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    सहारनपुर में 800 साल पुरानी परंपरा में आस्था का रंग:गोगा म्हाड़ी पर उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, नीले निशान और छड़ियां लेकर दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु

    10 hours ago

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    सहारनपुर के गंगोह रोड स्थित श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज की म्हाड़ी पर सोमवार को आस्था और परंपरा का संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक छड़ी मेले में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू हो गई। बड़ी संख्या में लोग परिवार और संगत के साथ म्हाड़ी पहुंचे। हाथों में नीले निशान और छड़ियां लिए श्रद्धालु बाबा के दरबार में पहुंचे और पूजा-अर्चना कर निशान चढ़ाए। मेले में लगातार गूंज रहे जयकारों से आसपास का वातावरण भक्तिमय बना रहा। श्रद्धालुओं के अनुसार गोगा जी महाराज की म्हाड़ी से उनकी आस्था लंबे समय से जुड़ी हुई है। कई परिवार ऐसे हैं, जो वर्षों से मेले में शामिल होने के लिए यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा के दरबार में पहुंचकर मन को शांति मिलती है। परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना के लिए श्रद्धालु यहां माथा टेकते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार निशान चढ़ाते हैं। पीढ़ियों से निभा रहे मेले में पहुंचने की परंपरा श्रद्धालुओं के मुताबिक गोगा जी महाराज के प्रति आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। परिवार के बड़े-बुजुर्ग जिस परंपरा के तहत म्हाड़ी पर आते रहे हैं, उसी परंपरा को नई पीढ़ी भी आगे बढ़ा रही है। कई श्रद्धालु बचपन से मेले में आने की बात कहते हैं। उनका कहना है कि हर साल मेले के दौरान यहां पहुंचना उनके लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ पारिवारिक परंपरा का हिस्सा बन चुका है। दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु संगत के साथ म्हाड़ी तक पहुंच रहे हैं। रास्ते में नीले झंडों और निशानों के साथ दिखाई देने वाली संगतें मेले के माहौल को और खास बना रही हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा जाहरवीर के दरबार में सच्चे मन से प्रार्थना करने से मन को संतुष्टि मिलती है। इसी विश्वास के चलते हर साल बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं। छड़ियों और निशानों के साथ पहुंच रही संगत मेले की प्रमुख परंपरा छड़ी और निशान चढ़ाने की है। शुक्ल पक्ष की दशमी के अवसर पर आयोजित होने वाले इस मेले में नेजा और 26 छड़ियां शोभायात्रा के साथ म्हाड़ी तक पहुंचती हैं। श्रद्धालु इन छड़ियों और नीले निशानों के साथ बाबा के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार छड़ी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा अवसर भी है। संगतों के साथ पहुंचने वाले लोग पूरे उत्साह के साथ मेले में शामिल होते हैं। तीन दिन तक चलने वाले आयोजन में अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। आस्था के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। भीड़ वाले स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है। इसके साथ ही CCTV कैमरों के जरिए भी पूरे क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। श्रद्धालुओं का कहना है कि मेले में पहुंचकर उन्हें धार्मिक आस्था के साथ पुरानी परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलता है। नीले निशानों, छड़ियों और जयकारों के बीच म्हाड़ी परिसर में दिनभर भक्तिमय माहौल बना हुआ है। श्रद्धालुओं की भीड़ और संगतों की आवाजाही से गोगा जी महाराज का ऐतिहासिक छड़ी मेला सहारनपुर की धार्मिक परंपरा की भव्य तस्वीर पेश कर रहा है।
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