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    ‘मैं वाल्मीकि समाज की बेटी, वो जाटव–नेता इसलिए मेरा चरित्र–हनन:रोहिणी घावरी ने बताया चंद्रशेखर से रिश्ते से लेकर दो सुसाइड अटेम्प्ट का पूरा सच

    3 hours ago

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    मेरे जीवन के 5–6 साल बर्बाद कर दिए। उस वक्त कोई ईमानदार साथी मिला होता तो आज मेरा भी संसार होता। लाखों-करोड़ों कमाने वाली एक आम लड़की की तरह मेरे भी शादी के सपने थे—भव्य हॉल, लहंगे, गहने... पर वे सब टूटकर बिखर गए। दुख इस बात का है कि सब कुछ खोने के बाद भी आज मुझे ही गलत ठहराया जा रहा है। वजह सिर्फ इतनी है कि मैं एक लड़की हूं और सामने वाला एक सांसद।" "मुझे किसी दूसरे धर्म या ऊंची जाति के व्यक्ति ने नहीं, बल्कि 'बहुजन एकता' का झंडा उठाने वाले ने छला है। अपनी ही बेटी का चरित्र हनन करने वाला यह कैसा समाज है? कहाँ गायब हो गया भाईचारा? क्या यह भेदभाव इसलिए है क्योंकि मैं वाल्मीकि समाज से आती हूँ और वह जाटव समाज के रसूखदार नेता हैं?" स्विटरजलैंड से 6 साल बाद भारत लौटी रोहिणी घावरी ने नगीना सांसद चंद्रशेखर से रिश्तों से लेकर उनकी सियास पर बात की? अपने दो बार सुसाइड अटेम्प्ट के बारे में बताया? पढ़िए रोहिणी घावरी का पूरा इंटरव्यू… सवाल : चंद्रशेखर के संपर्क में कैसे आई? रोहिणी : मैं अपने समाज के लिए कुछ करना चाहती थी, इसलिए इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशंस से संपर्क साधने शुरू किए। मेरी मां सफाईकर्मी हैं, इसलिए उनका दर्द मैं बेहतर समझती हूं। इसी दर्द को कम करने के लिए मैंने ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन) से संपर्क किया। ILO ने मुझसे कहा कि सामाजिक संगठनों की मदद से एक रिपोर्ट तैयार करें, जिसमें मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने) और मैनहोल में होने वाली मौतों की हकीकत सामने आ सके। मैं इंदौर की रहने वाली हूं। तब भीम आर्मी से जुड़े एक व्यक्ति का फोन आया–'दीदी स्विट्जरलैंड में लाइफ कैसी है?' मैंने उससे अपनी रिपोर्ट में सहयोग मांगा। उस समय चंद्रशेखर सफाईकर्मियों के मुद्दे उठा रहे थे, तो उसने मुझे भैया (चंद्रशेखर) से बात करने की सलाह दी। 3 जून 2021 को चंद्रशेखर का पहली बार फोन आया। उसने कहा—'आप विदेश जाकर भी अपने लोगों को नहीं भूलीं।' उसने देखा कि मैं पीएचडी कर रही हूं, स्टूडेंट लाइफ में भी हर महीने 4-5 लाख रुपये कमाकर घर भेजती हूं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेटवर्क बना रही हूं। मेरा इंटेलेक्चुअल और सामाजिक कद देखकर ही उसने मुझे अपने झांसे में लेने के लिए झूठ का जाल बुनना शुरू कर दिया। और मैं फंसती चली गई। सवाल: चंद्रशेखर की असलियत सामने आने पर घरवालों का क्या रिएक्शन था? रोहिणी: मेरे पिताजी का इंदौर में काफी नाम चलता है। मेरा प्रकरण सामने आया तो उनको धक्का लगा था कि मेरी बेटी ने ऐसा कैसे कर लिया... मतलब, जो पिता एक बेटी को स्कूल छोड़ने जाते, लेने आते, उन्होंने हमारी परवरिश और स्कूल एजुकेशन के लिए अपनी सरकारी नौकरी तक छोड़ दी। उनकी बेटी विदेश जाकर... उनको डर था। मेरी मम्मी बोलती भी थीं कि ये इतनी सीधी-सिंपल लड़की है, कहीं ऐसा न हो कि किसी के बहकावे में आ जाए। मेरी मम्मी जो बोलती थीं, हुआ भी वहीं। मुझे वहां पहुंचे हुए सिर्फ 6 महीने ही हुए थे। मैं वहां अकेली थी। इस चीज का ही फायदा इस व्यक्ति ने उठाया। इसने देखा कि लड़की प्रोग्रेसिव है, आगे गई है। इसने कभी मुझे बताया ही नहीं कि इसकी क्या जिंदगी है ? इसने तो टारगेट किया। मैंने अपने घरवालों से कभी कोई सच नहीं छिपाया। यही कारण है कि आज मेरे पापा और पूरा परिवार मेरी लड़ाई में मेरे साथ खड़ा है। सवाल : कैसे खुद को इस मुश्किल वक्त में संभाला? इस डिप्रेशन से कैसे खुद को निकाल पाईं? रोहिणी: "दो साल डिप्रेशन में स्विट्जरलैंड में कैसे काटे हैं, यह सिर्फ मैं जानती हूं। विदेश में न कोई अपना था, न सिर रखकर रोने के लिए कोई कंधा। टूटने की उस हद पर पहुंचकर मैंने दो-दो बार सुसाइड की कोशिश की। उस वक्त भारत से मम्मी-पापा के फोन आते थे, ‘बेटा, कुछ ऐसा मत करना कि हम भी जी न सकें। हम नहीं चाहते कि तुम्हारी लाश आए। एक झूठे और फरेबी इंसान के लिए हमें यह दर्द क्यों दे रही हो?’ परिवार के इसी संबल ने मुझे बिखरने से बचाया। मैंने खुद को संभाला और तय किया कि अब मरना नहीं, लड़ना है! पिछले दो सालों से आप मेरी यह लड़ाई देख रहे हैं। चंद्रशेखर ने मुझे झुकाने के लिए हर हथकंडा अपनाया। डराया, धमकाया, पैसों का लालच दिया, यहां तक कि शादी का दांव भी खेला। उसने कहा, ‘चलो, शादी कर लेते हैं, यह लड़ाई यहीं खत्म करो।’ लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। स्वाभिमान से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता। यह मेरी आत्मसम्मान की जंग है और मैं उन सभी बेटियों के लिए एक मिसाल बनना चाहती हूं कि अगर आपके साथ कुछ गलत हो, तो चुप मत बैठिए, लड़िए!" सवाल: क्या आपका चंद्रशेखर से अलगाव सिर्फ निजी रिश्ते का था या इसके पीछे राजनीतिक मतभेद भी थे? रोहिणी: बहुत सारी चीजें थीं। देखिए, एक तो जो व्यक्ति अपने निजी रिश्तों में धोखेबाज हो, वह कभी भी अपने सामाजिक रिश्तों या सामाजिक जीवन में ईमानदार हो ही नहीं सकता। न वह राजनीति में ईमानदार हो सकता है, न दोस्ती में ईमानदार हो सकता है। जब आपका कैरेक्टर चीटर है, तो ऐसे लोग कभी भी समाज के लिए दिल से कोई प्रयास कर ही नहीं सकता। पहले तो वो क्रांतिकारी बनता था। उसके पास कुछ नहीं था। एक गाड़ी, स्कॉर्पियो में घूम रहा था। लेकिन तब उसका वजूद ज्यादा था। आज तो उत्तर प्रदेश में उसको गली-मोहल्ले में कोई भी चप्पल फेंककर मार दे रहा है, ये उवका वजूद हो चुका है। आखिर क्या वजह है कि जो सपा प्रमुख अखिलेश जब आपकी एक भी सीट नहीं थी, वो पहले आपको एंटरटेन कर रहे थे। तब पार्टी बनाए एक साल भी नहीं हुआ था। आज अखिलेश जी आपका फोन नहीं उठा रहे, आपके साथ बैठना पसंद नहीं कर रहे, आपका नाम सुनना पसंद नहीं कर रहे। इसी तरह आपको ओवैसी सहित दूसरे नेता भी एंटरटेन नहीं कर रहे हैं। तो आपने तो बिल्कुल अपनी राजनीति खत्म कर ली। अब आप कोशिश कर रहे हो कि मैं कैसे करके नेक्स्ट टाइम सांसद बनूं। बस उसकी लड़ाई है और वो अब कभी पॉसिबल नहीं होगा, क्योंकि ये व्यक्ति जहां से चुनाव लड़ेगा, मैं वहीं जाकर विरोध करूंगी। सवाल : यूपी की राजनीति में चंद्रशेखर आज की तारीख में कितने बड़े नेता हैं? रोहिणी : मेरठ में मुझसे एक पूरा प्रतिनिधिमंडल (डेलीगेशन) मिलने आया था, जिसमें मुस्लिम, जाटव और सैनी समाज के लोग शामिल थे। उन्होंने साफ़ कहा कि इस बार वह अपनी लोकसभा की 5 सीटों में से एक भी नहीं जीत पाएगा। उसने मुस्लिम समाज को झूठे वादे करके मूर्ख बनाया कि 'हम आपकी हिफ़ाज़त करेंगे।' लेकिन जब संसद में वक्फ़ बोर्ड बिल पर लड़ाई का वक़्त आया, तो मुस्लिमों के साथ जंतर-मंतर पर खड़े होने के बजाय वह 15 दिनों के लिए अमेरिका भाग गया। यह इंसान किसी का सगा नहीं है। आज जनता को उसकी हक़ीक़त समझ आ चुकी है। आज न उसके साथ दलित हैं, न मुसलमान और न ही कोई अन्य समाज। सवर्ण तो 0% भी उसके साथ नहीं हैं। अब कोई भी उसकी राजनीति का समर्थन नहीं कर रहा।" सवाल: आपके पास चंद्रशेखर के खिलाफ कोई ऐसा सबूत है, जो आपने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है? रोहिणी: मैंने अपने सारे सबूत सीधे अदालत में पेश किए हैं। जो साक्ष्य मैंने कोर्ट को सौंपे हैं, उन्हें कभी सोशल मीडिया पर वायरल नहीं किया, क्योंकि अदालतें वायरल दावों को स्वीकार नहीं करतीं। मैंने सार्वजनिक रूप से सिर्फ वही बातें रखी हैं, जो मेरी बात को साबित करने के लिए जरूरी थीं, क्योंकि लोग तो सच सुनना ही नहीं चाहते थे, कहते थे कि ऐसा होना मुमकिन ही नहीं है। एक पीड़ित लड़की को इंसाफ पाने के लिए किस हद तक तपना पड़ता है, यह मैंने खुद झेला है। शायद ईश्वर ने मुझे इस तकलीफ से इसीलिए गुजरने दिया ताकि मैं दूसरों की पीड़ा को गहराई से समझ सकूं। आज मैं अपनी बहनों का दर्द बखूबी समझती हूं। मैं नहीं चाहती कि देश की कोई भी बहन या बेटी उस डिप्रेशन और दर्द से गुजरे, जिससे मैं गुजरी हूं।" सवाल: क्या अब शेष जिंदगी समाज के लिए समर्पित करने जा रही हैं? रोहिणी: मैंने अपने व्यक्तिगत जीवन का त्याग कर दिया है। मैंने बाबासाहेब आंबेडकर, कांशीराम साहब और बहन मायावती जी के जीवन से यही सीखा है कि बहुजन आंदोलन के लिए बड़ा त्याग करना पड़ता है। बाबासाहेब ने आंदोलन के लिए अपने चार बच्चे तक खो दिए और शादीशुदा होते हुए भी देश-विदेश में कार्य में जुटे रहे। कांशीराम साहब और बहन जी ने तो आजीवन शादी ही नहीं की। आज जब मैं बहन जी का वह ट्वीट याद करती हूं, तो मेरा दिल पसीज जाता है, जहां उन्होंने लिखा था कि 'अगर मैं अविवाहित औरत न होती, तो सुरक्षा के लिए भाई पर निर्भर न होना पड़ता।' मुझे डर लगता है कि कहीं मेरी स्थिति भी वैसी न हो जाए। इसीलिए मैंने बहन जी के खिलाफ कभी कुछ नहीं कहा और न कभी कहूंगी। वे मेरे लिए देवी समान और मेरी आदर्श हैं; मैं उन्हीं के पदचिन्हों पर चल रही हूं। पर बहन जी से मेरी बस एक ही टीस (शिकायत) रही—उन्होंने मुझे कभी अपना नहीं माना, शायद इसलिए क्योंकि मैं जाटव समाज से नहीं हूं। उन्होंने मेरे पक्ष में एक ट्वीट तक नहीं किया, न मुझे अपनी बेटी समझा जो अकेले लड़ रही थी। मैंने कितनी गुहार लगाई कि 'बहन जी, FIR कराइए, लोग मुझे झूठा बता रहे हैं', लेकिन मुझे समर्थन नहीं मिला।" सवाल: क्या आपकी बात बहन मायावती जी से हुई थी? रोहिणी: मेरी बहन जी (मायावती) से सीधे तो बात नहीं हुई, पर उनके बेहद करीबी लोगों से बात हुई थी। बहन जी खुद फोन पर बात नहीं करतीं, लेकिन उनके करीबियों ने इतना जरूर कहा कि 'उस लड़की के साथ गलत हुआ है और यह आदमी समाज के सामने जो मुखौटा पहने घूम रहा है, वो झूठा है।' शायद उन पर कोई राजनीतिक या सामाजिक दबाव रहा होगा। आज मुझे लगता है कि जिस दिन मैं बहन जी से मिलूंगी, हम दोनों की आंखों में आंसू होंगे। स्थिति यह है कि वे भी मुझसे कहेंगी—'बेटा देख, मैंने पूरा जीवन त्याग दिया, फिर भी समाज मुझे नहीं समझ पा रहा।' जिस जाटव समाज के लिए उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी कुर्बान कर दी, आज वही समाज उनके साथ खड़ा नहीं है। सवाल: चंद्रशेखर के साथ रहते हुए उनकी राजनीति को करीब से देखा है। उनकी सबसे बड़ी ताकत और कमजोरी क्या है? रोहिणी: उस व्यक्ति की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह लोगों को आसानी से बेवकूफ बना लेता है और लोग लंबे समय तक उसके छलावे में रहते हैं। वहीं उसकी सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि उसके पास कोई विजन ही नहीं है, न कोई दिशा, न कोई रोडमैप। वह मुझसे खुद कहता था—‘रोहिणी, एक बार सांसद बन गया तो जिंदगी भर पेंशन मिलेगी।’ जो इंसान अपनी पेंशन को लेकर इतना चिंतित हो, वह समाज का क्या भला करेगा? वह तो टाइप-4 बंगला मिलने से ही खुश है। खुद शेखी बघारता था कि ‘मुझे 200 करोड़ का बंगला और Z+ सिक्योरिटी मिली है।’ लग्जरी लाइफ जीने वाला ऐसा इंसान भला सामाजिक आंदोलन क्या चलाएगा? यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां कांशीराम साहब ने साइकिल चला-चलाकर समाज को जोड़ा था। यह वही यूपी है, जहां गुंडाराज के दौर में जब लड़कियां घर से निकलने में डरती थीं, तब बहन मायावती जी हाथ में लालटेन लेकर रात-रात भर गली-गली घूमती थीं। महापुरुषों की इस संघर्ष-भूमि पर आज एक शख्स 'फॉर्च्यूनर कल्चर' और हुड़दंग की राजनीति लेकर आ गया है। जिसका काम सिर्फ अपना घर भरना, 500 करोड़ इकट्ठा करना और 200 करोड़ के बंगले का सपना देखना है, ऐसे लोग हमारे समाज के नेता कभी नहीं बन सकते! मैं इस फर्जीवाड़े का ढांचा बहुत पहले समझ चुकी थी। इसी की पार्टी के 6-7 प्रदेश अध्यक्ष मेरे संपर्क में थे, जो मुझे अंदर की हर रिपोर्ट देते थे। इसे समाज के दर्द से कोई मतलब नहीं, यह सिर्फ लाशों पर राजनीति करना और हाइप क्रिएट करना जानता है। इन्होंने अमेरिका तक ढिंढोरा पीटा कि 'भीम पाठशाला' चलाकर हजारों दलित बच्चों को पढ़ा रहे हैं और इसे रजिस्टर्ड बताते हैं, जबकि हकीकत यह है कि जमीन पर एक भी भीम पाठशाला नहीं चल रही है। सवाल: एक महिला के तौर पर सार्वजनिक जीवन में उतरना कितना कठिन है? रोहिणी : यह हमारे लोकतंत्र का दुर्भाग्य है कि देश की 50% आबादी होने के बावजूद राजनीति और समाज में महिलाओं की वास्तविक हिस्सेदारी न के बराबर है। इंदिरा गांधी के बाद हमारी युवा पीढ़ी को आज तक कोई दूसरी महिला प्रधानमंत्री देखने का मौका क्यों नहीं मिला? संसद के दोनों सदनों के 725 सांसदों में से सिर्फ 171 महिलाएं हैं, फिर किस समानता का दावा किया जाता है? जब मेरे जैसी कम उम्र की लड़कियां राजनीति में कदम रखती हैं, तो उनका स्वागत विचारों से नहीं, बल्कि चरित्र हनन और मानसिक प्रताड़ना से किया जाता है। समाज में यह घटिया धारणा बना दी गई है कि राजनीति में आने वाली महिला चरित्रहीन होगी। इस मानसिकता को उखाड़ फेंकना बेहद जरूरी है। जब महिलाएं शीर्ष पदों पर पहुंचेंगी, तभी वे अपनी महिला कार्यकर्ताओं को सुरक्षा और संबल दे पाएंगी। मैंने खुद सामाजिक आंदोलन के नाम पर जुड़कर शोषण और छलावे को झेला है। मैं इस लड़ाई को इसलिए लड़ रही हूं, ताकि मेरे बाद इस रास्ते पर आने वाली किसी भी दूसरी बेटी को इस भयानक दौर और शोषण से न गुजरना पड़े।" सवाल: दलित आंदोलन के तीन मॉडल (बसपा, सपा का पीडीए और चंद्रशेखर का दलित प्रेम) में किसका सबसे अच्छा मानती हैं? रोहिणी: जब बसपा आई थी, तो बसपा मॉडल को लोगों ने सराहा। लोग आए और उन्हें सपोर्ट किया। इसीलिए बहन जी चार बार मुख्यमंत्री बनीं। पीडीए मॉडल अभी टोटली न्यू है। उसके पहले भी इन्होंने काम किया है। मुझे लगता है कि इस बार बहुत बड़े स्तर पर जाटव कम्युनिटी अखिलेश जी के साथ जुड़ रही है। उन्हें वो अपना विकल्प मान रही है। वाल्मीकि कम्युनिटी भी उनसे बहुत खुश है और जुड़ रही है। और रही बात तीसरे मॉडल की (चंद्रशेखर), तो वो कोई मॉडल ही नहीं है। वो एक इंसान को खुद को राजनीति में स्थापित करने की स्ट्रेटजी थी। उसके लिए कोई समाज या उसकी समस्याएं मायने नहीं रखते। वो सिर्फ खुद के लिए राजनीति में आया है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी में PRD जवानों का मानदेय बढ़ा, मुफ्त इलाज होगा:NSG जवानों को ट्रेनिंग मिलेगी, 900 नई कोर्ट खुलेंगी; योगी कैबिनेट में 23 प्रस्ताव पास लखनऊ में मंगलवार शाम 5 बजे योगी कैबिनेट बैठक हुई। इसमें 23 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में शामिल होने मंत्री मनोज पांडेय हेलिकॉप्टर से पहुंचे। मनोज पांडेय इन दिनों अपने क्षेत्र में पंडित प्रदीप मिश्रा से शिव महापुराण की कथा करा रहे हैं। इसीलिए सरकार की तरफ से उनके लिए हेलिकॉप्टर भेजा गया। वहीं, कैबिनेट में आज सबसे बड़ा फैसला PRD जवानों का मानदेय बढ़ाने और उनको मुफ्त इलाज देना का रहा। इसके अलावा यूपी में 900 नई कोर्ट खुलने का प्रस्ताव भी पास किया गया। वहीं, अयोध्या के मिल्कीपुर में NSG का रीजनल सेंटर बनाया जाएगा, जहां जवानों को ट्रेनिंग दी जाएगी। मथुरा के छाता में एथेनॉल प्लांट लगाया जाएगा। अलीगढ़ में नई यूनिवर्सिटी को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने विशेष सुरक्षा बल (SPG) को हाईटेक हथियार देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। PRD जवानों को 5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे के संशोधित प्रस्ताव के अलावा परिषदीय प्राथमिक स्कूलों को स्मार्ट बनाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है। पढ़िए पूरी खबर…
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