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    नटराजन के नामांकन रद्द पर सुप्रीम कोर्ट में कल सुनवाई:चुनाव आयोग बोला- हमें याचिका की कॉपी नहीं मिली, कांग्रेस की मांग- फैसले तक रिजल्ट रुके

    10 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा सीट के लिए मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के खिलाफ कांग्रेस की याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक के लिए टाल दी है। कोर्ट ने गुरुवार को कांग्रेस और चुनाव आयोग की दलीलें सुनने के बाद ऐसा कहा। इससे पहले सुनवाई के दौरान कांग्रेस के वकील अभिषेक मनु सिंघवी बोले- मामले पर आज ही सुनवाई की जरूरत है क्योंकि नामांकन वापसी के लिए दोपहर 3 बजे तक का ही समय है। इस पर चुनाव आयोग ने कहा- हमें इस याचिका की कॉपी ही नहीं दी गई है। इसे पढ़ने के लिए समय की जरूरत है। इसके जवाब में सिंघवी बोले- सुनवाई भले ही कल हो जाए लेकिन तब तक रिजल्ट घोषित न किया जाए। इसके बाद अदालत ने कहा- ऐसे मामलों में कानून पहले से तय है। याचिका को कल के लिए सूचीबद्ध किया जाता है। कांग्रेस ने ये याचिका बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात 1 बजकर 48 मिनट पर डिजिटल माध्यम से दायर की थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने गैर-कानूनी, मनमाने और पक्षपातपूर्ण तरीके से फैसला किया है, इसे रद्द किया जाए। सिंघार बोले- न्याय में देरी क्यों? सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टलने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- कांग्रेस को आज सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। चुनाव आयुक्त चाहते तो कल इस बारे में निर्णय दे सकते थे। खारिज करना या स्वीकार करना, यह विशेष अधिकार चुनाव आयोग को है। हरियाणा में चुनाव आयोग ने हस्तक्षेप किया था, गुजरात में हस्तक्षेप किया था तो एमपी में क्यों नहीं किया? सिंघार ने भोपाल में मीडिया से कहा- झारखंड में बीजेपी कैंडिडेट को आप (चुनाव आयोग) वैलिड कर सकते हैं तो मीनाक्षी नटराजन के मामले में फैसला क्यों नहीं लिया? इससे स्पष्ट है कि चुनाव आयोग भाजपा के रबर स्टैंप के रूप में काम कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन पर चुनाव आयोग ने कोई विचार नहीं किया। उनके रिटर्निंग ऑफिसर ने स्पष्ट रूप से नियमों की धज्जियां उड़ाईं। सुप्रीम कोर्ट ने कल का समय दिया है। मैं समझता हूं कि इसमें न्याय होगा लेकिन न्याय में इतनी देरी क्यों हो रही है? सुप्रीम कोर्ट इस पर निर्णय आज करता तो बेहतर होता क्योंकि आज नामांकन वापसी की लास्ट डेट है। राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे कांग्रेस विधायक दरअसल, मामले पर चुनाव आयोग की चुप्पी ने कांग्रेस की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सूत्रों के अनुसार, आयोग इस मामले में कानूनी राय लेने के बाद फैसला करेगा। आज गुरुवार को दोपहर 3 बजे तक का समय सबसे अहम माना जा रहा है, क्योंकि यही नाम वापसी की अंतिम समय-सीमा है। यदि तब तक आयोग कांग्रेस के पक्ष में कोई फैसला नहीं करता या खामोश ही रहता है तो भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्वाचन तय हो जाएगा। बाकी दो सीटों पर भाजपा उम्मीदवार तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल का निर्वाचन निर्विरोध तय है। ऐसे में प्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटें भाजपा बिना लड़े जीत जाएगी। उधर, कांग्रेस विधायक आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से भी मुलाकात करेंगे। आज ही दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में भी सीनियर नेताओं की एक बैठक होगी। अब आगे क्या हो सकता है… 1. आयोग नामांकन बहाल करता है तो चुनाव फिर मुकाबले में बदल जाएगा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत के अनुसार, यदि चुनाव आयोग यह मानता है कि रिटर्निंग ऑफिसर से त्रुटि हुई है तो वह स्पष्ट आदेश जारी कर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन वैध घोषित कर सकता है। ऐसे में फिर से वोटिंग होगी। 2. आयोग राहत नहीं देता तो भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन होगा यदि आयोग हस्तक्षेप नहीं करता या रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को बरकरार रखता है, तो कांग्रेस उम्मीदवार चुनाव से बाहर मानी जाएंगी। ऐसे में भाजपा के तीनों उम्मीदवार निर्विरोध जीतेंगे। 3. आज दोपहर 3 बजे का समय क्यों महत्वपूर्ण? 11 जून दोपहर 3 बजे तक नाम वापसी का समय निर्धारित है। यदि आयोग को मीनाक्षी के पक्ष में कोई फैसला देना है तो उसे इसी समय तक देना होगा। इसलिए सबकी नजर इस पर है कि फैसला कब आता है। 4. कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट गई तो क्या होगा? आयोग से राहत नहीं मिलने पर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। वहां फैसले की न्यायिक समीक्षा मांग सकती है और अंतरिम राहत की भी मांग कर सकती है। हालांकि, केवल याचिका दाखिल होने से चुनाव प्रक्रिया नहीं रुकेगी। यह सब सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा। 5. राष्ट्रपति के पास जाने से कांग्रेस को क्या मिलेगा? राष्ट्रपति से मिलकर कांग्रेस गलत तरीके से नामांकन निरस्त करने का मुद्दा उठा सकती है। राष्ट्रपति मामले का संज्ञान लेकर चुनाव आयोग या संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से जानकारी मांग सकते हैं। हालांकि, राष्ट्रपति सीधे चुनाव आयोग, रिटर्निंग ऑफिसर या चुनाव प्रक्रिया के किसी फैसले को रद्द नहीं कर सकते। इस मुलाकात का महत्व संवैधानिक और राजनीतिक संदेश के रूप में अधिक माना जा रहा है। कोर्ट में मामला लंबित होने की शिकायत हुई थी राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने खारिज कर दिया था। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और पार्टी नेताओं ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी ने अपने चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक कानूनी मामले की जानकारी छिपाई है। कांग्रेस की दलील- यह केस नहीं, सिर्फ नोटिस है चुनाव आयोग के सामने कांग्रेस की ओर से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज ही नहीं है। सिंघवी के मुताबिक, तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि संज्ञान क्यों न लिया जाए? कांग्रेस का कहना है कि जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान लेकर आरोप तय नहीं करती, तब तक उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए इसे हलफनामे में लिखना अनिवार्य नहीं था। कांग्रेस ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैर-कानूनी और सीटों की चोरी करार दिया है। दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में आज बैठक इस बड़े राजनीतिक झटके और मौजूदा सियासी हालात पर चर्चा करने के लिए दिल्ली में कांग्रेस हेडक्वार्टर में आज बैठक बुलाई गई है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रभारी शामिल होंगे। इसमें चर्चा हो सकती है कि मीनाक्षी नटराजन मामले को सुप्रीम कोर्ट में किस तरह से पेश किया जाए। मामले के मिनट टु मिनट अपडेट के लिए नीचे दिए ब्लॉग से जरूर गुजर जाइए…
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