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    लखनऊ में मदरसों की जांच पर आपत्ति:पाठ्यक्रम में बदलाव पर चर्चा, टीचर्स बोले-कैशलेस इलाज का फायदा मिले

    4 hours ago

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    लखनऊ में मदरसा टीचर्स उत्तर प्रदेश की कार्यकारिणी की बैठक हुई। बैठक में मदरसा शिक्षकों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन के जनरल सेक्रेटरी मौलाना दीवान साहब जमा समेत तमाम पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। मौलाना दीवान साहब जमा ने कहा- प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के लिए कैशलेस इलाज की व्यवस्था लागू की है, लेकिन इसमें मदरसा शिक्षकों को शामिल नहीं किया गया है, मदरसे में छात्रों की घटती संख्या पर भी चिंता जताई। पदाधिकारियों ने मांग किया कि सरकार कैशलेश इलाज की सुविधा का लाभ मदरसा शिक्षकों को भी दे। जब संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को इस योजना में शामिल किया गया है, तो मदरसा शिक्षकों को बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है। बैठक में मदरसा पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सिलेबस में परिवर्तन जरूरी बताया गया। इसके लिए जिला स्तर पर समितियां गठित की जाएंगी और राज्य स्तर पर भी एक कमेटी बनाई जाएगी। ‘मदरसों की जांच से परेशान’ मौलाना दीवान ने मदरसों में लगातार हो रही जांच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अनावश्यक जांच के कारण शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। मदरसा संचालकों को प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। जांच के मामले को लेकर हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जहां कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए इस प्रकार कि जांचों पर रोक लगाने की बात कही है। कामिल और फाजिल डिग्री को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। कहा कि अदालत ने इन डिग्रियों को असंवैधानिक नहीं बताया, बल्कि मदरसा बोर्ड के अधिकार क्षेत्र पर टिप्पणी की थी। ऐसे में इन डिग्रियों के आधार पर नियुक्त शिक्षकों की जांच कर उनकी सैलरी रोकना उचित नहीं है। ‘मदरसों में योग्य शिक्षक जरूरी’ इसके अलावा, मदरसा बोर्ड द्वारा कई मदरसों की मान्यता निलंबित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई। पदाधिकारियों ने कहा कि निलंबन के बजाय अन्य वैकल्पिक उपाय अपनाए जा सकते थे। यह कदम छात्रों के भविष्य और शिक्षकों के वेतन पर गलत प्रभाव डालता है। सरकार अगर पाठ्यक्रम में बदलाव करना चाहती है तो संगठन को इससे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए योग्य शिक्षकों की नियुक्ति भी सुनिश्चित करनी होगी।
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