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    CM योगी ने किया पंडित राधेश्याम की प्रतिमा का अनावरण:GIC ऑडिटोरियम में लगाई गई है प्रसिद्ध कथावाचक पंडित राधेश्याम की प्रतिमा

    1 hour ago

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    बरेली में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रसिद्ध कथावाचक और 'राधेश्याम रामायण' के रचयिता पंडित राधेश्याम की प्रतिमा का अनावरण किया। रामपुर में जनसभा को संबोधित करने के बाद मुख्यमंत्री सीधे बरेली पहुंचे। पुलिस लाइन में हेलीकॉप्टर से उतरने के बाद वे सड़क मार्ग से जीआईसी ऑडिटोरियम पहुंचे, जहां उन्होंने पंडित राधेश्याम की प्रतिमा का लोकार्पण कर उनकी रामायण की तारीफ की। पुलिस लाइन से सीधे GIC ऑडिटोरियम पहुंचे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर 30 जून को दोपहर करीब 12:30 बजे बरेली पुलिस लाइन पहुंचा। यहां अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उनका स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच कार से जीआईसी ऑडिटोरियम पहुंचे। प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। प्रतिमा अनावरण के बाद सर्किट हाउस के लिए रवाना हुए प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सर्किट हाउस के लिए रवाना हो गए। यहां दोपहर 1:30 बजे से लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक करेंगे। इसके बाद नगर निगम के लिए खरीदे गए 51 नए चार पहिया वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। मुख्यमंत्री जनपद के विकास कार्यों और कानून व्यवस्था की समीक्षा बैठक भी करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शाम 4:15 बजे सर्किट हाउस से त्रिशूल एयरपोर्ट रवाना होंगे और 4:30 बजे लखनऊ के लिए उड़ान भरेंगे। कौन थे पंडित राधेश्याम, जिनकी रामायण घर-घर तक पहुंची पंडित राधेश्याम का जन्म वर्ष 1890 में बरेली में हुआ था। उन्हें 'राधेश्याम रामायण' के रचयिता के रूप में देश-दुनिया में विशेष पहचान मिली। उन्होंने रामकथा को ऐसी सरल, सहज और भावपूर्ण भाषा में प्रस्तुत किया कि यह आम जनमानस तक आसानी से पहुंच गई। उनकी लिखी रामायण वर्षों से देश के लाखों घरों में पढ़ी और सुनाई जाती रही है। कथा वाचन की शैली ने दिलाई अलग पहचान रामायण लेखन के साथ-साथ पंडित राधेश्याम एक प्रभावशाली कथावाचक भी थे। उनकी कथा सुनने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते थे। उनकी विशिष्ट शैली के कारण ही लोग उन्हें 'राधेश्याम कथावाचक' के नाम से जानने लगे। उन्होंने अपनी 'राधेश्याम कथा वाचक मंडली' के माध्यम से रामलीला और पौराणिक नाटकों को नई पहचान दिलाई। उनके लिखे कई नाटक उस दौर में रंगमंच पर बेहद लोकप्रिय रहे। 1963 में हुआ निधन, लेकिन आज भी जीवित है उनकी विरासत पंडित राधेश्याम का निधन वर्ष 1963 में हुआ, लेकिन उनकी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत आज भी लोगों के बीच जीवित है। 'राधेश्याम रामायण' आज भी धार्मिक आयोजनों, रामलीलाओं और घरों में श्रद्धा के साथ पढ़ी जाती है। उनकी प्रतिमा का अनावरण बरेली की सांस्कृतिक विरासत के सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पंडित राधेश्याम कथावाचक की रचनाएं मुख्य रूप से 'राधेश्याम रामायण' और उनके पौराणिक नाटकों में मिलती हैं। उनकी भाषा खड़ी बोली, ब्रज और उर्दू के मिश्रण वाली थी, जिसे आम जनता आसानी से समझ और गा सकती थी। यही कारण था कि उनकी रामायण उत्तर भारत की रामलीलाओं का प्रमुख आधार बन गई। उनकी चर्चित पंक्तियों में ये शामिल हैं- दोहा नाम राम का लीजिए, मिटें सकल संताप। राम कृपा से हो सके, जीवन का प्रतिताप॥ छंद जय-जय रघुनंदन दीनदयाला। करहु कृपा अब नाथ कृपाला॥ दुष्ट दलन रघुवीर तुम्हारे। जग में गूंजें नाम तुम्हारे॥ चौपाई श्री रघुनाथ कृपालु दयाला। दीनन हित सदा प्रतिपाला॥ जो जन शरण तुम्हारी आवै। भवसागर से पार लगावै॥ हाहाकार मचाए बंदर। कूद पड़े लंका के अंदर।। जय-जय श्री रघुवीर कृपाला। दीनदयालु कौशल्याला॥ बजरंगी बलवान कहाए। संकट में सबके काम आए॥
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