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    संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक का ऑल इंडिया MSME फेडरेशन स्वागत करता है: मगनभाई पटेल

    3 hours from now

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    हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा पेश किये गए परिसीमन विधेयक को ऑल इंडिया एमएसएमई फेडरेशन स्वागत करता है और देश के 140 करोड़ नागरिकों के हित में समर्पित मोदी सरकार तथा उनकी पूरी टीम को हार्दिक बधाई देता है।आज की वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में मोदी सरकार का नेतृत्व निखर रहा है,जिस पर समस्त देशवासियों को गर्व है। केंद्र सरकार के पिछले 11 वर्षों के कार्यकाल के दौरान देश में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन लाने के लिए कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए हैं।इनमें ट्रिपल तलाक बिल, अनुच्छेद 370, नागरिकता संशोधन विधेयक (CAA), वक्फ संशोधन विधेयक 2024-25, नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण विधेयक), यूएपीए (UAPA) संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill, 2026) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा और नई तकनीक (ई-कॉमर्स) के युग में उनकी शिकायतों के निवारण के लिए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 भी लागू किया गया है।इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा कई जनकल्याणकारी योजनाएं भी लागू की गई हैं, जिनमें विशेष रूप से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, देश के युवाओं के लिए स्किल इंडिया, आयुष्मान भारत (PM-JAY), प्रधानमंत्री जन सुरक्षा योजना, पीएम-किसान सम्मान निधि, पीएम किसान मान-धन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY), पीएम उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री जन-धन योजना, पीएम स्वनिधि योजना और पीएम विश्वकर्मा योजना जैसी अनेक योजनाओं के माध्यम से देश के विकास कार्यों में गति आई है। देश के विकास के लिए लिए गए निर्णयों और जनहित के कार्यों हेतु विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में संसद सदस्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आज जनता की समस्याएँ इतनी बढ़ रही हैं कि संसद सदस्यों का जनसंपर्क अत्यंत अनिवार्य हो गया है। आज देश में परिवार के सामाजिक, आर्थिक और संपत्ति से संबंधित कई प्रकार के अपराध हो रहे हैं। ऐसे में यदि ये अपराध बढ़ने से पहले ही संबंधित राज्य के सांसद और उनकी टीम जनता के बीच जाकर काउंसलिंग करे, तो कई अपराधों को कम किया जा सकता है और जनहित के कार्य बेहतर तरीके से हो सकते हैं। इस उद्देश्य के लिए, यदि प्रत्येक सांसद को उनकी टीम में 2 सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी, सेवानिवृत्त आईपीएस (IPS) अधिकारी, क्लास-वन अधिकारी या उनकी पसंद के कुशल अधिकारी कार्यालय के लिए दिए जाएँ, तो लिपिकीय (Clerical) और प्रशासनिक कार्य सुचारू रूप से हो सकते हैं। इससे सांसद स्वयं देश के ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच सकेंगे और मुख्य मुद्दों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। साथ ही, सेवानिवृत्त अधिकारियों के अनुभव का लाभ मिलने से सांसदों पर काम का बोझ कम होगा और उनकी अनुपस्थिति में भी राज्य में जनहित के कार्य निरंतर चलते रहेंगे।आज देश में केंद्र सरकार के नेतृत्व में 'डिजिटल इंडिया' और 'स्किल इंडिया' को अत्यधिक महत्व दिया जा रहा है, जिसके कारण देश के लगभग 40 करोड़ युवा विश्व के अन्य देशों की तुलना में सामान्य रोजगार से लेकर टेक्नो-सेवी (Techno-savy) होने तक बहुत आगे बढ़ रहे हैं। इन सभी ऐतिहासिक निर्णयों के बीच, यदि सरकार द्वारा संसद सदस्यों (MPs) और देश के इन 40 करोड़ युवाओं एवं जनता के बीच एक 'ब्रिज' (सेतु) बनकर कार्य किया जाए, तो निश्चित रूप से परिणामोन्मुखी (Result-oriented) कार्य सिद्ध हो सकेंगे। आज देश और दुनिया में उन्नत तकनीक (Advanced Technology) का दायरा बहुत बढ़ गया है, जिसके कारण संचार और परिवहन के क्षेत्र में व्यक्ति के समय की भारी बचत देखने को मिलती है। पुराने समय में टेलीग्राम पद्धति से संदेश भेजे जाते थे, जिसमें लगभग 4 से 5 दिन का समय लगता था। इसके बाद फैक्स (FAX) पद्धति का आविष्कार हुआ, जिससे 5 दिन का कार्य नई तकनीक द्वारा केवल 5 मिनट में पूर्ण होने लगा। फैक्स (FAX) पद्धति के बाद इंटरनेट का युग आया, जिसमें ईमेल (Email) द्वारा संचार अत्यंत तीव्र हो गया। इंटरनेट के वैश्विक विस्तार में निरंतर होते अपग्रेडेशन के कारण व्हाट्सएप (WhatsApp), फेसबुक, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन (LinkedIn) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की वजह से संचार की गति और भी तेज हुई है। आज AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), ChatGPT, Meta, Google Gemini और 'X' जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग देश के राजनेताओं से लेकर आम व्यक्ति तक होने लगा है। इसका मतलब है कि 50 से 100 लोगों का काम सोशल मीडिया के माध्यम से 5 से 10 लोग कर रहे हैं, जिससे अर्थव्यवस्था पर कई सकारात्मक प्रभाव पड़े हैं और देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।आज हमारे देश की संसद एक मंदिर है, जहाँ देश के व्यक्ति की आर्थिक, सामाजिक, स्वास्थ्य और रोजगार संबंधी गतिविधियों के लिए धार्मिक ग्रंथों पर हाथ रखकर संकल्प लिया जाता है। आज लोकसभा में प्रधानमंत्री और उच्च पदों पर आसीन संसद सदस्यों के लिए आमने-सामने अभद्र, असामाजिक और असंवैधानिक भाषा का उपयोग किया जाता है। इसे जीवित प्रसारण (Live Telecast) के माध्यम से जनता के सामने प्रस्तुत किया जाता है, जो अत्यंत शर्मनाक है। इसका गहरा प्रभाव देशवासियों और आज की युवा पीढ़ी के मानस पर पड़ रहा है।देश की कानून-व्यवस्था में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हमारे देश में सांप्रदायिक दंगों, प्राकृतिक आपदाओं या संकट के समय मीडियाकर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर निडर और निष्पक्ष रहकर सत्य को जनता के सामने रखा है। कई मामलों में मीडियाकर्मियों ने अपनी जान भी गंवाई है। कोरोना जैसी वैश्विक महामारी हो या देश की सीमाओं पर युद्ध जैसी तनावपूर्ण स्थिति, इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडियाकर्मियों ने अपने जीवन या परिवार की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य पूरी ईमानदारी से निभाकर देश की सेवा की है। किसी भी सत्ताधारी दल द्वारा देश के व्यक्ति के आंसू पोंछने जैसी जनहितैषी प्रस्तुति हो, या होम सिक्योरिटी अथवा बॉर्डर सिक्योरिटी से संबंधित प्रश्न हों,तब विपक्षी दल (Opposition) उसका विरोध करने का तरीका ढूँढकर विरोध करते हैं और अक्सर संसद छोड़कर चले जाते हैं। कई बार संसद को स्थगित करना पड़ता है, जो मंदिर समान संसद और समस्त देशवासियों का अपमान है। संसद सदस्य जनता के प्रतिनिधि के रूप में अपनी बात रखते हैं, तब 'विपक्ष' के सदस्य उसका जोर-शोर से विरोध करते हैं और ऐसी मानसिकता विकसित करते हैं कि जो जितना बड़ा विरोध करेगा, वह उतना ही अच्छा सदस्य माना जाएगा। हमारे देश के संविधान में जिसे 'विपक्ष' के रूप में संबोधित किया गया है, यदि उसे संवैधानिक रूप से बदलकर 'प्रतिस्पर्धी दल' (Competitor Party) कर दिया जाए, तो नकारात्मक मानसिकता निश्चित रूप से बदल जाएगी। प्रतिस्पर्धी दल के रूप में की गई प्रस्तुतियों का परिणाम देश के विकास में सकारात्मक रूप से देखने को मिल सकता है। इसलिए, यदि हम 'विरोध' शब्द को हमेशा के लिए समाप्त कर उसके स्थान पर 'प्रतिस्पर्धी दल' शब्द का प्रयोग करें, तो विरोध की मानसिकता में काफी हद तक सुधार देखने को मिल सकता है।आज हमारे देश में हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया गया है, फिर भी लोकसभा में अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में प्रस्तुति देखने को मिलती है। देश के कुछ राज्यों में आज भी वहां की मातृभाषा का उपयोग हो रहा है और उन राज्यों के सांसद लोकसभा में अंग्रेजी भाषा में अपनी बात रखते हैं। ऐसे में 'कम्युनिकेशन गैप' (संवाद अंतराल) को दूर करने के लिए हिंदी भाषा के प्रयोग को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है।दुनिया के प्रत्येक देश की अपनी एक राष्ट्रीयभाषा होती है, जिसे वहां के नागरिक प्राथमिकता देते हैं। यदि हमारे देश में भी हमारी राष्ट्रभाषा 'हिंदी' का उपयोग सभी राज्यों में होगा, तो निश्चित रूप से कम्युनिकेशन गैप दूर हो सकेगा। इसके साथ ही, संदेश व्यवहार और आर्थिक क्षेत्र में भी इसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त होंगे। वर्तमान में लोकसभा में कुल 543 संसद सदस्य हैं, ऐसे में राज्यों के लिए 815 और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35 सीटें बढ़ाकर कुल 850 सीटों के प्रस्ताव का हम पूर्ण समर्थन करते हैं। साथ ही, हमारा यह मानना है कि इसमें तकनीक (Technology) का जितना अधिक उपयोग किया जाएगा, सरकार पर कार्य का बोझ निश्चित रूप से उतना ही कम होगा। देश की जनता के हित में निरंतर कार्यशील केंद्र सरकार के उपरोक्त प्रयासों को ऑल इंडिया एमएसएमई फेडरेशन स्वागत करता है और बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता है।वन्दे मातरम्, भारत माता की जय !
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