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    लखनऊ में BSNL इंजीनियरों की बैठक:20 साल पुराने पे-स्केल पर जताई नाराजगी, कर्मचारियों ने उठाई आवाज

    5 hours ago

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    राजधानी के भूतनाथ स्थित बीएसएनएल एक्सचेंज ऑफिस में शुक्रवार को संचार निगम एग्जीक्यूटिव एसोसिएशन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए इंजीनियरों और अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने किया। यह बैठक एक खुले अधिवेशन के रूप में आयोजित की गई, जिसमें संगठन के पदाधिकारियों, इंजीनियरों और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच संवाद स्थापित कर नीतिगत और जमीनी स्तर की चुनौतियों पर चर्चा की गई जनसमस्याओं से लेकर कर्मचारियों के हित तक उठा हर मुद्दा बैठक में बीएसएनएल सेवाओं से जुड़ी जनसमस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। इंजीनियरों ने नेटवर्क की गुणवत्ता, सेवा में देरी, कनेक्टिविटी की दिक्कतों और ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इसके साथ ही कर्मचारियों ने अपने व्यक्तिगत और सेवा से जुड़े मुद्दों को भी मंच पर रखा। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि इन समस्याओं का उच्च स्तर पर समीक्षा कर समाधान निकाला जाएगा। टारगेट आधारित कार्यप्रणाली पर सवाल, क्वालिटी सुधार की मांग बैठक का सबसे अहम मुद्दा कर्मचारियों को दिए जा रहे इंटरनेट कनेक्शन लगाने के टारगेट को लेकर रहा। एक एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने कहा कि वर्तमान में कर्मचारियों पर अधिक से अधिक कनेक्शन देने का दबाव है, लेकिन सेवा की गुणवत्ता पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि कई मामलों में लगाए गए कनेक्शन टिकाऊ नहीं होते और 10 में से 8 कनेक्शन एक-दो महीने के भीतर ही बंद हो जाते हैं। इससे न केवल उपभोक्ताओं का भरोसा कमजोर होता है, बल्कि विभाग की छवि भी प्रभावित होती है। इंजीनियरों ने सुझाव दिया कि केवल संख्या बढ़ाने के बजाय नेटवर्क की गुणवत्ता, रखरखाव और ग्राहक संतुष्टि पर अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। खुले अधिवेशन की परंपरा, सरकार से सीधा संवाद संगठन के सचिव सुशील त्रिपाठी ने बताया कि इस तरह के खुले अधिवेशन का उद्देश्य सरकार और विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इसमें सरकार के प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी और जिले स्तर के पदाधिकारी एक मंच पर आकर नीतियों और योजनाओं पर चर्चा करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बीएसएनएल एक ऐसा संस्थान है जो केवल व्यावसायिक लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय हित से जुड़े कई अहम कार्य करता है। ग्रामीण क्षेत्रों, सीमावर्ती इलाकों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों और सुरक्षा एजेंसियों को संचार सेवाएं उपलब्ध कराना इसकी प्राथमिकता है। स्वदेशी 4G-5G नेटवर्क और BTS विस्तार पर चर्चा बैठक में स्वदेशी तकनीक के तहत 4G और 5G नेटवर्क के विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई। बताया गया कि देश में बड़े पैमाने पर स्वदेशी BTS (बेस ट्रांससीवर स्टेशन) लगाए जा रहे हैं और आने वाले समय में इस संख्या में और वृद्धि की जाएगी। इस पहल को भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि इस विस्तार के साथ नेटवर्क की गुणवत्ता और स्थिरता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। भारतनेट परियोजना: गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की योजना बैठक में भारतनेट परियोजना को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। इस परियोजना के तहत ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाकर हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इंजीनियरों ने बताया कि पंचायत भवन, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सचिवालय और स्कूलों को इस नेटवर्क से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है। साथ ही, इस परियोजना में सुधार की संभावनाओं और क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर भी विचार किया गया। 20 साल से पुराना पे-स्केल, कर्मचारियों में नाराजगी बैठक में कर्मचारियों ने वेतन विसंगति का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। कई इंजीनियरों और कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें अब भी वर्ष 2007 के पे-स्केल के आधार पर ही वेतन मिल रहा है, जबकि अन्य सरकारी विभागों में समय-समय पर वेतन संशोधन हो चुका है। कर्मचारियों का कहना था कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से सैलरी स्ट्रक्चर में पीछे चल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और मनोबल दोनों प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि वेतन पुनरीक्षण कर वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप सैलरी तय की जाए, ताकि कर्मचारियों को न्याय मिल सके और वे बेहतर तरीके से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। कर्मचारी हितों पर भी हुआ मंथन बैठक में कर्मचारियों के हितों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से रखा गया। पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान जरूरी है, क्योंकि बेहतर कार्य वातावरण से ही सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
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