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    राम मंदिर में संरक्षित होगी दुनियाभर की रामायण पांडुलिपियों:दुर्लभ हस्तलिपियों के संरक्षण की तैयारी, दिल्ली में पहली बैठक आज

    2 hours ago

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    राम मंदिर के दूसरे तल पर स्थापित होने वाले ‘राम नाम मंदिर’ में अब दुनिया भर की विभिन्न भाषाओं में रचित रामायण की प्राचीन पांडुलिपियों को संरक्षित करने की बड़ी योजना पर अमल शुरू हो गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इसके लिए देशभर के राज्यों के प्रमुखों को पत्र भेजने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर विज्ञापन जारी किए थे, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। वहीं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा रामायण की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण के लिए गठित सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति अब सक्रिय हो गई है। इस कमेटी की पहली बैठक आज आयोजित होगी, जिसकी अध्यक्षता भवन निर्माण समिति के चेयरमैन व पीएमओ के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी नृपेन्द्र मिश्र करेंगे, जबकि संयोजन अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीब सिंह के जिम्मे रहेगा। सैकड़ों लोग पांडुलिपियां सौंपने को तैयार ट्रस्ट के अनुसार, सैकड़ों की संख्या में शोधार्थी, लेखक और परिवार अपनी पीढ़ियों से सहेजी गई दुर्लभ पांडुलिपियों को ट्रस्ट को सौंपने के लिए तैयार हैं। कई लोगों ने इसकी सूचना भी ट्रस्ट को दे दी है। इन पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने और भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। ऑनलाइन-ऑफलाइन होगी संयुक्त बैठक बैठक अपराह्न तीन बजे से ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों में आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर से प्राप्त पांडुलिपियों की फोटो कॉपी विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। विशेषज्ञ पहले चरण में इनका प्राथमिक परीक्षण (स्क्रीनिंग) करेंगे और तय करेंगे कि किन दस्तावेजों को पांडुलिपि की श्रेणी में शामिल किया जाए। 7 सदस्यीय कमेटी करेगी परीक्षण पांडुलिपियों की प्रमाणिकता और संरक्षण के लिए सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है। इसमें 2007 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित संस्कृत विद्वान डा. सत्यव्रत शास्त्री शामिल हैं, जिन्होंने विदेशों में भी राम कथा से जुड़े दुर्लभ साक्ष्य जुटाए हैं। समिति में ओरियंटल इंस्टीट्यूट वडोदरा की प्रभारी निदेशक डॉ. श्वेता प्रजापति, भंडारकर प्राच्य संस्थान के डॉ. श्रीनंद बापट, एसईआरबी से सम्मानित डॉ. अर्नब तथा केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी जैसे विशेषज्ञ भी शामिल हैं। 250 साल पुरानी पांडुलिपि पहली भेंट हाल ही में प्रो. वरखेड़ी ने करीब 250 साल पुरानी रामायण पांडुलिपि ट्रस्ट को सौंपी, जिसे संरक्षण योग्य मानते हुए राम मंदिर के दूसरे तल पर सुरक्षित रखा जा रहा है। यह राम मंदिर को प्राप्त पहली दुर्लभ पांडुलिपि मानी जा रही है। धार्मिक विरासत के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम ट्रस्ट का मानना है कि यह पहल न केवल धार्मिक विरासत को सुरक्षित करेगी, बल्कि दुनिया भर में फैली राम कथा की विविध परंपराओं को एक मंच पर लाने का काम भी करेगी। इससे अयोध्या वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
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