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    हैसर ब्लॉक भुगतान घोटाला, निर्दोष सचिवों पर कार्रवाई:संतकबीर नगर में डीपीआरओ कार्यालय की जांच पर उठे सवाल

    3 hours ago

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    हैसर ब्लॉक में बिना टेंडर के एक ही फर्म को करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़े मामले में डीपीआरओ कार्यालय की कार्रवाई पर सवाल उठ गए हैं। आरोप है कि जांच में कुछ दोषी सचिवों को बचा लिया गया, जबकि कुछ निर्दोष सचिवों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई। बाद में त्रुटि सामने आने पर डीपीआरओ ने निर्दोष सचिवों के नाम हटा दिए। यह मामला 7 महीने पहले हैसर ब्लॉक की ग्राम पंचायतों में एक ही फर्म को लगभग 6 करोड़ रुपये के भुगतान से संबंधित है। जिलाधिकारी आलोक कुमार ने इस पर संज्ञान लेते हुए जांच के लिए पीडी और डीसी एनआरएलएम की एक टीम गठित की थी। डीसी एनआरएलएम और पीडी डीआरडीए की जांच में सामने आया कि इस अनियमितता में ब्लॉक की 54 ग्राम पंचायतें संलिप्त थीं। हालांकि, इन ग्राम पंचायतों में कोई वित्तीय अनियमितता सीधे तौर पर सामने नहीं आई, लेकिन यह पुष्टि हुई कि एक लाख रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर तीन फर्मों के कोटेशन के आधार पर बिना टेंडर के ही भुगतान कर दिया गया था। एडीओ पंचायत कार्यालय द्वारा डीपीआरओ कार्यालय को भेजी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, भुगतान प्रक्रिया के दौरान केवल 7 सचिवों के कार्यकाल की पुष्टि हुई थी। इसके बावजूद, डीपीआरओ कार्यालय ने कुल 8 सचिवों पर कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ कार्यरत दोषी सचिवों को बचाया गया और निर्दोष सचिवों के विरुद्ध कार्रवाई की गई। ग्राम विकास अधिकारी अरविंद, देश दीपक वर्मा और प्रशांत यादव का नाम एडीओ पंचायत द्वारा भेजी गई दोषी सचिवों की सूची में शामिल नहीं था, फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए डीडीओ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया। इसी तरह, ग्राम पंचायत अधिकारी अजीत कुमार शर्मा और विनोद कुमार मिश्र के खिलाफ भी डीपीआरओ कार्यालय ने कार्रवाई की, जबकि उनके नाम भी दोषी सचिवों की सूची में नहीं थे। मामला सामने आने के बाद, डीपीआरओ ने आनन-फानन में निर्दोष सचिवों के नाम हटा दिए और इसे 'त्रुटिवश' हुई गलती बताया। डीपीआरओ कार्यालय की इस कार्रवाई को लेकर ब्लॉक परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं।
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