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    हाथरस जिले की कल मनाई जाएगी 29वीं वर्षगांठ:29 साल में विकास थमा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक शिक्षा के क्षेत्र में फिसड्डी

    2 hours ago

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    हाथरस जिला कल 3 मई को अपनी 29वीं वर्षगांठ मनाएगा। इस जिले का गठन 3 मई 1997 को अलीगढ़ और मथुरा जनपदों से अलग कर किया गया था। अपने 29 साल के इतिहास में इस जिले का नाम चार बार बदला गया है। तत्कालीन ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के प्रयासों से 3 मई 1997 को हाथरस को जिले का दर्जा मिला। इसमें अलीगढ़ की हाथरस, सिकंदराराऊ व इगलास तहसीलें और मथुरा की सादाबाद तहसील शामिल की गई थीं। हालांकि, स्थानीय विरोध के बाद इगलास तहसील को वापस अलीगढ़ जिले में मिला दिया गया। इसके बाद सासनी को तहसील का दर्जा मिला और इस समय हाथरस जिले में चार तहसीलें हैं। सपा सरकार में खत्म कर दिया था जिले का दर्जा.. जिला सर्जन के बाद जिले में जिला स्तरीय कार्यालयों का निर्माण शुरू हुआ, लेकिन वर्ष 2004 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी सरकार ने जिले का दर्जा समाप्त कर दिया। इस दौरान जनपद न्यायालय तो हाथरस में ही संचालित रहा, लेकिन पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्थाएं फिर से अलीगढ़ और मथुरा से संचालित होने लगीं। हाथरस को जिला बनाए रखने के लिए शहर के समाजसेवियों, वकीलों और व्यापारिक संगठनों ने 'जनपद बचाओ आंदोलन' शुरू किया। लगभग तीन साल के संघर्ष के बाद, वर्ष 2007 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर जिले का दर्जा बहाल कर दिया गया। चार बार बदला गया जिले का नाम... जिले के नामकरण को लेकर भी खूब राजनीति हुई। जब बसपा सरकार ने हाथरस को जिला घोषित किया, तो इसका नाम 'महामाया नगर' रखा गया। बाद में भाजपा सरकार आने पर इसका नाम बदलकर 'हाथरस' कर दिया गया। फिर बसपा सरकार बनने पर इसे 'महामायानगर' और समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पुनः 'हाथरस' कर दिया गया। उद्योग धंधों का नहीं हो पाया विकास.. जिला बनने के बाद लोगों को यह उम्मींद थी कि उद्योग धंधों का विकास होगा। हाथरस की पहचान पहले की औद्योगिक शहर के रूप में होगी। शहर में रंग-गुलाल उद्योग, दाल उद्योग, हैंडीक्राफ्ट उद्योग के अलावा सिकंदराराऊ के पुरदिलनगर का मूंगा मोती उद्योग, सासनी का कांच उद्योग, बिसावर का चांदी उद्योग को सरकारी प्रोत्साहन नहीं मिला। ट्रांसपोर्ट नगर की लोगों को दरकार… हाथरस में अभी भी ट्रांसपोर्ट नगर नहीं बन सका है। इसका सीधा असर जनपद के उद्योग धंधों पर पड़ा है। एक जनपद एक उत्पाद में हींग उद्योग व रेडीमेड गारमेंट्स उद्योग शामिल हुए हैं। हसायन के इत्र, गुलकंद, गुलाब जल उद्योग को जीआई टैग मिला है। हालांकि जिले के बनने के बाद यह जिला कई नेशनल हाईवे से जुड़ गया है और लोगों को आवागमन में बेहतर सुविधा मिली है। जिले में अभी तक नहीं बना मेडिकल कॉलेज... हाथरस जिला सबसे ज्यादा स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है। जिला स्तरीय सरकारी अस्पताल हैं। हाथरस में अभी तक मेडिकल कॉलेज नहीं बना है। हाथरस से बाद में जो जनपद बने, वहां मेडिकल कॉलेज खुल गए, लेकिन 29 साल बाद भी हाथरस जिले में मेडिकल कॉलेज नहीं बना। स्थिति यह है की छोटी बीमारियों के मरीजों को भी उपचार के लिए बाहर जाना पड़ता है। यहां सरकारी व्यवसायिक शिक्षा के नाम पर कोई उच्च संस्थान नहीं है। 70 साल पुराने एमजी पॉलीटेक्निक को भी इंजीनियरिंग कॉलेज का दर्जा नहीं मिला। अभी भी इस जिले में कई जिला स्तरीय कार्यालय नहीं है। अभी भी यहां अलीगढ़ और हाथरस की सहकारी बैंक ही संचालित है। जिला बनने के बाद महिला थाना व साइबर थाना की बात छोड़ दें तो जिले में कोई नया थाना नहीं बना। कोई नई नगर पंचायत नहीं बनी। कोई नया ब्लॉक सृजित नहीं हुआ। जब के वहां के लोगों द्वारा लगातार इसे लेकर मांग भी की जा रही है। अलबत्ता हाथरस में जिला न्यायालय के नए भवन और जेल का निर्माण इस समय चल रहा है।
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