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    सिद्धार्थनगर में पेट्रोल-डीजल का संकट गहराया:2-4 घंटे कतार में इंतजार, कई पंपों पर नो स्टॉक के बोर्ड लगे

    3 hours ago

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    सिद्धार्थनगर में पेट्रोल और डीजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। जहां-जहां ईंधन उपलब्ध है, वहां लंबी कतारें लगी हैं। तेज धूप में घंटों इंतजार के बाद भी कई लोगों को बिना ईंधन के लौटना पड़ रहा है, जबकि वाहनों की लाइनें सड़कों तक फैल गई हैं। जिला पूर्ति अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, जिले में कुल 123 पेट्रोल पंप हैं, जिनमें से करीब 90 पंपों पर आपूर्ति जारी है। उनका दावा है कि बाकी पंपों पर भी जल्द आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी और शाम तक स्थिति सामान्य हो सकती है। हालांकि, जमीनी हालात इन दावों से मेल नहीं खा रहे। कई पेट्रोल पंपों पर ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगे हैं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। जिला मुख्यालय की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। यहां कुल 6 पंपों में से अधिकांश सूख चुके हैं। फिलहाल मधुकरपुर स्थित भारत पेट्रोलियम और बांसी स्टैंड के इंडियन ऑयल पंप पर ही पेट्रोल-डीजल मिल रहा है। इन दोनों जगहों पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ रही है और लोगों को 2 से 4 घंटे तक लाइन में लगना पड़ रहा है। ईंधन संकट का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। लोगों के जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं और आवागमन बाधित हो रहा है। कई स्थानों पर कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी बुनियादी जरूरतों की आपूर्ति सुचारू नहीं है और प्रशासन भ्रष्टाचार रोकने में विफल है। वहीं, सपा नेता उग्रसेन प्रताप सिंह के नेतृत्व में आंदोलन की चेतावनी दी गई है। पार्टी का कहना है कि यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह संकट अचानक नहीं, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था की लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और जमाखोरी व कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई हो। फिलहाल प्रशासन स्थिति को नियंत्रित बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अब भी बिगड़े हुए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि उन्हें इस समस्या से राहत कब मिलेगी।
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