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    आगरा में UGC का विरोध, 20 दिन में तीन प्रदर्शन:1500 युवा 200 ट्रैक्टर लेकर निकले; एक्सप्रेस-वे पर पुलिस ने जेसीबी-हाइड्रा से रोका

    3 hours ago

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    आगरा में UGC के नए नियमों के विरोध में रविवार को तीसरी बार बड़ा प्रदर्शन हुआ। सवर्ण समाज के करीब 1500 युवक 200 ट्रैक्टरों के साथ सड़क पर उतरे और कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने लगे। पुलिस ने आगरा-नोएडा यमुना एक्सप्रेस-वे से पहले जेसीबी, हाइड्रा और बुलडोजर लगाकर रास्ता रोक दिया। प्रदर्शनकारी घेरा तोड़कर आगे बढ़े और एक्सप्रेस-वे तक पहुंच गए, जहां जाम की स्थिति बन गई। आगरा में UGC के विरोध को लेकर सितंबर में अब तक तीन बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। हर बार प्रदर्शन का केंद्र एत्मादपुर क्षेत्र रहा, जहां क्षत्रिय बाहुल्य 22 गांव होने के कारण इसे क्षत्रियों की ‘बाइसी’ भी कहा जाता है। 1 सितंबर को हाईवे किया था जाम क्षत्रिय सभा के बैनर तले बाइक रैली लेकर एत्मादपुर तहसील पहुंचे लोगों ने हाईवे जाम कर दिया था। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप लगाते हुए धरना दिया था। हंगामे और प्रदर्शन के बाद दरोगा को निलंबित कर दिया गया था। सवर्ण समाज और सिस्टम सुधार संगठन की ओर से एत्मादपुर से कलेक्ट्रेट तक ट्रैक्टर मार्च निकाला गया था। पुलिस ने सुबह से ही गांवों में नाकेबंदी कर दी थी। इसके बाद भी सैकड़ों लोग आगरा कानपुर हाईवे तक आ गए थे। 5 घंटे की गहमागहमी के बाद पुलिस-प्रशासन ने डिप्टी सीएम से बात कराई थी। मांगों को केंद्रीय मंत्री पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था। यूजीसी मुक्ति मोर्चा की ओर से आगरा जिले के मुड़ी चौराहा से प्रदर्शन शुरू हुआ। यहां से आगरा कलेक्ट्रेट की दूरी करीब 30 किमी है। रास्ते में 3 किमी की दूरी पर नादऊ चौराहा पर पुलिस ने जेसीबी और हाइड्रा लगाकर रास्ता बंद कर दिया था। भीड़ उस घेरे को तोड़कर अलग-अलग रास्ते से आगे बढ़ी और 300 मीटर की दूरी पर यमुना एक्सप्रेसवे तक पहुंच गई। UGC के नए नियमों का विरोध क्यों? UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।' इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।
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