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    Prabhasakshi NewsRoom: मतदान के साथ बढ़ रहा सियासी तापमान, Tamil Nadu और West Bengal में कड़ी टक्कर

    3 hours from now

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    तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान के दौरान लोकतंत्र का व्यापक और जीवंत स्वरूप देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर मतदाताओं में उत्साह दिखाई दे रहा है वहीं दूसरी ओर सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप ने चुनावी माहौल को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।तमिलनाडु की बात करें तो आपको बता दें कि सुबह सात बजे मतदान की शुरुआत कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुई। राज्य भर के मतदान केंद्रों पर लोगों की लंबी कतारें देखी गईं। सत्तारुढ़ दल द्रमुक और मुख्य विपक्ष अन्नाद्रमुक के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है, जबकि अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व वाला दल और सीमैन के नेतृत्व वाला दल भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में हैं। कई प्रमुख नेताओं और हस्तियों ने सुबह ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया। अन्नाद्रमुक नेता ईके पलानीस्वामी, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम, भाजपा उम्मीदवार तमिलिसाई सौंदरराजन और सीमैन ने अलग अलग स्थानों पर मतदान किया। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयनिधि स्टालिन, अभिनेता रजनीकांत और विजय ने भी अपने अपने मतदान केंद्रों पर वोट डाले। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन और भाजपा नेता खुशबू ने भी मतदान में भाग लिया।इसे भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में सत्ता विरोधी लहर का फायदा क्या उठा पाएगी भाजपा?प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से लोकतंत्र के इस पवित्र कर्तव्य में बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की, खासकर युवाओं और महिलाओं से अधिक संख्या में मतदान करने को कहा। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाताओं से ऐसी सरकार चुनने की अपील की जो जनता की आकांक्षाओं को पूरा करे। भाजपा के वरिष्ठ नेता जेपी नड्डा ने भी भ्रष्टाचार और हिंसा के मुद्दों को उठाते हुए परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया।हम आपको बता दें कि राज्य में कुल 5.73 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें महिलाओं की संख्या 2.93 करोड़, पुरुषों की 2.83 करोड़ और तीसरे लिंग के मतदाता भी शामिल हैं। 234 सदस्यीय विधानसभा के लिए 4023 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान के लिए हजारों मतदान केंद्र बनाए गए हैं और व्यापक स्तर पर इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनें तथा सत्यापन प्रणाली तैनात की गई हैं। शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 300 कंपनियां और बड़ी संख्या में राज्य पुलिस बल तैनात किया गया है।पहली बार मतदान करने वाले युवाओं की संख्या भी बड़ी है, जिससे लोकतंत्र में नई ऊर्जा का संकेत मिलता है। बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। मतदान केंद्रों पर पेयजल, शौचालय, रैंप और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। इस बीच, अन्नाद्रमुक के उम्मीदवार पी थंगमणि ने अपने क्षेत्र में मतदान करने के बाद 210 से अधिक सीटें जीतने का दावा किया और महिलाओं की सुरक्षा तथा नशे के खिलाफ कार्रवाई जैसे वादों को दोहराया। वहीं मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मतदान के बाद कहा कि यह चुनाव तमिलनाडु की जीत का प्रतीक होगा और सभी नागरिकों से मतदान करने की अपील की।हालांकि कुछ विवाद भी सामने आए हैं। अभिनेता विजय ने चुनाव आयोग से मतदान का समय बढ़ाने की मांग करते हुए कहा है कि परिवहन व्यवस्था में कमी के कारण कई मतदाता मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच सके। उन्होंने इसे प्रशासनिक विफलता बताया और अतिरिक्त बस सेवाएं शुरू करने की मांग की। इसके अलावा, सेलम में एक मतदान केंद्र के अंदर अन्नाद्रमुक और द्रमुक समर्थकों के बीच झड़प भी हुई, जिसमें आरोप प्रत्यारोप लगे और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में भी विधानसभा चुनाव के पहले चरण के तहत 152 सीटों पर मतदान शुरू हुआ। यहां भी सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं। 3.6 करोड़ से अधिक मतदाता इस चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। हजारों अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। सभी मतदान केंद्रों पर कैमरे लगाए गए हैं और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में पुनर्मतदान की चेतावनी दी गई है। पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला सत्तारुढ़ दल और भाजपा के बीच है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सरकार की योजनाओं और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही हैं, जबकि भाजपा भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों को प्रमुखता दे रही है।कई महत्वपूर्ण सीटों पर बड़े नेताओं के बीच मुकाबला इस चुनाव को और दिलचस्प बना रहा है। नंदीग्राम, भबानीपुर, खड़गपुर और आसनसोल जैसी सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। हम आपको यह भी बता दें कि चुनाव से पहले प्रचार के दौरान भी राजनीतिक तनाव चरम पर रहा था। हम आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है। सत्तारुढ़ दल को अपने संगठन, कल्याणकारी योजनाओं और क्षेत्रीय पहचान के मुद्दे पर बढ़त मिलने की उम्मीद है जबकि भाजपा अपने बढ़ते जनाधार, आक्रामक प्रचार और केंद्रीय नेतृत्व की सक्रियता के दम पर सत्ता के लिए दावेदारी पेश कर रही है। हालांकि परिणाम मतदाताओं, स्थानीय समीकरणों और मतदान प्रतिशत पर निर्भर करेगा।
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