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    डिजिटल अपराधों पर ED का कड़ा प्रहार! 'RAMC' के गठन के बाद 7 महीनों में दर्ज हुए 800 नए मामले, बदलेगा जांच का अंदाज़

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    भारत की प्रमुख जांच एजेंसी, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आधुनिक वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए अपनी रणनीति में आमूलचूल बदलाव किया है। एजेंसी के भीतर ‘जोखिम मूल्यांकन प्रबंधन समिति’ (RAMC) के गठन के बाद पिछले सात महीनों में डिजिटल अरेस्ट, विदेशी हस्तक्षेप और बौद्धिक संपदा धोखाधड़ी जैसे जटिल अपराधों के खिलाफ धन शोधन (Money Laundering) के लगभग 800 मामले दर्ज किए गए हैं।क्या है RAMC और कैसे करती है काम?जोखिम मूल्यांकन प्रबंधन समिति (RAMC) की अध्यक्षता दिल्ली मुख्यालय में तैनात एक विशेष निदेशक (Special Director) रैंक के अधिकारी करते हैं।अधिकार: अक्टूबर 2025 से लागू नए दिशानिर्देशों के अनुसार, अब किसी भी मामले को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के कड़े प्रावधानों के तहत दर्ज करने से पहले आरएएमसी द्वारा उसकी गहन जांच की जाती है।उद्देश्य: इस समिति का मुख्य लक्ष्य साइबर अपराध, क्रिप्टो धोखाधड़ी, विदेशी वित्तपोषण, मादक पदार्थों की तस्करी और राष्ट्रीय हित के विरुद्ध होने वाली 'लॉबिंग' जैसे उभरते खतरों की पहचान करना है।जोखिम मूल्यांकन प्रबंधन समिति (आरएएमसी) की अध्यक्षता दिल्ली स्थित मुख्यालय में तैनात एजेंसी के एक विशेष निदेशक रैंक के अधिकारी द्वारा की जाती है। एजेंसी के नये दिशानिर्देशों के अनुसार, आरएएमसी को अक्टूबर 2025 से लेकर धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के कड़े प्रावधानों के तहत किसी भी मामले को लेने से पहले उसकी जांच करने का अधिकार दिया गया है। इस समिति का गठन साइबर और क्रिप्टो से संबंधित धोखाधड़ी, विदेशी वित्तपोषण और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे उभरते खतरों की पहचान करने के लिए किया गया है। ईडी की एक रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘अक्टूबर 2025 से अब तक आरएएमसी की कुल 91 बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें कुल 794 मामलों पर गौर किया गया है।’’ रिपोर्ट के मुताबिक, देखने में आया है कि पीएमएलए के तहत मौजूदा मामलों में नकदी-आधारित भ्रष्टाचार के मामले अब जटिल, डिजिटल और वैश्विक स्तर पर परस्पर जुड़े वित्तीय अपराधों की ओर ‘‘स्थानांतरित’’ हो गये हैं, जिसके लिए उन्नत फोरेंसिक, डिजिटल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग क्षमताओं की आवश्यकता होती है।
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