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    प्रयागराज गैंगरेप केस में बिशप को 4 हफ्ते की राहत:हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक बढ़ाई, FIR निरस्त करने की मांग पर होगी अगली सुनवाई

    4 hours ago

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    प्रयागराज में स्कूल प्रिंसिपल से गैंगरेप के आरोपों से जुड़े बहुचर्चित मामले में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के लखनऊ डायसिस के बिशप मॉरिस एडगर दान समेत तीन आरोपियों को फिलहाल चार सप्ताह की और राहत मिल गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर पहले से लगी अंतरिम रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब चार सप्ताह बाद होगी। मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बाद मामला न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति लक्ष्मी कांत शुक्ल की नई खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ। 12 जून को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले से लागू अंतरिम आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी रहेगा। इसका मतलब है कि बिशप मॉरिस एडगर दान, एलन दान और राकेश कुमार चैट्री की गिरफ्तारी पर लगी रोक फिलहाल जारी रहेगी। 4 जून को समझौते की बनी थी संभावना इस मामले की पहली सुनवाई 4 जून को हुई थी। उस दौरान याचिकाकर्ताओं और शिकायतकर्ता पक्ष के बीच समझौते की संभावना जताई गई थी। कोर्ट को बताया गया था कि स्कूल प्रबंधन महिला प्रिंसिपल की सेवा समाप्ति का आदेश अगले दिन यानी 5 जून की सुबह 10 बजे तक वापस ले लेगा। शिकायतकर्ता पक्ष ने भी कहा था कि यदि ऐसा होता है तो उन्हें आपराधिक कार्यवाही समाप्त किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं होगी। इस स्थिति को देखते हुए अदालत ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर 5 जून तक अंतरिम रोक लगा दी थी। 5 जून को भी जारी रही राहत अगली सुनवाई 5 जून को हुई। इस दौरान शिकायतकर्ता के अधिवक्ता ने अपना वकालतनामा वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। साथ ही हाईकोर्ट ने 4 जून को पारित अंतरिम आदेश को अगली सुनवाई तक प्रभावी बनाए रखने का निर्देश दिया। इसी सुनवाई में यह भी तय हुआ कि मामले को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि सुनवाई कर रही पीठ के एक सदस्य इस प्रकरण की आगे सुनवाई नहीं करेंगे। FIR निरस्त कराने की मांग बिशप मॉरिस एडगर दान और दो अन्य आरोपियों की ओर से दाखिल आपराधिक रिट याचिका में कर्नलगंज थाने में दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की गई है। महिला प्रिंसिपल ने अपनी शिकायत में गैंगरेप समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं। हाईकोर्ट अब इस याचिका पर चार सप्ताह बाद सुनवाई करेगा। अब पढ़िए पूरा मामला… महिला मूल रूप से बिहार की रहने वाली हैं और करीब 15 वर्ष पहले प्रयागराज आई थीं। उन्हें कटरा स्थित एक स्कूल में हेडमिस्ट्रेस नियुक्त किया गया था। यह स्कूल चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के लखनऊ डायसिस के अधीन संचालित होता है। महिला ने दो वर्ष पहले अपने पति से तलाक ले लिया था। नौकरी से निकालने की धमकी देने का आरोप महिला ने पुलिस को बताया था कि वह डायसिसयन एजुकेशन बोर्ड (DEB) की ओर से संचालित एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं। उनके अनुसार संस्था के सचिव राकेश चैट्री, चेयरमैन मॉरिस एडगर दान और उनका बेटा एलन दान पिछले एक वर्ष से उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे। महिला का आरोप है कि तीनों उनके तलाकशुदा होने का फायदा उठाते थे। वे उन्हें अपने कार्यालयों में बुलाकर गंदी नीयत से छूते थे और उनके साथ जबरन दुष्कर्म करते थे। विरोध करने पर नौकरी से निकालने और किसी को बताने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देते थे। 'अधिकारियों को संतुष्ट करने' का दबाव प्रिंसिपल के मुताबिक, नौकरी जाने के डर से उन्होंने किसी को इस बारे में नहीं बताया। उनका आरोप है कि उनसे कहा जाता था कि उन्हें ऊपर के अधिकारियों को भी "संतुष्ट" करना होगा। उन्होंने बताया कि 7 मई को मॉरिस एडगर दान ने फोन कर उन्हें सचिव राकेश चैट्री के घर बुलाया। मना करने पर गाली-गलौज करते हुए परिवार को जान से मारने और नौकरी से निकालने की धमकी दी गई। महिला का कहना है कि तीनों लगातार उनका शोषण करते रहे और विरोध करने पर उन्हें एक पूर्व प्रिंसिपल का उदाहरण देकर डराया जाता था। पूर्व पति पर भी लगाया सहयोग का आरोप महिला ने अपनी शिकायत में यह भी कहा था कि उनके पूर्व पति विशाल नोवेल सिंह को भी पूरी घटना की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने भी आरोपियों का साथ दिया। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े कई साक्ष्य मौजूद हैं और लंबे समय से वह मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेल रही थीं। कौन हैं मॉरिस एडगर दान? मॉरिस एडगर दान वर्तमान में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के लखनऊ डायसिस के बिशप हैं। डायसिस का अर्थ चर्च का वह प्रशासनिक क्षेत्र होता है, जिसकी देखरेख एक बिशप करता है। लखनऊ डायसिस का मुख्यालय प्रयागराज में स्थित है और इसका प्रमुख कैथेड्रल सिविल लाइंस स्थित ऑल सेंट्स कैथेड्रल है। लखनऊ डायसिस की स्थापना वर्ष 1893 में हुई थी। इसका कार्यक्षेत्र पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों तक फैला हुआ है, जिनमें प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी, मिर्जापुर और लखनऊ शामिल हैं। यह संस्था चर्चों और प्रार्थना सभाओं के संचालन के साथ-साथ पादरियों की नियुक्ति, धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन, स्कूल-कॉलेजों के संचालन तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा से जुड़े कार्यों का भी संचालन करती है।
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