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    सैफई में आउटसोर्सिंग कर्मियों को दो माह से वेतन नहीं:नाराज कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर प्रशासनिक भवन घेरा

    6 hours ago

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    इटावा में गुरुवार को सैफई स्थित में आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम कर रहे एमटीएस कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आया। दो महीने से वेतन न मिलने से नाराज कर्मचारियों ने प्रशासनिक भवन के सामने धरना दिया और कामकाज ठप कर दिया। कर्मचारियों ने आर्थिक तंगी, कम वेतन और दबाव के आरोप लगाते हुए प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। वेतन न मिलने से बढ़ी परेशानी कर्मचारियों का कहना है कि पिछले दो महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने रोजमर्रा के खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। 9 से 10 हजार रुपये की कम सैलरी में किसी तरह परिवार चलाने वाले कर्मचारियों का कहना है कि जब समय पर भुगतान ही नहीं होगा तो घर चलाना, बच्चों की पढ़ाई और इलाज जैसे जरूरी काम करना बेहद कठिन हो जाता है। नोएडा के बाद सैफई में भी विरोध हाल ही में में भी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने वेतन और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। अब सैफई में भी उसी तरह का विरोध सामने आने से प्रदेश में आउटसोर्सिंग व्यवस्था को लेकर असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। इससे इस व्यवस्था की पारदर्शिता और संचालन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकारियों पर दबाव और धमकी के आरोप धरने पर बैठे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्याएं लेकर प्रशासनिक भवन पहुंचे तो उन्हें समाधान देने के बजाय दबाव बनाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें चेतावनी दी गई कि अगर प्रदर्शन किया तो सैलरी काट ली जाएगी और नौकरी से भी निकाला जा सकता है। कर्मचारियों ने इसे अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताया। निर्धारित वेतन और भुगतान में अंतर कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से आउटसोर्सिंग कर्मियों के लिए 17 हजार रुपये वेतन तय होने के बावजूद उन्हें करीब 9,600 रुपये ही दिए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि तय वेतन और वास्तविक भुगतान के बीच का अंतर आखिर कहां जा रहा है। बीमारी में भी कटती है सैलरी कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान बीमार होने या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में भी उनकी सैलरी काट ली जाती है। न तो छुट्टी दी जाती है और न ही मेडिकल सुविधा मिलती है। कर्मचारियों ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि सबसे ज्यादा काम करने के बावजूद सबसे ज्यादा उपेक्षा उन्हीं को झेलनी पड़ रही है। प्रशासन का पक्ष विश्वविद्यालय के प्रवक्ता प्रोफेसर डॉ. सोमेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के वेतन भुगतान का स्पष्ट प्रावधान है और संबंधित एजेंसी को हर महीने 1 से 3 तारीख के बीच भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है और कुलपति के निर्देश पर सभी कर्मचारी वापस काम पर लौट आए हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि किसी कर्मचारी को असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
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