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    क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख बोले- कर्म ही धर्म का आधार:RSS के कुटुम्ब प्रबोधन कार्यक्रम में परिवार को राष्ट्र की रीढ़ बताया

    1 hour ago

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    गाजीपुर के महुआबाग स्थित एक मैरेज हॉल में शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कुटुम्ब प्रबोधन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में परिवार और संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया गया। क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख मिथिलेश ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा कि "हमारे यहां पूजा ही धर्म नहीं है, बल्कि कर्म ही धर्म का आधार है।" कार्यक्रम का शुभारंभ प्रांत संयोजक सहदेव, जिला संघचालक जयप्रकाश और नगर संघचालक दीनदयाल ने भारत माता, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और सदाशिवराव गोलवलकर के चित्रों पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन करके किया। मिथिलेश ने अपने संबोधन में परिवार को राष्ट्र की रीढ़ बताया और कहा कि माता ही बच्चों की प्रथम गुरु होती है तथा घर उनकी पहली पाठशाला है। मिथिलेश ने आगे कहा कि भारत की पहचान उसकी कुटुम्ब व्यवस्था से है, जिससे श्रेष्ठ परिवार से ही श्रेष्ठ समाज और राष्ट्र का निर्माण होता है। उन्होंने ध्रुव, प्रह्लाद, भगत सिंह, राजगुरु, चंद्रशेखर आजाद और बिरसा मुंडा जैसे महान व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए बताया कि उनके पीछे उनके परिवार के संस्कारों की अहम भूमिका रही है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए कहा कि वह बड़ा पुजारी था, लेकिन अपने कर्मों के कारण धर्मात्मा नहीं माना गया। मिथिलेश ने चिंता व्यक्त की कि आज परिवार छोटे होते जा रहे हैं, जिससे सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो रहा है। उन्होंने भारतीय परंपरा का उल्लेख किया, जहां पूरे समाज को परिवार मानने की भावना रही है और त्योहारों पर सभी वर्गों के लोग एक साथ जुड़ते थे। कार्यक्रम के अंत में प्रांत संयोजक सहदेव ने परिवार में सौहार्द बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार कुटुम्ब व्यवस्था ही है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी समाज को एक सूत्र में बांधे रखती है। सहदेव ने संस्कारों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि आने वाली पीढ़ी उनसे सीख सके। कार्यक्रम का समापन भारत माता की आरती के साथ हुआ। इस अवसर पर सह विभाग प्रचारक प्रेमप्रकाश, जिला प्रचारक प्रभात, नगर प्रचारक विक्रम सहित बड़ी संख्या में माताएं, बहनें और स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
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