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    सफलता के लिए डिग्री नहीं, कौशल और विजन जरूरी:प्रोफेसर बोले- व्यावहारिक ज्ञान का महत्व, मानवीय संवेदना और रचनात्मक सोच जरूरी

    9 hours ago

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    जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय में "कॉर्पोरेट कार्यप्रणाली में उभरते मुद्दे एवं चुनौतियां" विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी रविवार को संपन्न हुई। आर्यभट्ट सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में प्रबंधन, नेतृत्व, डिजिटल अर्थव्यवस्था और कौशल विकास जैसे समकालीन विषयों पर गहन चर्चा की गई। विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। संगोष्ठी के समापन सत्र में केके विश्वविद्यालय, नालंदा की प्रति कुलपति प्रो. रुम्की बनर्जी ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक कॉर्पोरेट जगत 'डिग्री-फर्स्ट' से 'स्किल-फर्स्ट इकोनॉमी' की ओर अग्रसर है, जहाँ व्यावहारिक कौशल और दूरदर्शिता को अधिक महत्व दिया जा रहा है। प्रो. बनर्जी ने यह भी रेखांकित किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव के बावजूद, जटिल समस्याओं के समाधान के लिए मानवीय संवेदना और रचनात्मक सोच अपरिहार्य है। बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय, लखनऊ के प्रो. कुशेन्द्र मिश्रा ने इस बात पर जोर दिया कि केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि उद्योग की बदलती मांगों के अनुरूप कौशल विकास अत्यंत आवश्यक है। प्रो. मिश्रा ने बेरोजगारी की समस्या को कौशल की कमी से जोड़ते हुए व्यावहारिक ज्ञान के महत्व को प्रतिपादित किया। "नेतृत्व एवं सुशासन" विषय पर आयोजित एक सत्र की अध्यक्षता पूर्व कुलपति प्रो. पी.सी. पतंजलि ने की। उन्होंने बताया कि किसी भी संस्था की प्रगति उसके प्रभावी नेतृत्व और सुशासन पर निर्भर करती है। इसी सत्र में प्रो. एच.सी. पुरोहित ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में मजबूत नेतृत्व की भूमिका पर प्रकाश डाला। इस सत्र में बी.एल. आर्य विशिष्ट अतिथि और प्रो. प्रदीप कुमार सह-अध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। एक अन्य तकनीकी सत्र में "कार्य और बाजार का भविष्य: मानव संसाधन प्रबंधन, कृषि-व्यवसाय, ई-वाणिज्य एवं व्यावसायिक अर्थशास्त्र का समन्वय" विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. अजय वाघ ने की, जिन्होंने बदलते कार्यपरिवेश और मानव संसाधन प्रबंधन के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. अमित सिंह ने कॉर्पोरेट चुनौतियों के समाधान के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा को आधार बताया। संगोष्ठी के दौरान "डिग्री बनाम कौशल, प्रतिभा की दौड़ में कौन जीतेगा" विषय पर एक महत्वपूर्ण पैनल चर्चा भी आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता प्रो. वी.के. सिंह ने की।
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