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    मौलाना की मौत दुर्घटना या हत्या, जांच की मांग:4 दिन पहले रेलवे ट्रैक पर मिला था बिहार के मौलाना का शव, पत्नी ने जताई हत्या की आशंका

    2 hours ago

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    बरेली में ताजुश्शरिया के उर्स में शामिल होने आए बिहार के मौलाना तौसीफ रजा मजहरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने अब एक बड़ा राजनीतिक और सांप्रदायिक मोड़ ले लिया है। ठाकुरगंज (किशनगंज) के निवासी मौलाना का शव बरेली कैंट स्टेशन के पास रेलवे ट्रैक पर लहूलुहान हालत में 4 दिन पहले 27 अप्रैल को मिला था। पुलिस जहां इसे भीषण गर्मी के कारण नींद की झपकी आने और ट्रेन से गिरने का हादसा बता रही है, वहीं परिजनों और मुस्लिम संगठनों ने इसे सोची-समझी ‘मॉब लिंचिंग’ करार दिया है। एआईएमआईएम (AIMIM) सहित कई संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पत्नी के पास आया आखिरी कॉल और फिर खामोश हो गया मोबाइल घटना की कड़ियां तब जुड़ीं जब मौलाना की पत्नी का ऑडियो सामने आया। बताया जा रहा है कि जनरल डिब्बे में सफर के दौरान मौलाना ने अपनी पत्नी को फोन कर बताया था कि ट्रेन में कुछ लोग उनके साथ मारपीट कर रहे हैं। इसके कुछ ही देर बाद उनका मोबाइल बंद हो गया और अगले दिन उनकी लाश ट्रैक पर मिली। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्वों ने मौलाना का सामान लूटने की कोशिश की और विरोध करने पर उन्हें बेरहमी से पीटकर चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया। यूपी में गुंडागर्दी खत्म करने के दावों पर उठे सवाल, सीबीआई जांच की मांग मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अपने पत्र में सरकार को घेरते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में माफिया गिरी और गुंडागर्दी खत्म करने के दावे अब धुंधले पड़ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ट्रेन जैसा सुरक्षित सफर भी सांप्रदायिक नफरत की भेंट चढ़ जाएगा, तो देश का लोकतांत्रिक ढांचा कैसे बचेगा? मुस्लिम जमात ने इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। साथ ही बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी ने भी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर इसे सुनियोजित हत्या बताया है और स्थानीय पुलिस पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाया है। सियासी घमासान: एआईएमआईएम ने खोला मोर्चा, पुलिस ने दी सफाई इस मामले पर राजनीति भी चरम पर है। एआईएमआईएम के प्रवक्ता आदिल हसन ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए इसे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर धब्बा बताया है। दूसरी ओर, बरेली पुलिस अपनी दुर्घटना वाली थ्योरी पर कायम है। एसपी सिटी मानुष पारीक का कहना है कि 27 अप्रैल को शव मिलने के बाद पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया था। पुलिस का तर्क है कि झपकी आने के कारण गिरकर चोट लगने से मौत हुई है। हालांकि, परिजनों के आरोपों के बाद अब पुलिस का कहना है कि तहरीर मिलने पर मामले की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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