब भी है। बनर्जी की घोषणा के कुछ ही समय बाद प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे जाने से इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया है। बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर 1990 के दशक के आखिर में तृणमूल कांग्रेस का गठन किया था।उन्होंने वाम मोर्चे को चुनौती देने के लिए तृणमूल कांग्रेस बनाई थी और उनका मानना था कि माकपा का विरोध करने में कांग्रेस पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं थी। इसके बावजूद दोनों दल किसी बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी का सामना करते समय बीच-बीच में एक साथ आते रहे हैं। बनर्जी के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) से नाता तोड़ने के बाद दोनों दलों ने 2001 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ा और 2009 के लोकसभा चुनाव में भी फिर साथ आए।यह गठबंधन 2011 में अपने चरम पर पहुंचा, जब कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने मिलकर पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के 34 साल के शासन का अंत किया लेकिन बाद में नीतियों, सीट बंटवारे और राज्य सरकार के कामकाज को लेकर मतभेद बढ़ने के साथ यह साझेदारी टूट गई। पर्यवेक्षकों का कहना है कि बनर्जी का हालिया कदम उपचुनाव के सामान्य राजनीतिक गणित से कहीं अधिक महत्व रखता है। यह एक असामान्य मौका है जब उन्होंने बंगाल में भाजपा विरोधी चुनावी रणनीति के केंद्र में सार्वजनिक रूप से कांग्रेस को जगह दी है।हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने दोनों दलों के बीच तत्काल राजनीतिक नजदीकी की किसी संभावना को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। बनर्जी के कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए चौधरी ने कहा कि वह कांग्रेस को ‘‘गिरे हुए पत्ते की तरह कमजोर न समझें, बल्कि उसे बरगद की तरह मजबूत मानकर उसका साथ दें।’’ चौधरी ने कहा, ‘‘समर्थन कब दिया गया है, इस पर गौर किया जाना चाहिए। यह तब दिया गया जब उनकी उम्मीदवार चुनाव मैदान से हट गईं।अब उनके पास ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न है, लेकिन उनका खेल खेलने के लिए कोई खिलाड़ी नहीं बचा है।’’ उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के नाम एवं चुनाव चिह्न को लेकर पार्टी के गुटों में जारी टकराव के बाद निर्वाचन आयोग द्वारा बनर्जी के धड़े को अस्थायी रूप से आवंटित चुनाव चिह्न का जिक्र करते हुए यह बात की। हालांकि, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार की राय इससे अलग है। उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस राज्य की भाजपा विरोधी और धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक ताकतों से मिलने वाले हर समर्थन का स्वागत करती है।क्या पता कि बंगाल का यह घटनाक्रम विपक्ष को और मजबूती से एकजुट करने वाला कोई नया राजनीतिक रास्ता खोल दे।’’ कांग्रेस नेताओं ने प्रधान की गिरफ्तारी की आलोचना की है। राहुल गांधी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए कहा है कि पार्टी ‘‘लड़ेगी और जीतेगी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Mumbai में Metro निर्माण का बैरिकेड गिरने से 54 वर्षीय बाइक सवार की मौत
    Next Article
    Matoshree के बाहर Disha Salian के पिता सतीश सालियन का हाई-वोल्टेज ड्रामा

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment