Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    मैनपुरी में एक्सप्रेस-वे भूमि अधिग्रहण अटका:डीएम ने जमीन पर बैठकर सुनी किसानों की बात

    1 hour ago

    2

    0

    मैनपुरी में लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का मामला सर्किल रेट पर अटका हुआ है। जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने कुर्सी छोड़कर जमीन पर बैठकर किसानों से सीधा संवाद किया। इस पहल का उद्देश्य प्रशासन और ग्रामीणों के बीच की दूरी को कम करना था। यह संवाद ग्राम मुड़ई के प्राथमिक विद्यालय में आयोजित चौपाल में हुआ। जिलाधिकारी ने मुड़ई, पटना टिलुआ और दुर्जनपुर गांवों के किसानों की समस्याएं सुनीं। इन तीनों गांवों में लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए लगभग 42 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, लेकिन किसान अभी बैनामा करने को तैयार नहीं हैं। किसानों ने स्पष्ट किया कि उन्हें एक्सप्रेस-वे निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है। उनकी मुख्य शिकायत यह है कि उनकी जमीन का सर्किल रेट पड़ोसी गांवों की तुलना में कम आंका जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पटना टिलुआ के पास टोडरपुर में सर्किल रेट 40 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि उनके गांव में यह 30 लाख रुपये है। खतौनी किसानों को उपलब्ध कराई जाए इसी प्रकार, मुड़ई के पास हुसैनपुर में 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर का रेट है, जबकि मुड़ई में यह केवल 30 लाख रुपये है। दुर्जनपुर में भी ऐसी ही स्थिति है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि यदि सर्किल रेट बढ़ाकर पड़ोसी गांवों के बराबर कर दिया जाए, तो वे तुरंत अपनी जमीन का बैनामा करने को तैयार हैं। उनकी मुख्य मांग उचित मूल्य प्राप्त करना है। जिलाधिकारी ने मौके पर ही किसानों को आश्वासन दिया कि वे यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) के अधिकारियों से बात कर सर्किल रेट के इस अंतर को दूर करने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि किसी भी किसान को नुकसान न हो और उसे उसकी जमीन का उचित मूल्य मिले। चौपाल के दौरान खतौनी में गलत नाम दर्ज होने का एक अन्य मुद्दा भी सामने आया। इस पर जिलाधिकारी ने लेखपाल को निर्देश दिए कि गांव में कैंप लगाकर दो दिन के भीतर सुधार किया जाए और संशोधित खतौनी किसानों को उपलब्ध कराई जाए। इस चौपाल में एसडीएम नीरज कुमार द्विवेदी, ग्राम प्रधान नीता गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
    Click here to Read more
    Prev Article
    सोहेल अख्तर अंसारी बने प्रदेश अल्पसंख्यक कांग्रेस के चेयरमैन:2017 में कानपुर कैंट विधानसभा से रहें हैं विधायाक, बोले- जो जिम्मेदारी मिली है उसे निभाऊंगा
    Next Article
    "सबसे ज्यादा हिंदू ही महंगाई झेलेंगे":संभल में कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने पर बोले सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment