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    Europe का बड़ा फैसला, अब बिना Charger मिलेगा Laptop, ग्राहकों के बचेंगे हजारों रुपये

    3 hours from now

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    यूरोप में लैपटॉप से जुड़े एक अहम नियम को लागू किया गया है, जिससे आने वाले समय में चार्जिंग को लेकर बड़ी सुविधा देखने को मिल सकती है। मौजूद जानकारी के अनुसार, नए नियम के तहत कंपनियों को लैपटॉप में एक समान चार्जिंग व्यवस्था अपनानी होगी और ग्राहकों को यह विकल्प भी मिलेगा कि वे बिना चार्जर के लैपटॉप खरीद सकें। बता दें कि इस फैसले का मकसद अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक कचरे को कम करना और ग्राहकों का खर्च घटाना है। अब कंपनियों को अपने उत्पाद की पैकेजिंग पर यह साफ-साफ बताना होगा कि उस लैपटॉप को चार्ज करने के लिए कितनी क्षमता वाले चार्जर की जरूरत होगी, ताकि ग्राहक सही विकल्प चुन सकें।गौरतलब है कि स्मार्टफोन और छोटे उपकरणों की तुलना में लैपटॉप की बैटरी बड़ी होती है और उन्हें चार्ज करने के लिए ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है। इसी वजह से कंपनियों को अपने डिजाइन और तकनीक में बदलाव करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था और अब यह समयसीमा पूरी होने के बाद नियम लागू किए जा रहे हैं।इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को मिलने की उम्मीद है। मौजूद जानकारी के अनुसार, हर साल बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक कचरा सिर्फ इसलिए पैदा होता है क्योंकि हर नए उपकरण के साथ नया चार्जर दिया जाता है। अब इस अनिवार्यता के खत्म होने से कचरे में कमी आएगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।इसके अलावा ग्राहकों को भी सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। अगर किसी के पास पहले से अच्छा चार्जर मौजूद है तो उसे नया चार्जर खरीदने की जरूरत नहीं होगी। खासकर स्कूल, दफ्तर और बड़े संस्थानों के लिए यह बदलाव काफी उपयोगी साबित हो सकता है, जहां एक साथ बड़ी संख्या में उपकरण इस्तेमाल होते हैं।सुविधा के लिहाज से भी यह कदम अहम माना जा रहा है। अब अलग-अलग उपकरणों के लिए अलग-अलग चार्जर रखने की जरूरत कम हो जाएगी और एक ही शक्तिशाली चार्जर से कई उपकरणों को चार्ज किया जा सकेगा। इससे यात्रा के दौरान भी लोगों को राहत मिलेगी और सामान कम रखना पड़ेगा।बता दें कि यह नियम सिर्फ नए लैपटॉप पर लागू होगा जो तय तारीख के बाद बाजार में आएंगे। जिन लोगों के पास पहले से पुराने लैपटॉप हैं, उन्हें किसी तरह का बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी और वे अपने पुराने चार्जर का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं।जानकारों का मानना है कि यूरोप जैसे बड़े बाजार में लागू हुए इस फैसले का असर दुनिया के अन्य हिस्सों, खासकर भारत पर भी पड़ सकता है। आमतौर पर बड़ी तकनीकी कंपनियां अलग-अलग बाजारों के लिए अलग डिजाइन नहीं बनातीं, इसलिए आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर एक जैसी चार्जिंग व्यवस्था देखने को मिल सकती है।हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर चार्जर एक जैसा नहीं होता। अलग-अलग लैपटॉप के लिए अलग क्षमता की जरूरत होती है, इसलिए ग्राहकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका चार्जर पर्याप्त ऊर्जा प्रदान कर सके। कुल मिलाकर यह बदलाव सुविधा, बचत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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