Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    रात 8:30 बजे भारत ने मचाया 193 देशों में तहलका, मिली ऐतिहासिक जीत!

    3 hours from now

    1

    0

    6 अप्रैल रात 8:30 बजे भारत ने दुनिया के इतिहास में अपनी सबसे मजबूत जीत दर्ज करा दी है। इस ऐतिहासिक जीत की जानकारी खुद पीएम मोदी ने 6 अप्रैल को ही रात 9:41 पर दुनिया को दी। लेकिन भारत के करोड़ों लोगों का इस दुनिया हिला देने वाली खबर पर ध्यान ही नहीं गया। जो काम 193 देश नहीं कर पाए वह भारत ने कर दिखाया है। यह खबर भारत के बच्चे-बच्चे को पता होनी चाहिए। भारत के तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी निर्मित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकिटी हासिल कर ली है। क्रिटिकिटी हासिल करने का मतलब है कि इस न्यूक्लियर रिएक्टर ने काम करना शुरू कर दिया है। भारत ने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के सेकंड स्टेज को एक्टिवेट कर दिया है। ऐसा करने वाला भारत दुनिया का दूसरा देश बन गया है। पहले नंबर पर रूस है। यह कितनी बड़ी सफलता है उसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अमेरिका, जापान, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने यह काम करने के लिए $50 बिलियन डॉलर से ज्यादा पैसा खर्च कर दिया। इसे भी पढ़ें: 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम': पीएम मोदी का सांसदों को भावुक संदेश-'आने वाली पीढ़ियों के लिए एकजुट हों'लेकिन इसके बाद इन सभी देशों ने सरेंडर कर दिया। इन्होंने कहा कि ऐसा हो ही नहीं सकता। लेकिन भारत ने यह कर दिखाया है। भारत ने असल में क्या किया है, वह अब आपको बेहद ही आसान भाषा में समझाते हैं। बोनस के तौर पर पहले ही आपको बता देते हैं कि भारत आने वाले समय में ऐसी न्यूक्लियर शक्ति हासिल करने वाला है जिससे 400 सालों तक बिजली पैदा की जा सकती है। इसके अलावा भारत हर साल 300 से ज्यादा न्यूक्लियर हथियार भी बना सकता है। अब देखिए कि भारत ने तमिलनाडु में क्या खेल किया है।इसे भी पढ़ें: Assembly Elections 2026: पीएम मोदी ने असम, केरल और पुडुचेरी के मतदाताओं से की रिकॉर्ड मतदान की अपील भारत का फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्रिटिकिटी हासिल कर चुका है यानी शुरू हो गया है। भारत हर साल तेल और यूरेनियम खरीदने में अरबों रुपए बाहर खर्च कर देता है क्योंकि भारत की फ्यूल क्षमता सीमित है लेकिन अब सब कुछ बदलने वाला है। भारत ने जो रिएक्टर बनाया है, वह कोई सामान्य न्यूक्लियर रिएक्टर नहीं है। इस न्यूक्लियर रिएक्टर में ऊर्जा बनाने के लिए जितना फ्यूल इस्तेमाल होता है, यह उससे ज्यादा फ्यूल पैदा कर देता है। इसीलिए इसे फास्ट ब्रीडर कहा जाता है। 1950 के दशक में डॉक्टर होमी भाबा ने भारत की भौगोलिक वास्तविकता को पहचान लिया था। उन्होंने कहा था कि भारत के पास वैश्विक यूरेनियम का मुश्किल से सिर्फ एक या 2% हिस्सा है। लेकिन भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा थोरियम भंडार है। भारत के पास दुनिया का करीब 25% थोरियम मौजूद है। लेकिन भारत के सामने यहां सवाल था कि न्यूक्लियर एनर्जी और न्यूक्लियर हथियार पैदा करने के लिए तो यूरेनियम ही चाहिए। तो ऐसे में क्या किया जाए? इसी कड़ी में भारत ने अपने थोरियम को यूरेनियम में बदलने का प्रोजेक्ट शुरू कर दिया और अब भारत ने थोरियम को यूरेनियम में कन्वर्ट करने की दिशा में सबसे बड़ी बाधा को पार कर लिया है। यानी आने वाले समय में भारत को अब किसी देश की तरफ यूरेनियम के लिए नहीं देखना होगा। भारत अपनी ही मिट्टी और चट्टानों से थोरियम को यूरेनियम में बदल देगा। आपको बता दें कि थोरियम चांदी जैसा दिखता है और प्राकृतिक रूप से मिट्टी, चट्टानों और समुद्री रेत में मिलता है। भारत के केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में थोरियम के भंडार हैं। यह कितना जबरदस्त पदार्थ है उसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि भारत को एक दिन की बिजली बनाने के लिए अंदाजन 20 से 30 लाख टन कोयला लगता है। लेकिन इतनी ही बिजली भारत सिर्फ 3 से 4 टन थोरियम से बना सकता है। 
    Click here to Read more
    Prev Article
    US-Iran Talks से पहले Geopolitics गरमाई; बैठक के चलते Pakistan की राजधानी Islamabad में 2 दिन की छुट्टी
    Next Article
    कूटनीतिक ब्लंडर हो गया, Pakistan ने करा दिया कांड? Shehbaz Sharif की 'गलती' से लेबनान में बरपा इज़रायली कहर?

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment