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    मायावती फिर पलटीं, बोलीं- भतीजी को पार्टी नहीं सौंपूंगी:आकाश की तरह शादी के बाद बदल सकती है, ईशान को आगे बढ़ाऊंगी

    5 hours ago

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    बसपा सुप्रीमो मायावती के परिवार में सियासी कलह बढ़ती जा रही है। वह फिर अपने बयान से पलट गई हैं। अब भतीजी दीपिका आनंद को भी पार्टी की जिम्मेदारी सौंपने से इनकार कर दिया है। साथ ही आकाश के छोटे भाई ईशान को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है। मायावती ने रविवार को X पर लिखा- आकाश अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में पूरी तरह आ चुके हैं। ऐसे में उन्हें दोबारा पार्टी में लेना पार्टी के साथ बड़ा विश्वासघात होगा। मैं ऐसा गलत काम कदापि नहीं करूंगी। मायावती ने कहा- भतीजी का शादी के बाद मामला भी अगर आकाश आनंद की तरह ही निकला तो यह पार्टी हित में सही नहीं होगा। इसलिए दोनों को पार्टी की जिम्मेदारियों से दूर रखा जाएगा। अब इस फैसले में बदलाव नहीं होगा। अब इन दोनों की जगह आनंद कुमार के परिवार से केवल ईशान को ही पार्टी में जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। 7 दिन पहले मायावती ने भतीजी दीपिका आनंद को पार्टी की कमान सौंपने के संकेत दिए थे। कहा था- अगर भाई आनंद कुमार को मदद के लिए किसी सदस्य की जरूरत पड़ती है, तो वह अपनी इकलौती बेटी दीपिका की मदद ले सकते हैं। उनकी ईमानदारी और कार्यक्षमता के आधार पर भविष्य में पार्टी में जिम्मेदारी दी जा सकती है। 19 साल की दीपिका फिलहाल वकालत की पढ़ाई कर रही हैं। मायावती के हालिया फैसलों के बारे में पढ़िए मायावती की 4 बड़ी बातें पढ़िए 1- आनंद कुमार के आग्रह पर आकाश को आगे किया था मायावती ने कहा- आनंद कुमार के विशेष आग्रह पर मुझे उनके बड़े बेटे आकाश आनंद को राजनीति में आगे करना पड़ा। शादी के बाद आकाश आनंद का रवैया और गतिविधियां ऐसी रहीं, जिसकी वजह से कुछ दिन पहले उन्हें पार्टी से अलग करना पड़ा। ऐसे में आनंद कुमार के परिवार में से किसे पार्टी में आगे किया जाए या नहीं, यह मेरे लिए पिछले कुछ समय से दुविधा का विषय था। 2- ईशान ने सही से काम नहीं किया तो पार्टी से बाहर कर देंगे बसपा सुप्रीमो ने कहा- मैंने फैसला लिया है कि आनंद के परिवार से ऐसे सदस्य को आगे किया जाए, जो आकाश के रास्ते पर बिल्कुल न चले। ऐसे में ईशान आनंद को ही पार्टी में सम्मानजनक जिम्मेदारी देकर आगे बढ़ाया जाएगा। अभी तक लगता है कि उनका आकाश आनंद और उनकी बहन की तरह पार्टी विरोधी गतिविधियों से कोई संबंध नहीं रहेगा। हालांकि, आगे क्या होगा, यह अभी नहीं कहा जा सकता। अगर उन्होंने भी पार्टी विरोधी कोई गंभीर काम किया तो उन्हें भी पार्टी से बाहर कर दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में आनंद कुमार के परिवार के किसी अन्य सदस्य को पार्टी में कोई छोटी-बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी। इसके बजाय पार्टी में काम कर रहे दलित वर्ग के किसी मिशनरी और वफादार कार्यकर्ता को आगे बढ़ाया जाएगा। इसी खास मुद्दे और देश-जनहित से जुड़े जरूरी मुद्दों पर चर्चा के लिए 23 सितंबर को ऑल इंडिया बैठक बुलाई गई है। 3- पूरा बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार मैं अपने बारे में यही कहना चाहती हूं कि पूरा बहुजन समाज ही मेरा असली परिवार है। बहुजन समाज को सत्ता की मास्टर चाबी के जरिए शोषित से शासक वर्ग बनाना और उनके कल्याण को सुनिश्चित करना ही मेरा मिशन और प्रतिज्ञा है। इसके लिए मैं अपने भाई-बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी किसी भी हद तक जा सकती हूं। 4- पार्टी के लोग भाई-बहनों और रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठें पार्टी के लोगों से कहना चाहती हूं कि अगर राजनीति में सफल होना है, समाज के लिए कुछ करना है, तो मेरी तरह भाई-बहनों और करीबी रिश्तेदारों के मोह से ऊपर उठें और ईमानदारी और निष्ठा से काम करें। इसीलिए बीएसपी संस्थापक कांशीराम जी ने राजनीति में आने के बाद करीबी रिश्तेदारों को राजनीतिक लाभ देने से हमेशा दूर रखा। उन्होंने उन्हें सिर्फ निस्वार्थ भाव से पार्टी संगठन में काम करने की अनुमति दी। इतना ही नहीं, उन्होंने पूरी जिंदगी अपना परिवार न बनाकर बहुजन समाज के हित और कल्याण के लिए समर्पित कर दी। उनसे प्रेरित होकर मैंने भी उनके रास्ते पर चलने का फैसला लिया। पूरी जिंदगी बहुजन समाज के लिए समर्पित कर दी। लेकिन लड़की होने के कारण मजबूरी में मुझे अपने किसी न किसी भाई-बहन को हमेशा अपने साथ रखना पड़ा। इसी वजह से मेरा छोटा भाई आनंद कुमार पिछले काफी वर्षों से मेरी सेवा में काम कर रहे हैं। मायावती ने बाबा साहेब के 1956 के खत का हवाला दिया बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी इसका उदाहरण पेश किया था। उन्होंने 23 फरवरी 1956 को दिल्ली से अपने बेटे यशवंत बी. आंबेडकर को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें कई पत्र मिले हैं, जिनमें बताया गया है कि तुम उपशम को बौद्ध भूषण प्रिंटिंग प्रेस में अकाउंटेंट और कैशियर के रूप में काम नहीं करने दे रहे हो। तुम्हें लगता है कि ऐसा करके तुम प्रेस पर अपना कब्जा कर लोगे। मैं तुम्हें साफ चेतावनी दे रहा हूं कि यह प्रेस सार्वजनिक संपत्ति है। यह न तुम्हारी है और न मेरी। सार्वजनिक संपत्ति के हिसाब-किताब में किसी भी तरह की अनियमितता की अनुमति नहीं दी जा सकती। तुम्हारा व्यवहार ठीक नहीं रहा है। अगर तुमने मेरे अंतिम निर्देश का पालन नहीं किया तो मैं तुम्हें प्रेस से बाहर कर दूंगा। अगर इसके बाद भी तुमने मेरी चेतावनी नहीं मानी तो तुम्हारे खिलाफ मुकदमा भी चलाऊंगा। ------------------------ ये भी पढ़ें- अखिलेश के लिए अचानक अहम क्यों बना लोहिया ट्रस्ट:चुनाव से पहले कमान अपने हाथ में ली; 2016 से हाशिए पर था पिछले दिनों अखिलेश यादव ‘लोहिया ट्रस्ट’ के अध्यक्ष चुने गए। मुलायम अपनी आखिरी सांस तक इसके अध्यक्ष रहे। निधन के बाद शिवपाल मुखिया बने और अब कमान अखिलेश के हाथ में है। चर्चा है कि उनकी बड़ी बेटी अदिति यादव भी ट्रस्ट का हिस्सा बन सकती हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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