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    ट्रंप चीन में बैठकर जिस देश को धमका रहे थे, उसके विदेश मंत्री को दिल्ली बुलाकर जयशंकर ने बांधे तारीफों के पुल

    3 hours from now

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     चीन दौरे पर गए ट्रंप ने कहा है कि ईरान को अमेरिका के साथ जल्दी से जल्दी कूटनीतिक समझौता करना होगा। अगर वे समझौता नहीं करते हैं तो तबाह हो जाएंगे। एक तरफ ट्रंप ईरान की तबाही का दावा करते नजर आ रहे हैं तो वहीं इन धमकियों से बेपरवाह ईरान के विदेश मंत्री दिल्ली पधारे हैं। दरअसल,  विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची ने शुक्रवार को पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा आपूर्ति एवं समुद्री स्थिरता पर इसके प्रभाव पर केंद्रित व्यापक वार्ता की। ईरानी विदेश मंत्री ब्रिक्स सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिवसीय नई दिल्ली दौरे पर हैं। जयशंकर ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा कि आज सुबह दिल्ली में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ विस्तृत बातचीत हुई। पश्चिम एशिया की स्थिति और इसके प्रभावों पर चर्चा की। आपसी हित के द्विपक्षीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। #BRICSIndia2026 में उनकी भागीदारी की सराहना करता हूं। इसे भी पढ़ें: भारत के सामने UAE-ईरान लड़ पड़े, BRICS की बैठक में हो गया बड़ा लफड़ाब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में अरघची की भागीदारी की सराहना अब्बास अरघची का कहना है कि ईरान अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद का शिकार है। अब्बास अरघची ने गुरुवार को कहा कि ईरान अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद का शिकार है, और उन्होंने ब्रिक्स देशों से अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन की स्पष्ट रूप से निंदा करने का आग्रह किया। अरघची ने ये बातें नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन कहीं, जिसकी अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की और जिसमें रूस, ब्राजील और अन्य सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। उन्होंने कहा कि सच तो यह है कि ईरान, कई अन्य स्वतंत्र देशों की तरह, अवैध विस्तारवाद और युद्धोन्माद का शिकार है। ये घिनौनी बातें हैं जिनका आज की दुनिया में कोई स्थान नहीं है। भारत द्वारा आयोजित इस बैठक का महत्व और भी बढ़ गया क्योंकि प्रभावशाली गुट पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक नतीजों से जूझ रहा है, विशेष रूप से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा आपूर्ति में आई गंभीर बाधाओं से निपटने के लिए।  भयानक हिंसा के बावजूद, ईरानी जनता ने दृढ़ता और गर्व के साथ अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाई है। क्या हम स्वतंत्रता के अपने आदर्श से पीछे हट गए? क्या हमने साम्राज्यवादी सत्ता की इच्छाओं और मनमानी के आगे घुटने टेक दिए? जवाब स्पष्ट है हमने ऐसा नहीं किया, और न ही कभी करेंगे।इसे भी पढ़ें: मोदी के ऐलान पर बवाल क्यों? 82 देशों ने लिया बड़ा फैसला!अराघची ने अमेरिका और इज़राइल की कड़ी आलोचना कीअराघची ने ईरान को निशाना बनाने के लिए अमेरिका और इज़राइल की कड़ी आलोचना की और ज़ोर देकर कहा कि उनका देश “अटूट है और केवल और अधिक मजबूत और एकजुट होकर उभरता है। जैसा कि मैंने बार-बार कहा है, ईरान से संबंधित किसी भी समस्या का सैन्य समाधान संभव नहीं है। हम ईरानी कभी किसी दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकते, बल्कि सम्मान की भाषा का प्रयोग करते हैं।
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