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    निजी स्कूलों की मनमानी फीस पर कार्रवाई की मांग:बलिया में छात्र नेताओं ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

    2 hours ago

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    बलिया में निजी विद्यालयों द्वारा मनमानी शुल्क वसूली, ड्रेस व पुस्तकों के बार-बार परिवर्तन और परिवहन शुल्क में अनियमितताओं के विरोध में सोमवार को छात्र नेताओं ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन उनके प्रतिनिधि को सौंपा। छात्र नेता नागेन्द्र बहादुर सिंह "झुन्नू" ने आरोप लगाया कि जनपद के निजी विद्यालय अभिभावकों और छात्रों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन मनमाने तरीके से फीस बढ़ा रहा है, हर साल ड्रेस और किताबें बदल रहा है और परिवहन शुल्क में भी अनियमितता बरत रहा है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में न्यायालयों और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन अनिवार्य है। सर्वोच्च न्यायालय के ‘मॉडर्न स्कूल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2004)’ फैसले के अनुसार, निजी विद्यालय केवल वास्तविक खर्च और उचित अधिशेष के आधार पर ही फीस निर्धारित कर सकते हैं। हर साल री-एडमिशन फीस लेना अवैध है और ‘नो प्रॉफिटियरिंग’ सिद्धांत के खिलाफ है। इसके अलावा ‘इस्लामिक एकेडमी ऑफ एजुकेशन बनाम स्टेट ऑफ कर्नाटक (2003)’ और ‘टी.एम.ए. पाई फाउंडेशन बनाम स्टेट ऑफ कर्नाटक (2002)’ के फैसलों में भी फीस निर्धारण में पारदर्शिता और गैर-शोषणकारी नीति पर जोर दिया गया है। वहीं, ‘उत्तर प्रदेश सेल्फ फाइनेंस्ड इंडिपेंडेंट स्कूल (फी रेगुलेशन) एक्ट 2018’ के तहत बिना उचित कारण के फीस में अत्यधिक वृद्धि नहीं की जा सकती और इसके लिए अभिभावक समिति की सहमति आवश्यक होती है। छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार किसी भी विद्यालय द्वारा छात्रों को एक निश्चित दुकान से किताब या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। साथ ही, बार-बार ड्रेस बदलना भी अनुचित है। शासन के निर्देशों के अनुसार एनसीईआरटी या मानक पुस्तकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और परिवहन शुल्क दूरी (किलोमीटर) के आधार पर तय होना चाहिए। छात्र नेताओं ने मांग की कि कक्षा 1 से 8 तक के निजी (स्ववित्तपोषित) विद्यालयों द्वारा हर वर्ष वसूली जा रही री-एडमिशन फीस पर रोक लगाई जाए। साथ ही सभी स्कूलों की शुल्क संरचना की जांच कर अनावश्यक बढ़ोतरी पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके अलावा ड्रेस और पुस्तकों में बार-बार बदलाव पर नियंत्रण (कम से कम 3 से 5 वर्षों तक स्थिर रखने) तथा परिवहन शुल्क को दूरी के आधार पर तय करने की भी मांग की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो छात्र आंदोलन तेज किया जाएगा।
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