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    वृंदावन नाव हादसा-11 मौतों के ये 4 जिम्मेदार:नाव मालिक और ठेकेदार को जेल भेजा, अफसरों ने खुद को बचा लिया

    5 hours ago

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    वृंदावन में पांटून पुल से टकराकर नाव पलट गई। अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, 5 अब भी लापता हैं। 15 मिनट पहले का जो वीडियो मिला, उसमें सभी हंसते-मुस्कुराते दिख रहे हैं लेकिन, कुछ ही मिनटों में सब खत्म हो गया। जिस घाट पर हादसा हुआ, वहां दुनियाभर से कृष्ण भक्त आते हैं। 25-30 फीट गहरी यमुना में नाव मालिक बिना लाइफ जैकेट पहनाए 37 लोगों को बोटिंग करा रहा था। हादसे के बाद प्रशासन की नींद टूटी। जांच-पड़ताल शुरू हुई। नाव मालिक और पांटून पुल के ठेकेदार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया। दोनों को जेल भेज दिया गया। लेकिन, अफसरों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। लेकिन, सवाल है- ये गैर-इरादतन हत्या है या घोर लापरवाही में की गई हत्या। अगर लाइफ जैकेट पहनाई होती तो शायद एक भी जिंदगी न जाती। क्योंकि, लाइफ जैकेट पहनी होने से करीब एक घंटे तक कोई डूबता नहीं। वृंदावन के इस फेमस केसी घाट पर बिना लाइसेंस के करीब 400 नावें चल रही हैं। यहां मॉनिटरिंग का कोई सिस्टम नहीं है। अफसर कभी झांकने तक नहीं आते हैं। यानी, सब भगवान भरोसे चल रहा है। आखिर इन 11 मौतों का जिम्मेदार कौन? किसने आंखें बंद रखी थी, जिस वजह ये भयावह हादसा हुआ। दैनिक भास्कर उन 4 चेहरों को सामने लाया है, पढ़िए रिपोर्ट…. नाव मालिक की जिम्मेदारी क्या थी पहली- नाव पर बैठाने के बाद हर यात्री को लाइफ जैकेट पहनाना था। दूसरी- तेज हवा चल रही थी तो नाव को कम स्पीड में चलाना चाहिए था। तीसरी- तेज हवा, पानी का बहाव या अन्य कोई खतरा दिखने पर नाव को किनारे पर रोके और पर्यटकों को सुरक्षित उतारे। पप्पू निषाद ने नाव में बैठे एक भी श्रद्धालु को लाइफ जैकेट नहीं दी थी। देता भी कैसे, उसकी नाव में एक भी जैकेट नहीं थी। नाव पर क्षमता से ज्यादा 37 लोगों को बैठा लिया। नाव किनारे से करीब 50 फीट दूर बीच धारा में थी। हवा 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी। लेकिन, उसने स्पीड कम नहीं की। नाव डगमगाने लगी तो श्रद्धालुओं ने उसे नाव रोकने के लिए कहा, लेकिन वह नहीं माना। यही नहीं, यमुना रिवर फ्रंट परियोजना के तहत पांटून पुल को हटाया जा रहा है। पप्पू को नाव उधर नहीं ले जानी थी। पांटून पुल के पास यमुना में पानी कम था, नाव की मोटर वहां रुक गई। यहां पर ही उसे नाव को रोक देना चाहिए था। जैसे ही उसने स्पीड बढ़ाई, अचानक बोट बेकाबू हो गई और पांटून पुल से टकरा गई। बोट में सवार लोग झटके से एक तरफ लुढ़क गए और नाव पलट गई। श्रद्धालुओं को डूबता छोड़ नाव मालिक भाग खड़ा हुआ। ठेकेदार की जिम्मेदारी क्या थी पहली-पांटून पुल को रिवर फ्रंट के काम के लिए खोला जा रहा है। यमुना नदी के इस एरिया में नौकायन बंद करना था। दूसरी- पांटून पुल के पास काम चल रहा था, ऐसे में वहां संकेतक लगाने चाहिए। ताकि, नाव या स्टीमर वाले उस इलाके में न जाए। ठेकेदार नारायण शर्मा बिना सूचना दिए पुल की मरम्मत के लिए उसे खोलने का काम कर रहा था। पांटून पुल को रिवर फ्रंट के काम के लिए जेसीबी लगाकर रस्सी से खींचा जा रहा था। इस दौरान नावों का संचालन को रोकने के लिए प्रशासन को सूचित करना था। लेकिन, नारायण शर्मा ने ऐसा नहीं किया। अगर ठेकेदार मरम्मत का काम चलने संबंधी संकेतक लगाता तो नाव संचालक सतर्क रहते और सावधानी से नौकायन करते। पांटून पुल के पास नाव या स्टीमर लेकर नहीं आते। नगर आयुक्त की जिम्मेदारी क्या थी पहली- नगर निगम ही नावों का लाइसेंस जारी करता है। इसकी पहली शर्त है कि पर्यटकों को लाइफ जैकेट अनिवार्य रूप से देना होगा। इसका पालन नहीं कराया। दूसरी- नावों में क्षमता से अधिक यात्री नहीं होने चाहिए। वृंदावन के 15 से ज्यादा घाटों की देख-रेख का जिम्मा भी नगर निगम के पास है। लेकिन इसमें पूरी अनदेखी की। मथुरा में स्वामी घाट से लेकर गोकुल घाट तक 400 नाव चल रही हैं। किसी भी नाव मालिक के पास लाइसेंस नहीं है। जिस नाव से हादसा हुआ, उसका भी लाइसेंस नहीं है। लाइसेंस तो दूर की बात किसी भी नाव में एक भी लाइफ जैकेट तक नहीं है। नगर निगम ने नावें चलाने को लेकर कोई गाइडलाइन भी नहीं बनाई है। यही वजह है कि नाव में सुरक्षा व्यवस्था के कोई इंतजाम नहीं हैं। मॉनिटरिंग का जिम्मा भी निगम का है, लेकिन यहां कोई भी अफसर देखने के लिए नहीं आता है। मथुरा आर्मी इंजीनियरिंग कोर के सूबेदार अखिलेश पांडेय ने शुक्रवार को कहा था- लाइफ जैकेट का फायदा यह है कि अगर कोई भी पानी में डूबता है, तो जैकेट उसे पानी के ऊपर की तरफ खींचकर ले आती है। समय रहते डूबने वाले को निकाला जा सकता है। एसडीएम की जिम्मेदारी क्या थी पहली- घाट और नाव की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही है या नहीं, इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती है। एसडीएम इसकी मॉनिटरिंग करते हैं। दूसरी- श्रद्धालुओं के वृंदावन आने और दर्शन करके सुरक्षित लौट जाने की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होती है। प्रशासन नावों की कभी मॉनिटरिंग नहीं करता। लाइफ जैकेट पर्यटकों को दिया जा रहा या नहीं, इसकी देख-रेख के लिए कोई नहीं है। नाव चलाने में मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसे भी चेक नहीं किया गया। यूपी में लाइफ जैकेट को लेकर गाइडलाइन हादसा कहां हुआ, ग्राफिक्स से समझिए… नाव तट से करीब 50 फीट दूर यमुना नदी के बीच में थी। उस वक्त हवा करीब 30kmph स्पीड से चल रही थी। तेज हवा से नाव अचानक डगमगाने लगी। नाविक कंट्रोल खो बैठा। पर्यटकों ने नाविक से कहा, पुल आने वाला है, रोक लीजिए। लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार नाव टकराने से बची। तीसरी बार में टक्कर हो गई और नाव डूब गई। हादसे में मरने वाले 7 रिश्तेदार थे हादसे में एक ही परिवार के 7 सदस्यों की मौत हुई है। मृतकों में मधुर बहल, उसकी माता कविता बहल, चाचा चरणजीत, चरणजीत की पत्नी पिंकी बहल, मधुर की बुआ आशा रानी, दूसरी बुआ अंजू गुलाटी और फूफा राकेश गुलाटी शामिल हैं। ------------------------------- यह खबर भी पढ़ें वृंदावन में यमुना में नाव डूबी, 10 पर्यटकों की मौत, इनमें 7 एक ही परिवार के; लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी मथुरा के वृंदावन में 37 श्रद्धालुओं से भरी प्राइवेट नाव (स्टीमर) यमुना नदी में पलट गई। हादसे में 10 की डूबने से मौत हो गई। इनमें मां-बेटे, चाचा-चाची और बुआ-फूफा समेत एक ही परिवार के 7 सदस्य शामिल थे। युवती समेत 5 लोग अभी भी लापता हैं। नाव में सवार सभी श्रद्धालु पंजाब से घूमने आए थे। पढ़ें पूरी खबर…
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