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    चंद्रकांता के क्रूर सिंह पहुंचे काशी:एक्टर अखिलेंद्र मिश्रा ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए, कहा- मन को यहां सुकून मिलता है

    3 hours ago

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    बॉलीवुड एक्टर और चंद्रकांता सीरियल के क्रूर सिंह अखिलेंद्र मिश्रा काशी की आध्यात्मिक यात्रा पर पहुंचे, जहां उन्होंने करीब 48 घंटे बिताए। इस दौरान उन्होंने काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में दर्शन-पूजन किए। बाबा के दरबार में करीब वो एक घंटे तक बैठे रहे और शिव स्तुति का पाठ किया। फिर उन्होंने काल भैरव का आशीर्वाद लिया। एक्टर अखिलेंद्र ने कहा- काशी में आध्यात्मिक शांति की तलाश में आए थे। उन्होंने कहा- यह यात्रा मेरे लिए बेहद खास रही। काशी आकर मन को अद्भुत शांति मिली है। उन्होंने काशी के बदलते स्वरूप की भी सराहना की। कहा- शहर में काफी सकारात्मक बदलाव हुए हैं और अब यहां श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं पहले से बेहतर हो गई हैं। पहले तीन तस्वीर देखे… पढ़िए, अखिलेंद्र मिश्रा का एक्टिंग से जुड़ाव कैसे हुआ अखिलेंद्र कहते हैं, 'एक्टिंग की शुरुआत तो बचपन से ही हो गई थी। हमारे गांव में दुर्गा पूजा के दौरान दो नाटक होते थे, एक हिंदी और दूसरा भोजपुरी में। छुट्टियों के दौरान हम सभी चचरे भाई-बहन वहां इकट्ठा होते थे। एक बार एक नाटक के लिए छोटे बच्चे की जरूरत थी, जिसमें मुझे कास्ट किया गया। मेरे लिए ये पल बहुत खुशी का था। उस वक्त गांव में लाइट नहीं थी। इस कारण हम सभी रात में लालटेन की रोशनी में नाटक की तैयारी करते थे। इस नाटक को करने के बाद एक्टिंग से ऐसा जुड़ा कि आज तक इससे खुद को अलग नहीं कर पाया।' बिग बी का बहुत बड़ा फैन रहा ‘जब तक छोटा था, तब तक घरवालों को मेरा नाटक करना रास आता था, लेकिन बड़े होने पर उन्हें ये चीज खटकने लगी। यहां तक कि सिनेमाघर में फिल्म देखने की छूट नहीं थी। सबसे छिप कर फिल्म देखने जाता था। उस वक्त सबसे ज्यादा अमिताभ बच्चन की दीवानगी सवार थी। नई फिल्म में वो जो कपड़े पहनते, वही सब आस-पास के लड़के पैसा इकट्ठे कर सिला लेते। फिर बारी-बारी से पहनकर अपनी इच्छा पूरी करते।’ बचपन के दिन कैसे रहे? उन्होंने कहा, 'मेरा जन्म बिहार के सिवान जिले के छोटे से गांव में हुआ था। हर बच्चे की तरह मेरा बचपन भी बहुत खूबसूरत बीता। हम कुल दस भाई-बहन थे। पिता जी केंद्र सरकार के कस्टम एक्साइज डिपार्टमेंट में कार्यरत थे। उनकी पोस्टिंग एक जगह से दूसरे जगह होती रहती थी। ऐसे में भाई-बहनों की पढ़ाई भी अलग-अलग स्कूल में हुई। जब पिता जी की पोस्टिंग महुआ में हुई तो मेरी उम्र स्कूल जाने की हो गई थी। एडमिशन के लिए उन्होंने जान-पहचान के लोगों से पता किया। उनमें से किसी ने गुरदेव जी के गुरुकुल के बारे में बताया। उनकी बात मान पिता जी ने एडमिशन वहीं करा दिया और इस तरह मैं गुरदेव के सानिध्य में आ गया। रोज सुबह मैं और कुछ बच्चे गुरुकुल पहुंच जाते। फिर झाड़ू-पोंछा लगाने के बाद हम गुरदेव को उठाते थे, क्योंकि उनको लकवा मार गया था। फिर उनका नित्य-क्रिया कराने के बाद हम सभी पढ़ने के लिए बैठ जाते। यहां पर मैं करीब चार-साढ़े चार साल तक पढ़ा। फिर पिता जी का तबादला हो गया। उस गुरुकुल में पढ़ने का प्रभाव इतना गहरा था कि इसके बाद मेरा सीधे एडमिशन 5वीं क्लास में हुआ। अंत में पूरा परिवार गोपालगंज आ गया। यहां पर मैंने छपरा जिला स्कूल से आगे की स्कूलिंग की। फिर ग्रेजुएशन (फिजिक्स, ऑनर्स) छपरा राजेंद्र कॉलेज से 1982 में पूरा किया।' -------------------- ये खबर भी पढ़ें… 500-500 के नोट बिछाकर सोने वाली लड़की टंकी पर चढ़ी:चिल्लाकर बोली- जान दे दूंगी; 9 घंटे तक ड्रामा किया; लवमैरिज की थी प्रयागराज में 500-500 रुपए के नोट बिछाकर सोने वाली 32 साल की पल्लवी सिंह शनिवार दोपहर 1 बजे पानी की टंकी पर चढ़ गई। 50 फीट ऊंचाई से चिल्लाते हुए जान देने की धमकी देने लगी।उसकी आवाज सुनकर सैकड़ों लोग जमा हो गए। पढ़िए पूरी खबर
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