Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    ऐसा क्या हो गया था जो ट्रंप ने तुरंत मोदी को फोन लगाया और 40 मिनट तक बातचीत की?

    3 hours from now

    2

    0

    एक ओर पाकिस्तान की कूटनीति धराशायी हो चुकी है तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति वैश्विक मंच पर ऐसे गूंज रही है कि दुनिया उसे नजरअंदाज नहीं कर पा रही। हालिया घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि अब वैश्विक शक्ति संतुलन का नया केंद्र भारत बन चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई ताजा बातचीत बदलती विश्व व्यवस्था का स्पष्ट संकेत है। करीब चालीस मिनट चली इस बातचीत में जिस तरह द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति पर चर्चा हुई, वह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब केवल साझेदार नहीं, बल्कि रणनीतिक धुरी बन चुका है। यह वही भारत है जिसे कभी क्षेत्रीय शक्ति तक सीमित समझा जाता था, लेकिन आज वही भारत वैश्विक फैसलों के केंद्र में बैठा है।इसे भी पढ़ें: Modi-Trump Secret Call | मोदी-ट्रंप की 40 मिनट की गुपचुप बातचीत, 'होर्मुज' की नाकाबंदी और वो एक संदेश, जिसने हिला दी दुनिया की राजनीति!इस बातचीत का सबसे अहम पहलू पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन विचार विमर्श रहा। होरमुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर देना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा को बचाने का स्पष्ट संदेश है। यह वही मार्ग है जहां से दुनिया की बड़ी ऊर्जा जरूरतें गुजरती हैं। ऐसे में भारत की सक्रिय भागीदारी यह दिखाती है कि अब वह केवल अपने हितों तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता का जिम्मेदार प्रहरी बन चुका है।रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह घटनाक्रम कई स्तरों पर भारत के लिए निर्णायक है। अमेरिका के साथ संभावित बड़े समझौते इस दिशा में एक ठोस कदम हैं। यह केवल तेल या गैस की खरीद नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक सुरक्षा का ढांचा है। जब कोई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित कर लेता है, तो वह आर्थिक और सामरिक दोनों मोर्चों पर मजबूत हो जाता है। एक और महत्वपूर्ण पहलू आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी सहयोग है। अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी का मतलब है कि भारत अब वैश्विक उत्पादन और तकनीकी ढांचे में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। यह वह क्षेत्र है जहां भविष्य की ताकत तय होती है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का यह कहना कि आने वाले दिनों में बड़े समझौते अंतिम रूप ले सकते हैं, इस बात का संकेत है कि दोनों देश अब परिणाम देने की दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। यह वही बदलाव है जो भारत की कूटनीति को अलग बनाता है। गोर के मुताबिक, बातचीत के अंत में ट्रंप ने मोदी से कहा, “मैं बस आपको यह बताना चाहता हूं कि हम सब आपसे प्यार करते हैं।''उधर, ट्रंप से बातचीत के बाद मोदी ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “मुझे मेरे मित्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया था। हमने विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की।” उन्होंने लिखा, “हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला एवं सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया।”देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में तनाव, ईरान और अमेरिका के बीच अनिश्चितता, समुद्री मार्गों पर खतरा और युद्धविराम की नाजुक स्थिति ने पूरी दुनिया को असमंजस में डाल रखा है। ऐसे समय में भारत का संतुलित रुख उसे एक विश्वसनीय शक्ति के रूप में स्थापित करता है। भारत न तो किसी सैन्य गठबंधन में कूद रहा है और न ही निष्क्रिय बैठा है, बल्कि कूटनीतिक संतुलन के साथ अपने हितों और वैश्विक स्थिरता दोनों को साध रहा है।बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच निरंतर संवाद इस बात का प्रमाण है कि दोनों देशों के रिश्ते केवल अवसर आधारित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीति पर आधारित हैं। यह संबंध अब उतार चढ़ाव से ऊपर उठकर स्थिरता की दिशा में बढ़ चुका है। पश्चिम एशिया में संकट शुरू होने के बाद से यह मोदी और ट्रंप की दूसरी वार्ता थी। इसके अलावा, अगले महीने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा इस साझेदारी को और मजबूत कर सकती है। यह यात्रा कई बड़े फैसलों की भूमिका तैयार करेगी। हाल ही में विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी अमेरिका यात्रा पर गये थे और इस दौरान दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर सहमति बनी है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Tejashwi Yadav ने CM Samrat Choudhary को दी बधाई, पूछा- 21 साल के NDA राज में Bihar पिछड़ा क्यों?
    Next Article
    Iran पर घमासान: China ने सैन्य मदद से किया इनकार, US को दी Trade War की धमकी

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment