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    तीस्ता के बहाने चिकन नेक के करीब बढ़ रहा चीन? भारत ने जताई चिंता तो ड्रैगन का आया ये जवाब

    3 hours from now

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    चीन ने भारत की चिंताओं के बावजूद तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना (TRCMRP) के लिए अपना समर्थन दोहराया है। इसके साथ ही चीन ने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। भारत की गंभीर चिंताओं पर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने संवाददाताओं से कहा मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि चीन-बांग्लादेश सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता है और इसे किसी भी तीसरे पक्ष के प्रभाव से मुक्त होना चाहिए। तीस्ता नदी का बेसिन भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र (Northeastern Region) के बेहद करीब स्थित है। यही मुख्य कारण है कि ढाका और बीजिंग (बांग्लादेश और चीन) की इस संयुक्त पहल को लेकर भारत लगातार अपनी चिंताएं जता रहा है।इसे भी पढ़ें: US Tech Sell-off का असर: Japan से South Korea तक बाजार Crash, AI शेयरों में मचा कोहरामजियाकुन ने कहा कि तीस्ता नदी का पूरी तरह से इलाज और उसे फिर से ठीक करना एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिससे लोगों की आजीविका जुड़ी है और बांग्लादेश इसे बहुत अहमियत देता है। चीन इस प्रोजेक्ट में हर तरह से मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि चीन बांग्लादेश के साथ विकास की रणनीतियों में बेहतर तालमेल बिठाने और अर्थव्यवस्था, व्यापार, जल संरक्षण और आजीविका जैसे क्षेत्रों में आपसी सहयोग और आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए तैयार है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने कहा कि दोनों देशों के विशेषज्ञ पहली बार इस प्रोजेक्ट के लिए तकनीकी व्यवहार्यता अध्ययन (technical feasibility study) करेंगे। मंत्री ने आगे कहा कि दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए हैं, जबकि पिछली बार यह मामला इस चरण पर नहीं था। चीन ने कहा है कि वह इस प्रोजेक्ट के लिए हर संभव मदद देगा, क्योंकि व्यवहार्यता अध्ययन इसे सही ठहराता है। बांग्लादेश और चीन, तीस्ता सहित बांग्लादेश की नदियों के प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौते पर पहुँचे हैं। भारत तीस्ता योजना से जुड़ी किसी भी घोषणा पर बारीकी से नज़र रखेगा। इसे भी पढ़ें: चीन के नजदीक अचानक पहुंचे अमेरिका के खतरनाक B-2 बॉम्बर्स, जिनपिंग का पारा हो गया हाई, फिर...इस साल जनवरी में बांग्लादेश वॉटर डेवलपमेंट बोर्ड (BWDB) और चीन की सरकारी कंपनी POWERCHINA ने एक समझौता ज्ञापन (MoU) की अवधि बढ़ाने के लिए साइन किए, जिससे तीस्ता प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जा सके। भारत को चीन की इस मामले में भागीदारी को लेकर चिंता है, क्योंकि यह नदी रणनीतिक रूप से संवेदनशील सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे 'चिकन्स नेक' भी कहा जाता है) के बहुत करीब है। इस इलाके में बाहरी प्रभाव का कोई भी विस्तार, खासकर चीन की मौजूदगी, भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा सकता है और उस कॉरिडोर के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकता है जो भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है।
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