Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    दोस्त Trump ने कतर दिये Netanyahu के पर, Lebanon पर बमबारी नहीं कर पाएँगे इजराइली विमान, दुनिया हैरान

    3 hours from now

    1

    0

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ऐसी जोरदार भिड़ंत सामने आई है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव मानी जाती थी। लेकिन अब हालात इतने बदल चुके हैं कि अमेरिका खुद इजराइल के पर कतरने पर उतर आया है। पूरी कहानी की शुरुआत उस समय हुई जब ट्रंप ने अचानक ऐलान कर दिया कि इजराइल अब लेबनान पर कोई भी हवाई हमला नहीं करेगा और यह अमेरिका की ओर से लागू किया गया प्रतिबंध है। ट्रंप ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि अब बहुत हो चुका है और इजराइल को हर हाल में रुकना होगा। यह बयान किसी सामान्य अपील जैसा नहीं था, बल्कि एक सीधे आदेश की तरह था, जिसे इजराइल के पास मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।यही वह पल था जिसने नेतन्याहू और उनकी पूरी टीम को झकझोर दिया। उन्हें इस फैसले की जानकारी मीडिया के जरिए मिली और वह पूरी तरह से चौंक गए। दरअसल, इससे ठीक एक दिन पहले अमेरिका की पहल पर इजराइल और लेबनान के बीच दस दिन का संघर्षविराम लागू हुआ था। इस समझौते में साफ लिखा था कि इजराइल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार रहेगा और वह किसी भी आसन्न या जारी खतरे के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।इसे भी पढ़ें: Vishwakhabram: Giorgia Meloni पर इतना क्यों भड़के हुए हैं Trump? कौन है वो जिसने डाली है इस दोस्ती में दरार?लेकिन ट्रंप के बयान ने इस पूरी रूपरेखा को उलट कर रख दिया। ऐसा लगा जैसे अमेरिका ने एक झटके में इजराइल की सैन्य स्वतंत्रता को सीमित कर दिया हो। यही कारण है कि इजराइल ने तुरंत व्हाइट हाउस से संपर्क साधा और पूछा कि क्या अमेरिका की नीति बदल गई है? वाशिंगटन में इजराइल के राजदूत येचियल लेइटर सहित कई अधिकारी स्थिति समझने में जुट गए।अमेरिका की ओर से बाद में सफाई दी गई कि संघर्षविराम समझौता इजराइल को आत्मरक्षा का अधिकार देता है, लेकिन आक्रामक सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाता है। लेकिन असली संदेश इससे कहीं ज्यादा गहरा था। ट्रंप ने बाद में भी अपने बयान को दोहराते हुए साफ कहा कि इजराइल अब इमारतें नहीं उड़ा सकता और वह इसे जारी रखने की अनुमति नहीं देंगे।अब सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका ऐसा क्यों कर रहा है? वह देश जो दशकों से इजराइल का सबसे बड़ा समर्थक रहा, अचानक उसी पर लगाम कसने क्यों लगा? दरअसल अमेरिका इस समय केवल इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष को नहीं देख रहा, बल्कि वह ईरान के साथ एक बड़े समझौते की जमीन तैयार कर रहा है। ऐसे में अगर इजराइल लगातार हमले करता रहता है, तो यह पूरी कूटनीतिक प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। इसलिए ट्रंप इजराइल को रोककर एक बड़े खेल को साधने की कोशिश कर रहे हैं।इसके अलावा, लेबनान में लगातार हो रहे हमलों और भारी नागरिक हानि ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना को जन्म दिया है। अमेरिका अब खुद को एक जिम्मेदार शक्ति के रूप में पेश करना चाहता है, जो केवल युद्ध नहीं बल्कि समाधान भी चाहता है। साथ ही ट्रंप का यह कदम साफ संकेत देता है कि अमेरिका अब इजराइल को पूरी तरह खुली छूट देने के मूड में नहीं है। वह यह दिखाना चाहता है कि अंतिम फैसला वाशिंगटन में होता है, तेल अवीव में नहीं।इस बीच, जमीन पर हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। संघर्षविराम लागू होने के बावजूद इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में ड्रोन हमला किया, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई। इजराइल का दावा है कि हिजबुल्ला ने पहले हमला कर समझौते का उल्लंघन किया, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। इजराइल ने इसे आत्मरक्षा बताया और कहा कि उसने अमेरिका और लेबनान के साथ हुए समझौते के दायरे में ही कदम उठाया है।देखा जाए तो इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के लिए यह स्थिति राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है। एक तरफ उन्हें अपने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के दबाव को भी झेलना है। उन्होंने साफ कहा है कि हिजबुल्ला के खिलाफ अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है और राकेट तथा ड्रोन खतरे को खत्म करना बाकी है।साथ ही इस पूरी स्थिति का सामरिक महत्व बेहद बड़ा है। पहली बार अमेरिका ने इतने खुले तौर पर इजराइल को सार्वजनिक रूप से रोका है। यह न केवल दोनों देशों के रिश्तों में बदलाव का संकेत है, बल्कि पूरे मध्य पूर्व के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करता है। रणनीतिक रूप से देखें तो यह एक नई व्यवस्था की शुरुआत है, जहां अमेरिका अब केवल समर्थन देने वाला नहीं बल्कि नियंत्रण करने वाला बनना चाहता है। इजराइल को यह संदेश साफ मिल चुका है कि अब उसे हर कदम सोच समझकर उठाना होगा।बहरहाल, यह केवल एक टकराव नहीं, बल्कि एक नए युग की शुरुआत है जिसमें दोस्ती के नाम पर मिली छूट अब सख्त शर्तों में बदल रही है। और यही वह सच्चाई है जो आने वाले समय में मध्य पूर्व की दिशा तय करेगी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Tripura TTAADC चुनाव में Pradyot की जीत, बोले- यह मेरे लोगों और समुदाय की विजय है
    Next Article
    Delhi: CR पार्क में कैसे हुआ डबल मर्डर? पड़ोसी असद बन गया खूंखार कातिल, पिता-बेटे को चाकू से गोद डाला

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment