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    किडनी गैंग के 15 चेहरे...दलाल 8वीं पास:प्रीति आहूजा IMA समेत कई संगठनों में पदाधिकारी; जानिए कैसे काम करता था सिंडिकेट

    8 hours ago

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    कानपुर में 50 लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। आहूजा हॉस्पिटल से शुरू हुआ किडनी ट्रांसप्लांट का खेल यूपी के 4 शहरों के 9 हॉस्पिटल तक पहुंच गया। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाला 50 लाख से 2.5 करोड़ रुपए तक पेमेंट कर रहा था। 8वीं पास एजेंट शिवम अग्रवाल और ओटी टेक्नीशियन किडनी ट्रांसप्लांट जैसे मुश्किल ऑपरेशन कर रहे थे। पहली बार ये मामला उस वक्त खुला, जब बिहार के आयुष को गेम एप से फंसाया गया। उसकी किडनी डोनेट कराने के बाद तय रकम से 50 हजार रुपए कम दिए गए। इस पर आयुष ने शिकायत कर दी और पूरा मामला खुल गया। कानपुर के CMO हरिदत्त नेमी ने आहूजा हॉस्पिटल सील कर दिया। हॉस्पिटल के मालिक पति-पत्नी समेत 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 6 आरोपी अभी फरार हैं। जिन्हें अरेस्ट किया गया, वो क्या काम करते थे? किडनी डोनर को कैसे फंसाते थे? किडनी जिस पेशेंट को लगनी होती, उसको हॉस्पिटल तक कैसे लाया जाता था? डॉक्टर कौन-कौन थे? इस खेल को अंजाम देने में किसकी क्या भूमिका थी? इस रिपोर्ट में पढ़िए… किडनी ट्रांसप्लांट केस के मुख्य आरोपियों में डॉ. प्रीति आहूजा है। जिस आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट होता था, डॉ. प्रीति उसकी मालकिन है। प्रीति MBBS, MD (मेडिसिन) है। वह हार्ट पेशेंट्स देखती थी। 5 मंजिला इस हॉस्पिटल में 35 बेड हैं। अमूमन वो अपने हॉस्पिटल में कम बैठती थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कानपुर यूनिट में उपाध्यक्ष है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में मेडिकल ऑफिसर है। मतलब, मेडिकल के आधार पर छुट्टी वगैरह वही बनाती थी। कानपुर की डायबिटीज एसोसिएशन की सचिव है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए बने फिजिशियन फोरम की सदस्य है। इतने संगठनों से जुड़े होने के चलते लोकल मेडिकल अफसर डॉ. प्रीति के खिलाफ जांच करने की हिम्मत ही नहीं कर पाए। दरअसल, आहूजा हॉस्पिटल 2 साल पहले बना था। जांच के मुताबिक 1 साल से इसमें किडनी ट्रांसप्लांट का धंधा चल रहा था। किडनी निकालने और उसे ट्रांसप्लांट करने के लिए सुबह 3 से 4 बजे के बीच का समय फिक्स रखा जाता था। इस दौरान ज्यादातर कर्मचारियों को छुट्टी पर रखा जाता था। मरीज भी कम भर्ती किए जाते थे। डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति का पति है। 54 साल का सुरजीत MBBS, DARS, MD (पैथोलॉजी) है। यानी लैब टेस्ट, ब्लड, यूरिन, बायोप्सी का एक्सपर्ट। पहले कानपुर के अलग-अलग हॉस्पिटल में बैठता था। फिर आहूजा हॉस्पिटल बना लिया। सुरजीत हॉस्पिटल का पूरा मैनेजमेंट देखता था। कानपुर और दूसरे शहरों के कुल 27 डॉक्टरों को अपने हॉस्पिटल के पैनल में रखा था। वह देखता था कि किडनी के हर केस में कितने में लेन-देन हो रहा है? डॉक्टर को कितना देना होगा? मरीज को किस हॉस्पिटल में भर्ती करना है? ऑपरेशन कब करना है? उस दौरान हॉस्पिटल के CCTV बंद करवाकर स्टाफ को हॉस्पिटल से बाहर भेज देता था। जालौन का शिवम अग्रवाल कानपुर में शिवम काड़ा के नाम से जाना जाता था। 15 साल की उम्र में कानपुर भाग आया था। 8वीं के बाद स्कूल नहीं गया। कानपुर में एंबुलेंस चलाने लगा। उसका संपर्क प्रीति और सुरजीत से हुआ। किडनी के नेक्सेस को समझा। इसके बाद आहूजा हॉस्पिटल से जुड़ गया और वहीं एंबुलेंस चलाने लगा। शिवम इस मामले में सबसे अहम है, क्योंकि वह क्लाइंट खोजता था। इसके लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता, लोगों से बात करता था। उनकी जरूरत को समझता था। फिर जब मौका बनते देखता तो टेलीग्राम से चैटिंग करते हुए उनके सामने किडनी बेचने का ऑप्शन रख देता था। इसके बदले में उन्हें 5 से 10 लाख रुपए तक देने का वादा करता था। कहता था कि एक किडनी से भी जिंदगी चल जाती है। फिर जब डील हो जाती तो आहूजा हॉस्पिटल में पूरी व्यवस्था बनवाता था। शिवम काड़ा डायलिसिस के मरीजों को भी खोजता था। उसका अलग-अलग हॉस्पिटल में संपर्क था। वहां से उसे किडनी के मरीजों का डेटा मिल जाता था। शिवम उनसे संपर्क करता और किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा करता था। एक रिकॉर्डिंग में 50 किडनी ट्रांसप्लांट की बात सामने आई है। MBA स्टूडेंट आयुष से शिवम ने ही संपर्क किया था। पैसे की डील के बाद उसका डॉ. अफजल से संपर्क करवाया था। शिवम इस नेक्सेस में इतना आगे बढ़ चुका था कि वह ICU में आला (स्टेथोस्कोप) लगाकर किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों की जांच करता था। साउथ अफ्रीका की लड़की अरेबिका के साथ उसका एक वीडियो भी सामने आया था। किडनी केस में जांच के दौरान कई बार नोएडा के डॉ. रोहित का नाम आया। दलाल शुभम ने मोबाइल पर बात करते हुए उसका नाम लिया, जिसकी ऑडियो पुलिस को मिली। फिर जब गाजियाबाद से ओटी टेक्नीशियन राजेश और कुलदीप गिरफ्तार हुए, तब भी उसका नाम सामने आया। पुलिस की टीमें छापामारी कर रही हैं, लेकिन अब तक रोहित को पकड़ नहीं पाई हैं। कानपुर में जब किडनी ट्रांसप्लांट करनी होती थी, तब डॉ. रोहित को बुलाया जाता था। रोहित अक्सर दिल्ली के डॉ. अली के साथ आता था। गाजियाबाद से गिरफ्तार किए गए ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह भी साथ रहते थे। राजेश ने पूछताछ में बताया था कि ऑपरेशन थिएटर में मेरे हाथ ठीक चलते थे। इससे प्रभावित होकर रोहित ने मुझे अपने साथ जोड़ लिया। रोहित, राजेश, कुलदीप और अली, ये चार एक साथ फ्लाइट से आते और ऑपरेशन करने के बाद वहां से निकल जाते। वो एनेस्थेसियोलॉजिस्ट है। मरीज को कितनी एनेस्थिसिया देनी है, यह रोहित ही तय करता था। वो एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 2 से 3 लाख रुपए लेता था। डॉ. मुदस्सिर अली को ये लोग डॉ. अली कहते थे। वो दिल्ली के द्वारिका का रहने वाला है। ऑपरेशन थिएटर के अंदर डॉ. अली मुख्य भूमिका में रहता था। वो पेट में सर्जिकल कट लगाता था। किडनी को पेट के अंदर से निकालकर दूसरे मरीज (रिसीवर) के पेट में शिफ्ट करता था। डॉ. अली कभी अकेले कानपुर नहीं आता था। उसके साथ एक डॉक्टर और दो सहायक होते थे। जब ऑपरेशन हो जाता, तब दो लोग लखनऊ और दो गाजियाबाद की तरफ चले जाते थे। गाजियाबाद के राजेश कुमार का कहना है कि जनवरी से अब तक 5 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं। सभी में डॉ. अली रहा है। डॉ. अली अब तक फरार है। उसकी पत्नी ने पुलिस से कहा कि मेरे पति कोई डॉक्टर नहीं हैं। वो ओटी टेक्नीशियन हैं। इस एक लाइन ने मामले में बड़ी चर्चा छेड़ दी कि क्या ओटी टेक्नीशियन ही यह सब काम कर रहा था? डॉ. अफजल मेरठ के मकबरा आबू से सटे मोहल्ला बजरिया का रहने वाला है। खुशहालनगर में अपने एक रिश्तेदार के घर पर क्लिनिक चलाता था। बाद में क्लिनिक बिलाल के मकान में शिफ्ट कर दिया था। उन्हें 4 महीने से किराया भी नहीं दिया था। अफजल ही किडनी के मरीजों को डील करता था। मेरठ की पारुल को अफजल गाड़ी से कानपुर के आहूजा हॉस्पिटल लेकर गया था, वहां ट्रांसप्लांट करवाया। गाड़ी का ड्राइवर परवेज सैफी था। डॉ. अफजल अपनी क्लिनिक से ज्यादा मेरठ की अल्फा क्लिनिक में बैठता था। किडनी रैकेट से जुड़ने के बाद उसने इतना पैसा कमा लिया था कि मेरठ की लोकल प्रैक्टिस न के बराबर करता था। मेरठ में ही एक बड़ा घर बनवा लिया था। अफजल का एक वीडियो पुलिस को मिला था, जिसमें वो 500-500 की गडि्डयों को बेड पर बिछाकर उनके ऊपर लेटा हुआ था। डॉ. राम प्रकाश कुशवाहा मेडि लाइफ हॉस्पिटल का संचालक है। जिस आयुष की किडनी आहूजा हॉस्पिटल में निकाली गई, उसे दलाल शिवम ने मेडि लाइफ हॉस्पिटल में ही भर्ती कराया था। पुलिस से राम प्रकाश ने कहा था कि उसका आरोही हॉस्पिटल से समझौता हुआ है। वहां से मरीज आते हैं, लेकिन बाद में यह झूठ निकला था। पुलिस ने राम प्रकाश को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। जांच में यह भी पता चला कि आहूजा हॉस्पिटल में जिन लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट होता था, उन्हें मेडि लाइफ हॉस्पिटल में लाकर भर्ती कराया जाता था। भर्ती होने वाले मरीजों का यहां रिकॉर्ड भी नहीं रखा जाता था। किडनी ट्रांसप्लांट जिन मरीजों का करना होता था, उनके लिए स्पेशल स्टाफ रहता था। किडनी ट्रांसप्लांट केस में डॉ. राजेश कुमार को भी आरोपी बनाया गया है। राजेश भी मेडि लाइफ हॉस्पिटल में राम प्रकाश का सहयोगी संचालक है। किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े मरीजों को एडमिट करने से लेकर उनके ट्रीटमेंट तक डॉ. राजेश ही देखभाल की जिम्मेदारी उठा रहा था। राजेश ही ये रिकॉर्ड रखता था कि कब कौन-सा मरीज ऑपरेशन के लिए आ रहा है? शुरुआत में जो दवाएं देनी चाहिए, वो उन्हें दी गई हैं या नहीं? स्टाफ के साथ भी राजेश ही कम्युनिकेट कर रहा था। किडनी ट्रांसप्लांट का ये खेल प्रीति हॉस्पिटल से भी चलता था। प्रीति हॉस्पिटल का संचालक डॉ. नरेंद्र सिंह उर्फ नंदू को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि नरेंद्र के नाम पर कल्याणपुर इलाके में न्यू लाइफ बेबी केयर हॉस्पिटल भी रजिस्टर्ड है। इस हॉस्पिटल का लाइसेंस और बिल्डिंग का रेंट एग्रीमेंट नंदू सिंह के नाम पर है। नंदू के दूसरे पार्टनर विष्णु सिंह के बैंक में लाखों रुपए के संदिग्ध लेन-देन पाए गए हैं। किडनी ट्रांसप्लांट का जो काम आहूजा हॉस्पिटल में होता था, वही काम प्रीति हॉस्पिटल से भी हो रहा था। आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट के अगले दिन एक मरीज को प्रीति हॉस्पिटल में भर्ती कर दिया जाता था। नरेंद्र बड़ी चालाकी से ये सब कुछ मैनेज कर लेता था। एक केस में 10 से 20 लाख रुपए की कमाई करता था। अब कानपुर पुलिस इसके सभी बैंकों के ट्रांजेक्शन को जांच रही है। किडनी के इस केस में मेरठ के सैफी परवेज को गिरफ्तार किया है। सैफी डॉक्टरों के आने-जाने के लिए गाड़ियों की व्यवस्था करता था। वह खुद डॉ. अफजल को 3 बार अपनी गाड़ी से गाजियाबाद से कानपुर लेकर आया था। एक वीडियो में तो अफजल करीब 15 लाख रुपए के साथ बेड पर लेटा था। सैफी उसका वीडियो बना रहा था। वीडियो के आखिर में वह खुद भी दिखता था। सैफी का जब क्रिमिनल बैकग्राउंड चेक किया गया तो पता चला कि वह डकैती, लूट समेत कुल 7 मुकदमों में आरोपी है। परवेज को किडनी से जुड़े सारे अपडेट पता रहते थे। पैसों को सुरक्षित एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने का काम वही करता था। वह अफजल का इतना खास हो गया था कि जब मेरठ के अंकित से गाड़ी बुक करवाई जाती थी, तब ड्राइवर के रूप में सैफी परवेज ही मांगा जाता था। किडनी केस के खुलासे के करीब 6 दिन बाद नवीन पांडेय नाम के व्यक्ति का नाम आया था। पता चला कि ये प्रयागराज का है। दलाल शिवम अग्रवाल से जुड़ा है। शिवम के ही पास से एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली, जिसमें नवीन कह रहा कि तुम्हारे नाम पर साहिल ने आधे रेट में किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा कर लिया है। तुम 40 में करवाते हो, वह 24 में करवाने को बोल रहा। इस ऑडियो में शिवम नवीन पर भड़कते हुए कहता है कि वो शिवम और डॉ. रोहित को नहीं जानता। पुलिस ने नवीन को पकड़ने के लिए छापेमारी की तो वह घर से फरार हो गया। नवीन की पत्नी का कहना है कि नवीन और डॉ. रोहित तो 1 साल से जुड़े हैं। नवीन और रोहित 5 साल से जुड़े हैं। मतलब, नवीन इस सिंडिकेट का पुराना खिलाड़ी है। किडनी केस में जांच का दायरा बढ़ा तो मामला गाजियाबाद तक पहुंच गया। यहां की पुलिस ने ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को गिरफ्तार किया। कुलदीप हापुड़ के पिलखुआ का रहने वाला है। शांति गोपाल हॉस्पिटल में ओटी टेक्नीशियन है। वह इस नेक्सेस में डॉ. रोहित और अफजल के जरिए शामिल हुआ था। जब भी क्लाइंट सेट हो जाते, ये गाजियाबाद से कानपुर आता और किडनी ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर की मदद करता था। जो काम कुलदीप का था, वही काम राजेश कुमार का भी था। वह नोएडा के सर्वोदय हॉस्पिटल में ओटी टेक्नीशियन है। ऑपरेशन थिएटर में काम करने का 10 साल से ज्यादा का अनुभव है। इसलिए किडनी ट्रांसप्लांट के काम में इसे जरूर रखा जाता था। इसे एक केस में 30 से 40 हजार रुपए मिलते थे। फ्लाइट से दिल्ली से कानपुर आता और फिर यहां ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की मदद करता था। ऑपरेशन होने के बाद पैसा लेता और वापस चला जाता। मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल का भी कनेक्शन किडनी केस से जुड़ा है। इसलिए इस हॉस्पिटल के फिजियोथेरेपिस्ट अमित और डॉ. रोहन को पुलिस तलाश रही है। ओटी टेक्नीशियन कुलदीप राघव अस्पताल में टेक्नीशियन के तौर पर काम कर रहा था। लेकिन, उसके संपर्क दूसरे डॉक्टरों से रहते थे। वो नोएडा के सर्वोदय हॉस्पिटल में काम करता था। यहां के डॉक्टर ने पुलिस को बताया कि जिस दिन ये घटना सामने आई, उससे एक दिन पहले कुलदीप ने हॉस्पिटल से छुट्‌टी ले ली थी। वो यहां पर 12 साल से काम कर रहा था। बीच-बीच में छुट्‌टी लेकर चला जाता था। ये नहीं पता था कि वो कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट के लिए जाता था। कुलदीप के मोबाइल से पुलिस को किडनी ट्रांसप्लांट के कई केस की जानकारी मिली हैं। इसमें डॉ. रोहित के साथ उसकी बातचीत है। यहीं से पता चला कि उसको हर केस के बाद 30 हजार रुपए का पेमेंट किया जाता था। डॉ. वैभव के बारे में सबसे पहले आहूजा हॉस्पिटल के संचालक डॉ. सुरजीत ने बताया था। उसने कहा था कि जब भी रोहित ऑपरेशन करने आता था, उसके के साथ डॉ. वैभव भी होता था। ये लोग जब ओटी के अंदर होते थे, तब मैं वहां नहीं जाता था, क्योंकि मुझे हर केस के बाद 2.75 लाख का पेमेंट हो जाता था। डॉ. वैभव पेशे से डेंटिस्ट है। वह किडनी ट्रांसप्लांट में क्या मदद कर रहा था, ये डॉ. रोहित और वैभव की अरेस्टिंग के बाद ही सामने आएगा। डॉ. अफजल के मोबाइल से मिले क्लू का पीछा करती हुई पुलिस मेरठ तक पहुंची। डॉ. अमित उर्फ अनुराग के घर पर दबिश दी गई, लेकिन वो पहले ही वहां से भाग निकला था। पुलिस के पास इनपुट था कि वो अल्फा हॉस्पिटल का संचालक है। रोहित के साथ काम करता था। जब भी किडनी ट्रांसप्लांट करना होता, वो रोहित के साथ कानपुर आता था। आपके विधायक को टिकट मिलना चाहिए या नहीं, सर्वे में हिस्सा लेकर बताएं यूपी में विधायकों के 4 साल पूरे हो चुके हैं। क्या आपके मौजूदा विधायक को 2027 के विधानसभा चुनाव में टिकट मिलना चाहिए? भास्कर सर्वे में हिस्सा लेकर बताइए… ------------------------- ये खबरें भी पढ़ें- OT टेक्नीशियन अली ने दिल्ली में ली ऑपरेशन की ट्रेनिंग: डॉ. अफजल का खास परवेज गया जेल, शिवम के मोबाइल में मिले किडनी डोनर के 3 ग्रुप किराए पर अस्पतालों का ओटी (ऑपरेशन थियेटर) लेकर किडनी ट्रांसप्लांट जैसा बड़ा ऑपरेशन करने वाले मुद्स्सिर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली ने बाकायदा दिल्ली में इसकी ट्रेनिंग ली थी। डॉ. रोहित की टीम में अली अकेला नहीं, बल्कि अन्य ओटी स्पेशलिस्ट भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया। पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी है। पढ़ें पूरी खबर… कानपुर में किडनी निकालने वाला डॉक्टर नोटों पर लेटता था, बिस्तर पर गड्डियों से हवा करता दिखा अफजल कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट केस में 3 नए वीडियो मिले हैं। ये सभी वीडियो दलाल शिवम अग्रवाल के मोबाइल से मिले हैं। कुछ ऐसी चैट भी मिली हैं, जो इस काले कारोबार का खुलासा करती हैं। पहला वीडियो- इसमें किडनी निकालने वाला डॉक्टर अफजल दिख रहा है। वह नोटों की गड्डियों पर लेटा है। बेड पर करीब 15 लाख रुपए चादर की तरह बिछे दिख रहे हैं। पढ़िए पूरी खबर... किस हॉस्पिटल में किसका ट्रांसप्लांट, सब सीक्रेट, ढाई करोड़ में अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का कनेक्शन सिर्फ यूपी ही नहीं, विदेश से भी जुड़ रहा है। विदेशों के मरीज भी यहां चोरी-छिपे किडनी ट्रांसप्लांट कराने आते थे। तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल करने के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। डोनर और रिसीवर दोनों से डील फाइनल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग ठिकानों पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पढ़ें पूरी खबर
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