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    वाराणसी में घूस लेकर जन्म तिथि बदल दी:प्रमाण पत्र पर मिले उप सचिव के साइन, अपर सचिव ने मांगा स्पष्टीकरण

    8 hours ago

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    UP बोर्ड के वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में बड़ा खुलासा हुआ है। यहां पर एक छात्र की मार्कशीट में जन्मतिथि के संशोधन के लिए 40 हजार रुपए घूस लेने का आरोप लगा है। संशोधन प्रमाण-पत्र पर उप सचिव साहब सिंह यादव के साइन मिले हैं। नियम के तहत क्षेत्रीय कार्यालयों में महज तीन वर्ष तक ही जन्मतिथि आदि में संशोधन करने का अधिकार है। इसके ऊपर संशोधन करने का अधिकार प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड मुख्यालय पर सचिव को है। अब संबंधित छात्र को जब मार्कशीट में कुछ गलत होने की आशंका हुई तो उसने सीधे UP बोर्ड, प्रयागराज के सचिव से शिकायत की है। अब क्षेत्रीय कार्यालय, वाराणसी के प्रभारी अपर सचिव दिनेश सिंह ने इसके लिए उप सचिव साहब सिंह यादव, सहायक सचिव मनोज कुमार, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी राणा प्रताप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी संजय कुमार जायसवाल, प्रधान सहायक कन्हैया लाल व वरिष्ठ सहायक राहुल चौरसिया से स्पष्टीकरण मांगा है। पहले जानिए, क्या है पूरा मामला गोरखपुर निवासी अंकित कुमार ने अपनी जन्मतिथि संशोधन को लेकर वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन किया था। अंकित ने बताया कि मैं मौजूदा समय में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का छात्र हूं। मैंने यूपी बोर्ड, प्रयागराज में भेजे गए शिकायती पत्र में बताया कि उसने वर्ष 2014 में नीना थापा इंटर कालेज गोरखपुर से हाईस्कूल पास किया था। सनद में जन्मतिथि में संशोधन कराना था। इसके लिए कई बार क्षेत्रीय कार्यालय का चक्कर लगाता रहा। अंकित ने बताया, जब मैं एक दिन कार्यालय गया तो बाबू राहुल चौरसिया ने कहा, 40 हजार रुपये दे दो, तुम्हारा काम करा दूंगा, क्योंकि ये काम प्रयागराज और फिर दिल्ली से होता है। हमें, सनद की जरूरत थी। राहुल ने 40 हजार रुपये लिए और दूसरे दिन जन्मतिथि में संशोधन करके दे दिया। एक ही दिन में मार्कशीट मिलने पर अंकित को आशंका हुई तो उसने इसकी शिकायत बोर्ड सचिव से की है। स्पष्टीकरण में उप सचिव व अन्य को देना होगा जवाब अपर सचिव की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पत्र में कहा गया है कि छात्र द्वारा प्रस्तुत स्थानांतरण प्रमाण-पत्र एवं अन्य अभिलेखों में विसंगतियां थीं। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा संस्तुति कर फाइल आगे बढ़ाई गई। पत्रावली पर दर्ज टिप्पणियों में यह भी उल्लेख किया गया कि “मानवीय त्रुटि” के आधार पर संशोधन करना उचित प्रतीत होता है। प्रथम दृष्टया जांच में अधिकारी व बाबुओं की मनमानी जांच में पाया गया कि कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध टिप्पणियों और आदेशों के अनुपालन में कई विसंगतियां हैं। पत्रावली में दर्ज टिप्पणियों के अनुसार, संबंधित प्रकरण में जन्मतिथि संशोधन के लिए आवश्यक दस्तावेजों और जांच आख्या को लेकर अलग-अलग स्तर पर विरोधाभास दिखाई दिया। कुछ आदेशों में वर्ष 1998 की जन्मतिथि संशोधित करने का निर्देश अंकित किया गया, जबकि पूर्व अभिलेखों में अलग तिथि दर्ज थी। मामले में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित पत्रावली में जांच समिति की रिपोर्ट संलग्न नहीं पाई गई, जबकि आदेश उसी जांच आख्या के आधार पर पारित किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, ओवरराइटिंग और हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों के हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं हैं, जबकि उनके नाम से आदेश अंकित किए गए हैं। कार्यालय की ओर से जारी पत्र में संबंधित प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारियों से निर्देश दिया गया है कि वे निर्धारित तिथि तक अपना लिखित स्पष्टीकरण और साक्ष्य उपलब्ध कराएं। स्पष्ट किया गया है कि समयसीमा के भीतर जवाब न मिलने पर यह माना जाएगा कि संबंधित पक्ष को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है, जिसके बाद विभागीय नियमों के तहत अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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