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    कृषि विश्वविद्यालय देसी नस्लों का जेनेटिक परीक्षण करेगा:जौनपुरी बकरी, अवधी भेड़ से शुरुआत; राष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य

    2 hours ago

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    आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने देसी पशु नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। विश्वविद्यालय की पशुपालन टीम ने पहले चरण में जौनपुरी बकरी और अवधी भेड़ को चिन्हित कर उनके जेनेटिक अध्ययन पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालय के जेनेटिक विभाग के प्रोफेसर जसवंत सिंह के अनुसार, देसी नस्लों की पहचान और संरक्षण के लिए एक नेटवर्क परियोजना पर कार्य चल रहा है। इस परियोजना के तहत इन नस्लों का जेनेटिक परीक्षण कर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जाएगी। प्रोफेसर सिंह ने बताया कि जौनपुरी बकरी के जेनेटिक तत्वों का अध्ययन किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह आकलन करना है कि जमुनापारी नस्ल के साथ क्रॉस ब्रीडिंग से कितना लाभ मिल सकता है। इस पूरी रणनीति का लक्ष्य देसी नस्लों को सुरक्षित रखते हुए पशुपालकों की आय बढ़ाना है। इस पहल के तहत संबंधित क्षेत्रों की जलवायु, चारा, खानपान और पशुओं की उत्पादन क्षमता का भी विस्तृत अध्ययन किया जा रहा है। पहले चरण में बकरी और भेड़ पर शोध केंद्रित है, जबकि दूसरे चरण में देसी गायों की विभिन्न प्रजातियों पर अनुसंधान किया जाएगा। सरकार की योजना देसी नस्लों का संरक्षण करते हुए उन्हें उन्नत नस्लों के साथ वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन कराना है। इससे अधिक उपयोगी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल मजबूत नस्लें विकसित हो सकेंगी, जो पशुपालकों के लिए लाभकारी होंगी। पूर्वांचल क्षेत्र में बड़ी संख्या में देसी पशु मौजूद हैं, लेकिन संरक्षण के अभाव में उनकी संख्या तेजी से घट रही है। पूर्व में विदेशी नस्लों के प्रयोग से तैयार मिश्रित नस्लें स्थानीय जलवायु में टिकाऊ साबित नहीं हो पाई थीं, जिससे पशुपालकों को काफी नुकसान हुआ था। अब नई रणनीति के तहत विश्वविद्यालयों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे देसी नस्लों का पंजीकरण, संरक्षण और सुधार करें। इसका अंतिम लक्ष्य इन नस्लों को राष्ट्रीय पहचान दिलाकर पशुपालन क्षेत्र को मजबूत करना है।
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