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    दम है तो करो हमला...खुला चैलेंज, ईरान ने कर दी ट्रंप की बोलती बंद

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    मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशें जारी हैं। अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि मंडल स्विट्जरलैंड के दावोंस में बातचीत की मेज पर बैठे हैं। पाकिस्तान और क़तर इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाते दिखे। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और तनाव कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा भी हुई। लेकिन इसी बीच एक बार फिर अमेरिका और ईरान के बीच तल्की बढ़ती नजर आ रही है। तनाव की वजह बने हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्रुथ सोशल पर ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसने लेबनान में हिजबुल्ला को रोकने के लिए कदम नहीं उठाए तो अमेरिका उस पर पहले से ज्यादा भीषण हमला करेगा। बकायदा ट्रंप ने लिखा था कि ईरान को अपने प्रॉक्सी समूह को तुरंत गड़बड़ी फैलाने से रोकना चाहिए। नहीं तो अमेरिका बहुत कड़ी कारवाई करेगा। इसे भी पढ़ें: US-Iran Meeting में हाई-वोल्टेज ड्रामा, बैठक में क्यों भड़क गया ईरान, देखते रह गए JD Vance और हैरान शहबाज शरीफट्रंप की चेतावनी पर अब ईरान ने भी बेहद सख्त और सीधे शब्दों में जवाब दिया। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद के स्पीकर मोहम्मद मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ़ ने साफ कह दिया कि उनका देश अमेरिकी धमकियों से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिकी धमकियों का असर होता तो आज अमेरिका ऐसी निराशाजनक स्थिति में नहीं होता। ग़ालिबफ़ ने कहा कि क्या उन्हें नहीं लगता कि अगर उनकी धमकियों का कोई असर होता तो वे आज ऐसी निराशाजनक स्थिति में नहीं होते। हम अमेरिकी धमकियों की परवाह नहीं करते। उन्हें अपने बयानों को लेकर सावधान रहना चाहिए। हमारी सेना उन्हें अलग तरह से जवाब देने के लिए तैयार है। वह चाहे कुछ भी कहें हम कारवाई करने वाले लोग हैं। ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया जब एक हफ्ते पहले दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम की घोषणा हुई थी और उसके बाद पहली बार प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत हो रही है।इसे भी पढ़ें: Lebanon पर बढ़ते तनाव के बीच Netanyahu का Trump को दो टूक जवाब- हमारी राय हमेशा एक नहीं होती।अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस बैठक में शामिल है। जबकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई खुद मोहम्मद बागेरी कर रहे हैं। इसी बीच लेबनान पर इजराइल के बढ़ते हमलों का हवाला देते हुए ईरान ने हुर्मज स्टेट को फिर से बंद करने का दावा किया है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग खुला है और जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। हुर्मज स्टेट को लेकर सामने आई खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई है। कुल मिलाकर एक तरफ अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी तरफ धमकियों और जवाबी चेतावनीयों ने एक बार फिर मिडिल ईस्ट के हालात को बेहद नाजुक बना दिया है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि दावोस में जारी वार्ता आगे बढ़ती है या फिर बयानबाजी का यह नया दौर क्षेत्र को एक बार फिर बड़े टकराव की ओर धकेल देता है। स्विट्जरलैंड का आलीशान बुरगिन स्टॉक रिसोर्ट मेज पर सजे चार देशों के झंडे और हवा में तैरती युद्ध जैसी कड़वाहट लेक लूज़ समिट में कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। एक तरफ दुनिया की सुपर पावर अमेरिका है तो दूसरी तरफ अपने कड़े तेवरों के लिए मशहूर ईरान। इसे भी पढ़ें: जब तक मैं PM हूं...भाई की कसम खाकर नेतन्याहू ने दी भारत को चौंकाने वाली ताकत!क़तर और पाकिस्तान बिजोलिए की कुर्सी पर बैठे हैं। लेकिन कैमरों के फ्लैश चमकने से ठीक पहले कूटनीति का जो नरमगरम नजारा दिखा वह हैरान करने वाला है। इस महा बैठक की शुरुआत ही भारी कड़वाहट और तनाव के साए में हुई। कैमरे तैयार थे लेकिन ईरानी प्रतिनिधि मंडल ने अमेरिकी दल के साथ पहले से तय हैंडशेक यानी हाथ मिलाने और जॉइंट फोटो ऑफ से साफ मना कर दिया। सार्वजनिक तौर पर हाथ ना मिलाकर ईरान ने यह सख्त संदेश दिया है कि वह अमेरिका के सामने झुकने वाला नहीं है। कूटनीतिक दूरियों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे डी वेंस पाकिस्तान और क़तर के राष्ट्र अध्यक्षों के साथ मीडिया को संबोधित कर रहे थे तब ईरान ने उस मंच से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। ईरान वैश्विक मीडिया के सामने अमेरिका को एक तरफ़ा नैरेटिव सेट करने का कोई मौका नहीं देना चाहता था। लेकिन इसी कड़े विरोध के बीच एक नरमी तब दिखी जब ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने मध्यस्थ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को बेहद गर्मजशी से गले लगाया। ईरान ने जता दिया कि वह दुनिया से अलग-थलग नहीं है। बस उसकी लड़ाई वाशिंगटन से है। बंद कमरे के अंदर का नजारा किसी साइलेंट वॉर से कम नहीं था। Stay updated with Latest International News in Hindi https://www.prabhasakshi.com/international on Prabhasakshi
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