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    Ashok Gehlot Birthday: कैसे बने 'राजनीति के जादूगर'? 3 बार Rajasthan के CM बनने की कहानी

    3 hours from now

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    राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज यानी की 03 मई को अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। शांत स्वभाव, मजबूत इरादे, मजाकिया अंदाज और गंभीर सोच रखने वाले अशोक गहलोत कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शामिल हैं। वह गांधी परिवार के बेहद करीबी माने जाते हैं। उनके राजनीतिक जीवन की बात करें तो वह 5 बार सांसद, 3 बार केंद्रीय मंत्री, 3 बार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष, 2 बार कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव, 5 बार विधायक और 3 बार राजस्थान के सीएम रह चुके हैं।जन्म और शिक्षाराजस्थान के जोधपुर में 03 मई 1951 को अशोक गहलोत का जन्म हुआ था। उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई पूरी करने के बाद व्यास यूनिवर्सिटी में एडमिशन ले लिया। अशोक गहलोत ने यूनिवर्सिटी में विज्ञान संकाय और कानून से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। फिर स्नातक करने के बाद गहलोत ने अर्थशास्त्र में मास्टर की डिग्री हासिल की।सियासी सफरकॉलेज के दिनों से गहलोत ने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरूआत की। फिर साल 1973 में वह एनएसयूआई में शामिल हो गए थे। फिर साल 1973 से 1979 तक वह NSUI राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष रहे। इसके बाद साल 1979 से 1982 तक वह जोधपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। इस दौरान गहलोत की उम्र 26 साल की थी, जब उन्होंने सरदारशहर से चुनाव लड़ा था। लेकिन इस दौरान उनको हार का सामना करना पड़ा था।फिर साल 1980 में कांग्रेस ने उनको उम्मीदवार बनाया और गहलोत ने जीत हासिल की। फिर साल 1984, 1991, 1996 और 1998 तक लगातार 5 बार गहलोत सांसद चुने गए। कांग्रेस पार्टी नीत केंद्र सरकार में गहलोत कई अहम मंत्रिमंडल में शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियों का निर्वहन भी किया।राजनीति के जादूगरअशोक गहलोत को राजनीति का जादूगर भी कहा जाता है और उन्होंने कई मौके पर यह साबित भी किया है। गहलोत के खिलाफ राजनीति कितनी ही हो, लेकिन वह उससे पार पाना जानते हैं। साल 1998 में कांग्रेस को राजस्थान में 158 सीटें मिली थी। वहीं अशोक गहलोत को सीएम पद के लिए चुना गया। साल 1998 में वह पहली बार राज्य के सीएम बने। फिर 2008 में एक बार फिर कांग्रेस को बहुमत मिला और दूसरी बार गहलोत को सीएम चुना गया। इसके बाद साल 2018 में एक बाद फिर अशोक गहलोत सीएम बने।हालांकि गहलोत का राजनीतिक जीवन आसान नहीं था। एक ओर उनको विरोधी दलों के खिलाफ लड़ाई लड़नी थी, तो वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर भी राजनीति से कई बार जूझना पड़ा। वहीं कई ऐसे मौके भी आए, जहां पर लगा कि गहलोत का राजनीतिक सफर खतरे में है। लेकिन राजनीति के जादूगर ने सब संभाल लिया।
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