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    दलाई लामा की लंबी उम्र के लिए धर्मशाला में यज्ञ:हनुमान मंदिर में हवन हुआ; हिंदू, सिख, तिब्बती, थाई बौद्ध और ब्रह्माकुमारी प्रतिनिधि शामिल

    20 hours ago

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    धर्मशाला के कचहरी अड्डा स्थित ऐतिहासिक हनुमान मंदिर में रविवार को तिब्बती आध्यात्मिक गुरु परम पावन दलाई लामा की दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य के लिए 'धर्मशाला हिंदू चैप्टर—धार्मिक सद्भाव एवं विश्व शांति' के तत्वावधान में विशेष हवन-यज्ञ एवं सर्वधर्म प्रार्थना का आयोजन किया गया। इस भव्य कार्यक्रम में हिंदू, सिख, तिब्बती बौद्ध, थाई बौद्ध और प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने एक साथ मंच साझा करते हुए अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार प्रार्थना की। समारोह में थाईलैंड और स्वीडन से आए बौद्ध भिक्षुओं सहित विभिन्न मठों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। तिब्बती बौद्ध परंपरा से नामग्याल मठ के लोबसांग डाक्पा, डायलेक्टिक्स स्कूल के भिक्षु, गाडेन चोलिंग ननरी व तिलोकरपुर ननरी की भिक्षुणियां, किर्ति मठ के प्रतिनिधि तथा स्वीडन से आईं भिक्षुणी तेनजिन डोलकर शामिल हुईं। वहीं थाई बौद्ध परंपरा की ओर से जोगीवाड़ा स्थित वाट मठ से रायनू विचैदित, माई ची पट्चराना सहित कई थाई भिक्षुओं ने पारंपरिक प्रार्थना संपन्न कराई। सामाजिक व धार्मिक संगठनों की उपस्थिति इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी श्यामनगर केंद्र से कमलेश बहन, गुरु सिंह सभा धर्मशाला के प्रतिनिधि और गायत्री परिवार से तपेंद्र शर्मा, विजय कटोच व कमलेंद्र प्रताप सिंह उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त जिला परिषद चेयरमैन सीमा चौधरी सहित अनेक गणमान्य सामाजिक व धार्मिक हस्तियों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वसुधैव कुटुम्बकम् और विश्व शांति का संदेश कार्यक्रम के मुख्य यजमान एवं हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि परम पावन दलाई लामा का संपूर्ण जीवन प्रेम, करुणा और अहिंसा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के विचार पर टिकी है, पूजा पद्धतियां भिन्न हो सकती हैं, किंतु करुणा का भाव सभी को एक सूत्र में बांधता है। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि 'धर्मशाला हिंदू चैप्टर' का मुख्य उद्देश्य विभिन्न आस्थाओं के बीच संवाद और आपसी सम्मान को बढ़ावा देना है। हवन-यज्ञ के समापन पर सभी समुदायों ने सामूहिक रूप से विश्व शांति व मानव कल्याण का संकल्प लिया।
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