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    मथुरा में 16 मौत के बाद नहीं चल रही नावें:यमुना किनारे बेरीकेडिंग की, बोर्ड पर लिखा- आगे गहरा पानी, कृपया नदी में अंदर न जाएं

    4 hours ago

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    वृंदावन में हादसे के 12 दिन गुजर गए हैं। 16 पर्यटकों की मौत के बाद केशीघाट पर सन्नाटा है। यमुना में कोई नाव नहीं चल रही है। नगर निगम ने कई जगहों पर सुरक्षा-चेतावनी बोर्ड लगा दिए हैं। नदी के किनारों पर लकड़ी के खम्भे गाढ़कर बेरीकेडिंग की गई है, ताकि पर्यटक नदी किनारे आते ही अलर्ट हो जाएं। साथ ही नगर निगम ने नाविकों को लाइव जैकेट बांटी हैं। लेकिन नदी में इस समय कोई नाव और स्टीमर नहीं चल रही है। इस पर नाविकों का कहना है कि नगर निगम बेताशा रजिस्ट्रेशन फीस ले रहा है। गाइडलाइन भी हमारे अनुरूप नहीं है। हम नाव या स्टीमर चलाकर क्या करेंगे, इससे हमें क्या मिलेगा और क्या बचेगा। दरअसल, 10 अप्रैल को यमुना में 38 पर्यटकों से भरा स्टीमर पांटून पुल से टकराने के बाद पलट गया, इस हादसे में 16 पर्यटकों की मौत हो गई थी। इस हादसे की सबसे बड़ी वजह सुरक्षा मानकों की अनदेखी थी। ऐसे में हादसे के 12 दिन बाद अब क्या बदलाव आए हैं? सुरक्षा मानकों का प्रयोग अब हो रहा है या नहीं। क्या पर्यटक और नाविक लाइफ जैकेट का प्रयोग कर रहे हैं। यह हकीकत जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम उसी केशीघाट पर पहुंची, जहां हादसा हुआ था। सबसे पहले इस समय के केशीघाट की तस्वीरें… यमुना में बल्लियों से की गई बेरीकेडिंग केशीघाट से पांटून पुल की तरफ एक-दो जगहों पर बोर्ड लगे नजर आए। जिस पर लिखा है- आगे गहरा पानी है, कृपया यमुना नदी में अधिक अंदर न जाएं। इसके साथ एक जगह करीब 25 से 30 मीटर में यमुना में बल्लियों से की गई बेरीकेडिंग भी नजर आई। जहां कुछ श्रद्धालु स्नान कर रहे थे। यहां से आगे खंभे पर एक और बोर्ड लगा है, जिस पर नाविकों के लिए जारी की गई गाइडलाइन लिखी हैं। जिसमें 17 पॉइंट लिखे गए हैं। 17 पॉइंट में ये खास बातें जहां 450 स्टीमर चलती थी, अब एक भी नहीं चल रही केशीघाट पर हादसे के बाद से सन्नाटा पसरा हुआ है। पहले जहां इस घाट पर 450 से 500 स्टीमर और बोट चलती थीं। वहां एक भी स्टीमर और नाव नहीं चल रही है। यह घाट कभी पर्यटकों से भरा रहता था, वहां अब कुछ ही पर्यटक ही नजर आ रहे हैं। इनमें कुछ घाट पर घूम रहे हैं, तो वहीं इक्का-दुक्का यात्री यमुना में खड़ी नावों में सिर्फ फोटो खिंचाने के लिए बैठे दिखाई दे रहे हैं। यमुना में जहां तक नजर गई, वहां तक सिर्फ खड़ी बोटें और स्टीमर ही नजर आए। रजिट्रेशन की वजह से नहीं चल रहीं स्टीमर यमुना में नावों का संचालन बंद करने के सवाल पर नाविकों ने बताया- हादसे के बाद कुछ दिन तक तो मानवीय संवेदनाओं को देखते हुए खुद ही हम लोगों ने नाव नहीं चलाई थी। लेकिन अब नगर निगम के नए नियमों की वजह से नहीं चला रहे हैं। केशीघाट पर नाविक घनश्याम ने बताया कि मेरे पिता, फिर मेरे बाबा ने भी लाइसेंस बनाया था। जिसके लिए नगर पालिका 10 रुपए 6 महीने की फीस लेता था। 2018-19 में नगर निगम ने इसे बढ़ाकर 25 रुपए कर दिया था। लेकिन अब वो लोग एक साथ 6 महीने के 5 हजार रुपए छोटे स्टीमर के मांग रहे हैं। बड़े स्टीमर की रजिस्ट्रेशन फीस 10 हजार रुपए ले रहे हैं और चक्कू नावों की 1000 रुपए फीस ले रहे हैं। यह कहां तक उचित है। नगर निगम ने खुद 2018-19 के बाद किसी तरह के लाइसेंस नहीं बनाए हैं। निगम कहता था कि उनके बायलॉज में नहीं है, तो अब हम किससे क्या बात करें। नगर निगम को इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना है… नाविकों का कहना है कि जब तक नगर निगम सारी व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं कर देगा, तब तक यही हाल रहेगा। सबसे पहला तो रजिस्ट्रेशन है ही, फीस इतना ज्यादा है कि नाव चलाना ही मुश्किल है। इसके बाद जब नावें चलेंगी, तो लाइव जैकेट, चाइनीज बोर्ड और यमुना में बैरीकेडिंग समेत तमाम व्यवस्थाओं को सुचारू कराना है। जब नावें या स्टीमर चल ही नहीं रहे हैं तो पुलिस भी तैनात नहीं है। यात्री दूर से परिसर को घूमकर चले जाते हैं। नाव की क्षमता 20-25 की, 15 तो बैठाने दीजिए नाविकों ने बताया नगर निगम ने जो गाइड लाइन जारी की है उसको बनाने से पहले एक बार नाविकों से भी चर्चा करनी चाहिए थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गाइड लाइन में कहा है कि वही नाविक नाव चलाएगा, जिसके नाम लाइसेंस है। इस पर घनश्याम कहते हैं कि अगर हम कहीं किसी काम से बाहर चले जाएं और मेरे परिवार का सदस्य नाव चलाना जानता है तो क्या वह नाव नहीं चलाएगा। दूसरी बात ये लोग क्षमता को लेकर कह रहे हैं कि सिर्फ 10 सवारी बिठाएंगे। हमारी नावों की क्षमता 20 से 25 है तो कम से कम 15 सवारी तो बैठने दीजिए। ऐसा करेंगे तो हमारी कमाई ही क्या निकलेगी। कुछ लोगों को मिली लाइफ जैकेट हादसे के समय सबसे बड़ा मुद्दा उठा था लाइफ जैकेट का। इस पर जब हमने नाविकों से पूछा कि क्या आप लोगों को लाइफ जैकेट मिली है? तो उन्होंने कहा- कुछ लोगों को मिली है, सभी को नहीं दी गई। प्रशासन ने मथुरा, वृंदावन और गोकुल में करीब एक हफ्ते पहले 425 लाइफ़ जैकेट वितरित कराई थी। हालांकि नावों का संचालन न होने से अभी वितरण रुका हुआ है। नगर निगम भरा रहा फॉर्म नाविकों के लिए रजिस्ट्रेशन के फॉर्म वितरित किए जा रहे हैं। 3 पेज के इस फॉर्म पर सबसे ऊपर लिखा है नगर निगम मथुरा वृंदावन। उसके नीचे लाइन में लिखा था नाव पंजीकरण हेतु आवेदन पत्र। यह फॉर्म नाविक को खुद भरना है। निगम कर्मचारी ने बताया कि वह फॉर्म वितरित कर रहे हैं, यह जमा शुल्क के साथ किए जाएंगे।
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