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    MP High Court ने नए राज्यपाल की नियुक्ति वाली याचिका की खारिज

    2 hours ago

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    मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें राज्यपाल का पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद नए राज्यपाल की नियुक्ति का अनुरोध किया गया था। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 156 (3) में राज्यपाल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भी उत्तराधिकारी के कार्यभार ग्रहण करने तक पद पर बने रहने का प्रावधान है। पीठ ने कहा कि इसलिए राज्यपाल के पद के लिए कोई संवैधानिक रिक्ति नहीं है।जबलपुर जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. एम. ए. खान की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया था कि मौजूदा राज्यपाल का पांच साल का कार्यकाल इस साल सात जुलाई को समाप्त हो गया था। इसमें मांग की गई थी कि कार्यकाल खत्म होने के मद्देनजर केंद्र को मध्यप्रदेश में नया राज्यपाल नियुक्त करना चाहिए। याचिका में कहा गया था कि राज्यपाल एक महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है और वह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति और राज्य सरकार द्वारा पारित आदेशों के लिए एक अपीलीय प्राधिकारी भी हैं।खान ने अपनी याचिका में यह भी अनुरोध किया कि नए राज्यपाल की नियुक्ति तक उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को राज्यपाल के कार्यालय का प्रभार दिया जाए। पीठ ने कृष्णा बल्लभ सहाय बनाम जांच आयोग और अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि अनुच्छेद 156 (3) राज्यपाल को तब तक पद पर बने रहने की अनुमति देता है जब तक कि उत्तराधिकारी कार्यभार ग्रहण नहीं कर लेता। इसमें कहा गया है कि संविधान में ऐसी स्थिति की परिकल्पना नहीं की गई है जिसमें राज्यपाल का पद खाली रहे।पीठ ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय नियम, 2008 के अध्याय 10, नियम 27 के तहत आवश्यक एक जन-उत्साही नागरिक के रूप में अपनी साख का खुलासा नहीं किया था। पीठ ने कहा कि राज्यपाल की नियुक्ति में देरी से यह निष्कर्ष निकल सकता है कि संविधान के अनुसार कार्य करने में केंद्र विफल रहा है। हालांकि उसने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इसमें दम नहीं है।सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन, डिप्टी सॉलिसिटर जनरल सुयश मोहन गुरु और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी पेश हुए।
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