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    रेलवे-बस स्टेशनों के नलों से गर्म पानी आ रहा:कानपुर में फ्रीजर खराब, मजबूरी में यात्रियों को महंगा लोकल पानी खरीदना पड़ रहा

    5 hours ago

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    कानपुर में 45°C तापमान के बीच रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर हीटवेव को लेकर अलर्ट जारी है। हालांकि, यात्रियों को राहत देने वाली व्यवस्थाएं बेहाल हैं। रेलवे और बस स्टेशनों पर लगे नलों से गर्म पानी निकल रहा है, जबकि कई वाटर कूलर बंद पड़े हैं। ऐसे में यात्रियों को 20 रुपए लीटर पानी खरीदना पड़ रहा है। कानपुर अनवरगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर लगा इकलौता वाटर कूलर खराब पड़ा है। वहीं, झकरकट्टी बस स्टैंड पर चल रहे दोनों वाटर कूलरों से भी ठंडे की जगह गर्म पानी निकल रहा है। यहां पर यात्री ठंडे पानी के लिए परेशान नजर आए। यात्रियों का कहना है कि इतनी तेज गर्मी में गर्म पानी पीना मुश्किल है, लेकिन विकल्प न होने के कारण उन्हें महंगे दामों पर बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है। इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए दैनिक भास्कर ने शहर के रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर जाकर पड़ताल की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सबसे पहले देखिए 3 तस्वीरें…. हीटवेव को लेकर सरकार ने जारी किया गाइडलाइन वहीं, यूपी सरकार ने हीटवेव से बचाव के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें लोगों को सलाह दी गई है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान बिना जरूरत घरों से बाहर न निकलें। साथ ही परिवहन निगम और रेलवे विभाग को पेयजल, छायादार इंतजाम और अन्य जरूरी सुविधाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। झकरकट्टी बस स्टैंड से 1200 बसें रोज निकलती हैं, पानी की सुविधा नहीं झकरकट्टी बस स्टैंड से रोजाना करीब 1200 बसों का संचालन होता है, लेकिन बस स्टैंड के अंदर केवल 450 बसें ही आ पाती हैं। ऐसे में यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। दोपहर में तापमान बढ़ने के साथ हालात और भी मुश्किल हो जाते हैं। पड़ताल में देखा कि रायबरेली जाने वाले यात्री ठंडा पानी लेने के लिए नल तक पहुंचे, लेकिन वहां पानी बहुत कम निकल रहा था और वह भी गर्म था। बस स्टैंड पर लगे दो वाटर कूलरों से भी ठंडे की जगह गर्म पानी निकल रहा था। यात्री विनोद वर्मा बस की खिड़की से सिर बाहर निकाले बैठे मिले। उन्होंने बताया- आज 45 डिग्री तापमान है, लेकिन बस स्टैंड पर खाने-पीने और ठंडे पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। हम लोग करीब एक घंटे से बस में बैठे हैं। अंदर हालत बहुत खराब है, लग रहा है तबीयत बिगड़ जाएगी। यहां कोई सुनने वाला नहीं है। बस में बहुत ज्यादा भीड़ है और यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ रहा है। अधिकारियों को यहां से अधिक बसें चलानी चाहिए। एक अन्य यात्री ने बताया- हमारा पेपर 12:30 बजे खत्म हुआ था, लेकिन बस मिलने में 3 घंटे से ज्यादा लग गए। बहुत मुश्किल से यह बस मिली है। अब खड़े होकर जाना पड़ेगा। यहां पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। सुरेश वर्मा ने कहा- यह बस स्टैंड बहुत खराब स्थिति में है। बस पूरी तरह भरी हुई है। ड्राइवर और कंडक्टर साफ कह देते हैं कि बस अपने समय से ही चलेगी। यहां यात्रियों के लिए कोई सुविधा नहीं है। अनवरगंज रेलवे स्टेशन पर नहीं है कोई वाटर कूलर अनवरगंज रेलवे स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे जोन का आखिरी स्टेशन है। मथुरा, कासगंज और फर्रुखाबाद रेल रूट से होकर जाने वाली कई ट्रेनें यहां से होकर गुजरती हैं या यहीं से संचालित होती हैं। इस स्टेशन पर प्लेटफॉर्म नंबर 1, 2 और 3 हैं। यहां से प्रतिदिन करीब 24 ट्रेनें गुजरती हैं या चलती हैं। प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ठंडे पानी की व्यवस्था के लिए कोई भी वाटर कूलर नहीं लगाया गया है। वहीं प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर केवल एक वाटर कूलर लगा हुआ है, लेकिन उसका फ्रीजर काम नहीं कर रहा है। ऐसे में यात्रियों को गर्मी के बीच ठंडा पानी नहीं मिल पा रहा है। अनवरगंज रेलवे स्टेशन पर करीब 12 से अधिक पीने के पानी के नल लगाए गए हैं, लेकिन इन सभी नलों से गर्म पानी निकल रहा है। इस कारण यात्री मजबूरी में स्टेशन पर मौजूद वेंडरों से पानी खरीदने को मजबूर हैं। यात्री चंद्रपाल ने बताया- यहां के नलों से बहुत खराब और गर्म पानी आ रहा है। जो फ्रीजर लगा है, वह भी खराब पड़ा हुआ है। गर्मी को लेकर रेलवे की ओर से कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। 20 रुपए बोतल पानी बिक रही दैनिक भास्कर की पड़ताल के दौरान एक वेंडर से 20 रुपए देकर पानी की बोतल खरीदी गई। न तो उसका बिल दिया गया और न ही रेल नीर की बोतल उपलब्ध कराई गई। स्टेशन पर बने 6 से अधिक स्टॉलों पर भी रेल नीर उपलब्ध नहीं मिला। स्थानीय लोगों और यात्रियों का आरोप है कि रेलवे और वेंडरों की मिलीभगत से ठंडे पानी और रेल नीर की सप्लाई प्रभावित की जा रही है, ताकि स्थानीय ब्रांड का पानी अधिक दामों में बिकता रहे। जबकि रेल नीर की एक लीटर पानी की बोतल की कीमत 14 रुपये है। इससे यात्रियों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
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