Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    शिलापट पर नाम न होने पर भड़कीं सपा विधायक:नसीम सोलंकी बोलीं- हारे हुए प्रत्याशी का नाम है मेरा क्यों नहीं; इन्हें तो जनता जवाब देगी

    4 hours ago

    1

    0

    कानपुर में विकास कार्य के शिलापट पर नाम न लिखे जाने पर सीसामऊ विधानसभा से सपा विधायक नसीम सोलंकी ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा- हारे हुए प्रत्याशी का नाम पत्थर पर है लेकिन विधायक का नाम क्यों नहीं है। शासन के आदेश का भी पालन नहीं किया जा रहा है। इन्हें तो जनता जवाब देगी। वहीं, इस पर स्थानीय बीजेपी पार्षद आलोक पाण्डेय ने पलटवार करते हुए कहा कि विधायक नसीम पहले यह बताएं कि अपनी निधि से होने वाले कार्यों के शिलापट पर वह पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का नाम क्यों लिखवा रही हैं। उनका कहना है कि यह पूरी तरह गलत है, क्योंकि पूर्व विधायक पर मुकदमा चल रहा है और उन्हें सजा भी हो चुकी है। ऐसे में उनके नाम के आगे ‘माननीय’ लिखवाना भी गलत है। पार्षद ने मामले की शिकायत विधानसभा अध्यक्ष से करने की बात कही है। इस पूरे मामले पर दैनिक भास्कर ने विधायक नसीम सोलंकी और पार्षद आलोक पाण्डेय से बातचीत की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट... जिस शिलापट पर नाम नहीं होने से नाराज हुईं विधायक सीसामऊ विधानसभा में रामबाग चौराहे पर पीपीपी मॉडल पर डीलक्स जनसुविधा सुलभ शौचालय बनाया गया है। यहां लगे शिलापट पर सांसद रमेश अवस्थी, मेयर प्रमिला पाण्डेय, सीसामऊ से BJP के पूर्व प्रत्याशी सुरेश अवस्थी और स्थानीय पार्षद आलोक पाण्डेय का नाम लिखा हुआ है। इस पर विधायक नसीम सोलंकी ने शासनादेश का पालन न किए जाने का आरोप लगाया। नसीम सोलंकी ने कहा, "जो गाइडलाइन है, उसके अनुसार मेरा यानी विधायक का नाम होना चाहिए। लेकिन मैं कहूं किससे? सरकार इनकी, लोग इनके, जिनके नाम लिखे हैं। प्रशासन भी इनका है, तो फरियाद किससे करें। इनको तो जनता जवाब देगी।" उन्होंने कहा- "मुझे लगता है कि यहां के पूर्व प्रत्याशी को सरकार ने या फिर प्रशासन ने गोद ले रखा है, क्योंकि हर जगह उनकी बात मानी जा रही है। कुछ दिन पहले सपा विधायक अमिताभ बाजपेयी के मामले में भी उन्हें हाइलाइट किया गया। वह हारे हुए प्रत्याशी हैं, फिर भी मौजूदा विधायक का नाम नहीं है और उनका नाम लिखा हुआ है। पता नहीं क्या दिखाना चाहते हैं। पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का नाम अपने साथ शिलापट पर लिखवाने के सवाल पर नसीम सोलंकी ने कहा, "इससे पहले मेरे ससुर हाजी मुश्ताक सोलंकी का नाम पत्थरों पर लिखा जाता रहा। वह पूर्व विधायक हो गए, तब भी नाम लिखा जाता था। फिर मेरे पति इरफान विधायक रहे और अब मैं विधायक हूं। इसलिए जब मेरे पति पूर्व विधायक हैं, तो उनका नाम लिखाने में दिक्कत क्या है। यह हमारी परंपरा है। उन्होंने कहा, "मुझे तो जवाब चाहिए कि यहां मौजूदा विधायक का नाम ही शिलापट पर नहीं लिखा गया, जबकि जो प्रत्याशी थे उनका नाम लिखा हुआ है। इसका जवाब कौन देगा?" बीजेपी पार्षद ने लगाए ये आरोप वार्ड-5 जवाहर नगर से बीजेपी पार्षद आलोक पाण्डेय ने कहा- नसीम सोलंकी जो सीसामऊ से विधायक हैं, ऐसा लगता है कि वह पत्थर की राजनीति करती हैं। पहली बात यह कि जो सुलभ शौचालय बना है, वह नगर निगम की निधि से नहीं बना है। यह एक निजी संस्था की ओर से बनाया गया है। इसमें कोई शासनादेश लागू नहीं होता। उन्होंने कहा, "नसीम स्वयं प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रही हैं। वह जिन विकास कार्यों का शिलान्यास या लोकार्पण करती हैं, उनमें अपने पति पूर्व विधायक इरफान सोलंकी का नाम लिखवाती हैं। इसके साथ ही उनके नाम के आगे ‘माननीय’ भी लिखवाया जाता है। जबकि इरफान जमानत पर बाहर हैं। उन्हें सात साल की सजा हो चुकी है और अभी अन्य मामलों में मुकदमे चल रहे हैं। आलोक पाण्डेय ने कहा, "प्रोटोकॉल और शासनादेश का उल्लंघन तो इरफान का नाम शिलापट पर लिखवाकर किया जा रहा है। इस मामले में मैं विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को लिखित ज्ञापन देकर शिकायत करूंगा। जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी शिकायत की जाएगी। जरूरत पड़ी तो कोर्ट में रिट भी दाखिल करूंगा। उन्होंने कहा, "शासनादेश और प्रोटोकॉल का उल्लंघन नसीम सोलंकी ने किया है। नियमों में साफ लिखा है कि यदि किसी अपराध से जुड़े व्यक्ति का नाम सरकारी धन से किए गए प्रचार-प्रसार में इस्तेमाल किया जाता है तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नसीम सोलंकी स्वयं प्रोटोकॉल और शासनादेश का उल्लंघन कर रही हैं। यह विधायक के प्रोटोकॉल के भी खिलाफ है। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें योगी के सम्मान में इस्तीफा दिया, GST-अफसर जिद पर अड़े:बोले- मामला हाईकोर्ट में तो बोर्ड से क्या मतलब, भाई बोले- फर्जी दिव्यांगता दिखाई अयोध्या में तैनात GST के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत सिंह ने 27 जनवरी, 2026 को सीएम योगी के सम्मान में इस्तीफा देने का ऐलान किया। 30 जनवरी को इस्तीफा वापस ले लिया। उनके भाई ने प्रशांत के दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर सवाल खड़े किए। आजमगढ़ में मेडिकल बोर्ड के सामने GST अफसर 30 मई को पेश नहीं हुए। पढ़िए पूरी खबर
    Click here to Read more
    Prev Article
    मथुरा सभा में संतों ने दोहराई श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मांग:बुलंदशहर से पहुंची बाइक यात्रा, संत बोले- अब एकजुट होगा हिंदू समाज
    Next Article
    KGMU में 6 लावारिस मजारें शिफ्ट की जाएंगी:एजेंसी की ली जाएगी मदद, 3 नोटिस के बाद फैसला; जून में शुरू होगी कार्रवाई

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment