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    भारत विरोधी यूरोप का एक्शन, तभी रूस ने बंपर डिस्काउंट देकर पलट दी पूरी बाजी

    3 hours from now

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    भारत के खिलाफ कारवाई के बीच जो खबर रूस से आई है वो काफी उत्साहित करने वाली है। यूरोप ने कदम उठाया और दूसरी तरफ रूस ने भी एक कदम उठाया। यूरोप ने कुछ फैसले किए। फैसले यह कि रूस की सेना के साथ जो लोग डायरेक्टली काम कर रहे हैं, जो कंपनियां काम कर रही हैं, उसके खिलाफ कुछ कदम उठाए गए। और इधर रूस ने क्या किया? तेल पर डिस्काउंट देने का खेल शुरू कर दिया और भारत के साथ उसका सप्लाई चेन लगातार लगातार लगातार बढ़ता चला जा रहा है। ईयू ने भारत, चीन और दुनिया के कई ऐसे देश उनकी 50 कंपनियों को झटका दिया। इन्होंने यूक्रेन पर हमले के चलते रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा की। इन प्रतिबंधों ने अचानक इस इन आधा सैकड़ा कंपनियों के सामने संकट खड़ा किया। इसे भी पढ़ें: जिनपिंग को देखते ही उछल पड़े किम जोंग, प्योंगयांग में वार्ताईयू की ओर से ऐलान हुआ कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल का उपाय लागू करेगा जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती है। यूरोपीय यूनियन के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथी किरगिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईयू ने यह फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए किया है। लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं तमाम देश प्रभावित होंगे। इस लिस्ट में ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।ईयू की ओर से ऐलान हुआ कि वह भारत और अन्य देशों की उन 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल का उपाय लागू करेगा जो रूस की सेना के साथ सीधे कारोबार करती है। यूरोपीय यूनियन के इस ऐलान का असर भारत और चीन के साथी किरगिस्तान, कजाकिस्तान, संयुक्त अरब अमीरात में स्थित कंपनियों पर पड़ेगा और इन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जाएंगे। ईयू ने यह फैसला रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने के लिए किया है। लेकिन इससे सिर्फ रूस ही नहीं तमाम देश प्रभावित होंगे। इस लिस्ट में ड्रोन निर्माण से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। जिन पर निर्यात प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। प्रस्तावित 21वें प्रतिबंध पैकेज की घोषणा करते हुए यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति के उच्च प्रतिनिधि काजा क्लास ने कहा कि यह उपाय यूक्रेन में मॉस्को के सैन्य अभियानों को वित्त पोषित करने और बनाए रखने की क्षमता पर लगाम लगाने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम धीरे-धीरे रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था की नींव को ध्वस्त करते जा रहे हैं। इसे भी पढ़ें: रूसी मिलिट्री बेस का सर्वे करने पहुंचा चीन, भारत को झटका!अब ब्रूसेल्स 2 साल से अधिक समय में रूस पर प्रतिबंधों की सबसे बड़ी लिस्ट तैयार कर रहा है। वहीं ईयू के प्रस्तावित पैकेज में उन बैंकों, हथियार निर्माताओं, तेल व्यापारियों, रिफाइनरियों, क्रिप्टो ऑपरेटर्स को टारगेट किया गया है जो तीसरे देशों में स्थित हैं। उन पर रूस की मौजूदा प्रतिबंधों से बचने की मदद करने का आरोप है। क्लास के मुताबिक करीब 90 बैंकों की संपत्ति जब्त की जा सकती है। जबकि रूस और अन्य देशों के 30 से अधिक बैंकों के साथ लेनदेन पर और प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इसके अलावा 11 क्रिप्टो करेंसी प्लेटफार्म पर भी ट्रांजैक्शन बैन लगाने की तैयारी है। इस बीच उन्होंने यह भी कहा है कि यूरोपीय संघ रूसी एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाले राजस्व को कम करने के लिए रूसी तेल की कीमत सीमा पर अस्थाई रोक लगाने की कोशिश कर रहा है। कजाक क्लास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया और इन प्रतिबंधों से जुड़ी जानकारी शेयर की। उन्होंने कहा कि हम रूस के सैन्य औद्योगिक तंत्र को समर्थन देने वाली तमाम कंपनियों को भी निशाना बना रहे हैं। नई सूची में ड्रोन निर्माण क्षेत्र से जुड़ी 30 से अधिक संस्थाओं का शामिल किया गया है। इसे भी पढ़ें: भारत ने पहली बार तैनात किए 12 परमाणु बम, खुलासे से हिली दुनिया!इसके साथ ही 50 कंपनियों पर नए एक्सपोर्ट कंट्रोल उपाय लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम रूस की उत्पादन क्षमता को और बाधित करने के लिए अतिरिक्त निर्यात प्रतिबंध भी लगाएंगे। इसमें निकेल पाउडर, धातुएं, हाई परफॉर्मेंस मिश्र धातुएं शामिल हैं। इसके अलावा कुछ नई वस्तुओं के आयात पर भी प्रतिबंध लगाया जाएगा जिसमें ऑटो पार्ट्स, कई कीमती धातुओं के अयस्क और रसायन शामिल होंगे। एक तरफ यह है रशिया ने के खिलाफ कदम उठाया ईयू ने और एक के बाद एक उसने इस तरीके के प्रतिबंधों की घोषणा की। नए पैकेज की घोषणा की। इसके चपेट में भारत की कंपनियों पर असर पड़ेगा। चीन की कंपनियों पर असर पड़ेगा। कई और देशों की कंपनियों पर असर पड़ेगा जो बताया हमने आपको।  रूस अपनी फॉरवर्ड प्लानिंग के साथ आगे बढ़ गया। कच्चा तेल मार्च से ही काफी महंगा अपना क्रूड ऑयल बेच रहा था वो क्योंकि ईरान के साथ जो युद्ध शुरू हुआ सबको मालूम है कि मजबूरी में लोग आएंगे तो उसने महल महंगा तेल बेचना शुरू कर दिया लेकिन अब उसमें बंपर डिस्काउंट दे दिया है उसने ये खेल है फॉरवर्ड प्लानिंग कि अच्छा उधर से चोट पहुंच रही है तो इधर से कंपनसेशन ले लो। ऐसे रूस के प्रमुख कच्चे तेल ग्रेड यूराल्स का दाम मार्च से भारत और चीन जैसे उसके सबसे बड़े खरीदार देशों में ब्रांड क्रूड के मुकाबले महंगा बिक रहा था। इसकी वजह मध्य पूर्व में किस तरीके से संघर्ष हो रहा था। वैश्विक तेल आपूर्ति में आई रुकावट मानी जा रही थी।
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