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    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ केंद्र बनाए कानून:यूपी सहित 20 राज्यों के शिक्षकों का रामलीला मैदान पर प्रदर्शन, संसद घेराव की दी चेतावनी

    8 hours ago

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    शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में शनिवार को यूपी सहित देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में प्रदर्शन किया। दिल्ली के रामलीला मैदान पर टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (टीएफआई) के आह्वान पर आयोजित रैली के माध्यम से टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ केंद्र सरकार से कानून बनाने की मांग की गई। यूपी सहित देशभर से आए हजारों शिक्षकों ने टीईटी को अनिवार्य किए जाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का जमकर विरोध किया। शिक्षक नेताओं ने कहा कि आरटीई 2009 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी थोपना उनकी आजीविका पर हमला है। शिक्षकों ने संसद घेराव की चेतावनी दी टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लाखों परिवारों को बेरोजगारी की तरफ धकेल रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की और संसद घेराव की चेतावनी भी दी। 20 राज्यों से पहुंचे थे शिक्षक, यूपी से भी 30 हजार शामिल प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, मेघालय समेत 20 से ज्यादा राज्यों के शिक्षक शामिल हुए। प्रदर्शन में शिक्षक “टीईटी हटाओ, शिक्षक बचाओ”, “हमारा हक छीनने नहीं देंगे” जैसे स्लोगन के साथ शामिल हुए। कई राज्यों से विशेष बसों और ट्रेनों से शिक्षक दिल्ली पहुंचे। भारी पुलिस बल रहा तैनात दिल्ली प्रशासन ने रामलीला मैदान पर प्रदर्शन की अनुमति दी थी। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ये प्रदर्शन हुआ। हालांकि शिक्षकों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शिक्षकों का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। शिक्षकों की मुख्य मांग पूर्वांचल के शिक्षक दो अप्रैल को ही हो गए थे रवाना उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा के मुताबिक गोरखपुर, कुशीनगर, उन्नाव सहित कई जिलों के शिक्षक 2 अप्रैल को ही दिल्ली रवाना हो गए थे। पश्चिमी यूपी के शिक्षक आज सुबह रैली में शामिल हुए। प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री संजय सिंह ने बताया कि, “शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता पूरी तरह अन्याय है। उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 को टीईटी लागू किया गया था। उसके पहले नियुक्त 1.87 लाख शिक्षकों पर अब इसकी अनिवार्यता थोपना उनकी जीविका पर सीधा हमला है।” सुप्रीम कोर्ट के फैसले से लाखों शिक्षकों की नौकरी पर संकट टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला भूतलक्षी प्रभाव (retrospective effect) से लागू करना संविधान के विरुद्ध है। इससे देश भर के 20 लाख से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। सितंबर 2027 तक हर हाल में इन शिक्षकों को टीईटी परीक्षा पास करनी अनिवार्य है। केंद्र सरकार को इस पर कानून बनाकर शिक्षकों को राहत देना चाहिए। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें- यूपी के 1.86 लाख शिक्षकों की नौकरी पर 'संकट':TET परीक्षा दें या फिर SIR और जनगणना के टारगेट पूरे करें यूपी में 1.86 लाख शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास नहीं हैं। ये शिक्षक प्राथमिक (कक्षा 1 से 5 तक) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6 से 8 तक) विद्यालयों के हैं। इनमें 50 हजार तो ऐसे हैं, जो न्यूनतम योग्यता न होने के कारण परीक्षा में बैठ भी नहीं सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने TET पास करने के लिए सितंबर, 2027 की समय सीमा तय कर रखी है। ऐसे में यूपी में चार साल बाद जुलाई में होने वाली UPTET-2026 शिक्षकों के लिए एक बड़ा मौका है। मुश्किल ये है कि SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की गुत्थी में उलझे इन शिक्षकों को समझ नहीं आ रहा है कि मई में होने वाले राष्ट्रीय जनगणना की ड्यूटी के बीच वे परीक्षा की तैयारी कब करेंगे? परीक्षा का शेड्यूल क्या है, शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना क्यों जरूरी है? सेवा चयन आयोग ने यूपी टीईटी में शिक्षकों के लिए क्या शर्तें जोड़ी हैं? शिक्षक संघ क्यों 2011 से पहले कार्यरत शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जा चुके टीईटी का विरोध कर रहे हैं? पढ़िए ये रिपोर्ट…
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