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    स्कूली बच्चों को खेल से जोड़ रहे कोच गौरव:‘स्टेडियम चलो’ अभियान में अब तक 12 स्कूलों में पहुंचे, 100 में पहुंचने का टारगेट

    3 hours ago

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    कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम के एथलेटिक्स कोच गौरव ने स्कूली बच्चों को खेलों से जोड़ने के लिए ‘स्टेडियम चलो’ अभियान शुरू किया है। इसके तहत वे स्कूलों में जाकर बच्चों को खेलों के प्रति जागरूक कर रहे हैं और उन्हें स्टेडियम आकर ट्रेनिंग लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रधानमंत्री की अपील और खेल निदेशालय की पहल से मिला आइडिया कोच गौरव ने बताया कि इस अभियान का विचार उन्हें प्रधानमंत्री की उस अपील से मिला, जिसमें रोज एक घंटा शारीरिक स्वास्थ्य के लिए देने की बात कही गई है। इसके अलावा खेल प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश खेल निदेशालय की पहल के तहत भी हर महीने कोचों को एक स्कूल में जाकर बच्चों को खेलों के प्रति मोटिवेट करने और उन्हें स्टेडियम तक लाने के लिए प्रेरित किया जाता है। गौरव ने बताया कि अगर एक महीने में एक स्कूल में जाएंगे तो सालभर में करीब 12 स्कूलों तक ही पहुंच पाएंगे। इसलिए उन्होंने इसे बड़े स्तर पर करने का लक्ष्य तय किया और 2026-27 में 100 स्कूलों तक पहुंचने का टारगेट लेकर अभियान शुरू किया। इन स्कूलों में जाकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की खेलों से जुड़ी योजनाओं और ‘खेलो इंडिया’ के बारे में भी बच्चों को जानकारी दी जा रही है। साथ ही बच्चों को एथलेटिक्स समेत अन्य खेलों से जोड़कर स्टेडियम तक लाने का प्रयास किया जा रहा है। बोले- कई बच्चे आज भी खेल सुविधाओं से वंचित गौरव ने कहा कि आज भी बहुत से बच्चे ऐसे हैं, जो खेलों के प्रति जागरूक नहीं हैं या खेल खेलने से वंचित हैं। ऐसे में सभी की भूमिका बनती है। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने ट्रेनर के रूप में बच्चों को खेलों से जोड़ने का प्रण लिया है तो उनकी जिम्मेदारी सिर्फ स्टेडियम में ट्रेनिंग कराने तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक गांव, देहात, गलियों, मोहल्लों और स्कूलों से बच्चों को निकालकर स्टेडियम तक लाना, उन्हें खिलाड़ी बनाना और साथ ही स्वस्थ जीवनशैली की ओर ले जाना भी ट्रेनर की जिम्मेदारी है। स्कूलों में मिल रहा अच्छा रिस्पॉन्स अभियान के दौरान स्कूलों से मिलने वाले रिस्पॉन्स को लेकर गौरव ने बताया कि उन्हें अब तक काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिला है। स्कूलों के शिक्षक भी सहयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि जब वे स्कूल पहुंचते हैं तो वहां बच्चों और शिक्षकों की ओर से अच्छा माहौल मिलता है। बच्चे भी स्टेडियम आने के लिए उत्साहित रहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को अच्छे खेल मैदान मिलें और उन्हें स्टेडियम में आकर ट्रेनिंग लेने का मौका मिले तो निश्चित तौर पर देश के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छे पदक जीतने वाले खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं। अभियान के चलते तीन बच्चे स्टेडियम से जुड़े गौरव ने बताया कि अभियान के तहत अभी तक करीब 12 स्कूलों में जाने के बाद दो से तीन बच्चे ऐसे सामने आए हैं, जिनके अभिभावक उन्हें लेकर स्टेडियम पहुंचे। इनमें एक बच्चे ने एथलेटिक्स और दो बच्चों ने अन्य खेलों में ट्रेनिंग के लिए संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह अभियान का एक तरह से रिजल्ट है। अगर 12 स्कूलों में पहुंचने के बाद तीन बच्चे खेलों से जुड़ने के लिए स्टेडियम तक पहुंचे हैं तो उम्मीद है कि 100 स्कूलों तक पहुंचने के बाद इससे कहीं अधिक बच्चे खेलों से जुड़ेंगे। 8 से 12 साल के बच्चों पर विशेष फोकस कोच गौरव ने बताया कि उनका विशेष फोकस छोटे बच्चों पर है। उनके मुताबिक 8, 10 और 12 साल की उम्र के बच्चों के पास आगे काफी लंबा समय होता है। इस उम्र में बच्चों पर किसी चीज को लेकर बहुत ज्यादा दबाव में नहीं होता और वे मानसिक रूप से भी काफी फ्री होते हैं। उन्होंने कहा कि अगर 18-20 साल के बच्चे पर समय लगाने के बजाय 8-10 साल की उम्र के बच्चे पर उसी समय से काम शुरू किया जाए तो उसके पास आगे लंबा फ्यूचर होता है। उसे लंबे समय तक ट्रेनिंग कराई जा सकती है और उसकी क्षमता को बेहतर तरीके से विकसित किया जा सकता है। गौरव के मुताबिक छोटे बच्चे जब खेल और एक्सरसाइज करते हैं तो वे ज्यादा सहज होकर इसे करते हैं। उन्हें शुरुआत से सही ट्रेनिंग और दिशा दी जाए तो इन्हीं बच्चों में से आगे चलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी निकल सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि स्कूलों से बच्चों को स्टेडियम तक लाया जाए, उन्हें खेलों का बेहतर माहौल मिले और भविष्य में इन्हीं बच्चों में से कोई ओलंपियन या मेडलिस्ट तैयार हो।
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