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    ईरान में बेघर हुए लोगों के लिए काशी से मदद:बच्चियों ने तोड़ी गुल्लक, बोलीं - ईरान के मिनाब स्कूल में अमेरिका-इजरायल ने बेकसूरों को मारा

    2 hours ago

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    अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच हो रहे युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनई के शहीद होने के बाद पूरे भारत में शिया समुदाय ने प्रोटेस्ट किया। ईरान में युद्ध से हजारों बेकसूर बेघर और मौत के गाल में समा गए। इसमें मिनाब स्कूल में हुए मिसाल अटैक में 180 बच्चियों की मौत हो गई। इन सभी की मदद के लिए अब काशी से शिया समुदाय आगे आया है। काशी के दोषीपुरा स्थित इमामबाड़े में बेघर और मृत बच्चियों के परिजनों की मदद के लिए लोगों ने दिल खोलकर सामान के साथ ही साथ पैसा दिया जो अब दिल्ली स्थित ईरान एम्बेसी पहुंचाया जाएगा। ताकि इंसानियत बाकी रहे और बेघर लोगों का सहारा हो सके। इस दौरान छोटी-छोटी बच्चियां भी अपनी गुल्लक और हाथ का चांदी का कड़ा लेकर पहुंची और उसे ईरान की मासूम बच्चियों के परिजनों के लिए दान कर दिया। इस दौरान महिलाओं ने अपनी बनारसी साड़ी, आभूषण और घरों के बर्तन भी लेकर दान किया ताकि ईरान में बेघर हुए लोगों की मदद हो सके और जो बच्चियां बेकसूर मारी गईं हैं। उनके परिजनों को आर्थिक मदद हो सके। महिलाओं ने कहा अमेरिका और इजरायल कर रहा वह इंसानियत के विरुद्ध है। दैनिक भास्कर ने वाराणसी के दोषीपुरा स्थित इमामबाड़े में पहुंचकर वहां ईरान के बेघर हुए लोगों और मिनाब स्कूल में मारी गई बच्चियों के लिए दान करने वाले लोगों, महिलाओं और बच्चों से बात की और उनके दर्द को समझा। पढ़िए रिपोर्ट… देखिये दोषीपुरा इमामबाड़े की तस्वीरें… सबसे पहले जानिए बच्चों ने क्या कहा और अमेरिका और इजरायल के उन्होंने क्या दुआ किया?… नन्हे हाथों में प्लास्टिक का डिब्बा जिसमें सिक्के दिखाई दे रहे हैं। ये हैं दोषीपुरा की 5 साल आयत ज़हरा; आयत अपनी गुल्लक लेकर पहुंची जो उनकी अम्मी ने उन्हें पैसे इकट्ठे करने के लिए बनाई थी। वहीं उम्मे रबाब ने भी अपने 1400 रुपए लाकर ईरान के बेघरों के लिए दे दिए। ईरान में बच्चियों पर हुआ अटैक उम्मे रबाब ने बताया - ईरान के मजलूमों पर जैसे सितम हो रहा है। उसे देखकर हम लोगों ने एक प्रोग्राम बनाया है कि हम लोग जो ईरान में लोग हैं उन्हें बेघर किया गया और उनपर ज़ुल्म कर रहे हैं। ऐसे में भारत हमेशा से अपने मित्र देशों की मदद करता है। ऐसे में हम भी ईरान की मदद कर रहे हैं। गुल्लक में निकले रुपए मिनाब स्कूल की बच्चियों के परिजनों के लिए थे। हाथ का चांदी का कड़ा लेकर पहुंचे भाई-बहन इस दौरान दोषीपुरा के ही रहने वाले आपस में चचेरे भाई बहन तहसीन हैदर और इस्मत ज़हरा पहुंचे। इन दोनों ने चांदी के कड़े यहां दिए और ईरान की मदद की बात कही। कक्षा 4 में पढ़ने वाले तहसीन हैदर ने बताया - ईरान में जिस तरह से अमेरिका और इजरायल ने मिनाब स्कूल पर अटैक किया वह शर्मानक घटना थी। हमारे ये मदद ईरान के उन लोगों के लिए है जो बेघर हो गए हैं। हमारी अल्लाह से यही दुआ है कि इजरायल और अमेरिका दुनिया के नक़्शे से मिट जाए। सैम रजा ने तोड़ दी अपनी गुल्लक सैम रजा अली ने भी 883 रुपए डोनेट किए अपनी गुल्लक से; सैम ने कहा ईरान में स्थिति बहुत खराब है। ऐसे में हमने ईरान के लिए मदद की है। लोग यहां बर्तन, ज्वेलरी, कपड़ा लेकर दे रहे हैं। मेरी गुल्लक में सिर्फ 883 रुपए थे जिन्हे लेकर मैंने डोनेट किया है। ईरान में इस वक़्त हालात काफी खराब हैं। इसलिए हमने आज यह डोनेशन दिया है। अब जानिए क्यों इकट्ठा किया जा रहा है पैसा और ईरान की हिमायत क्यों?… प्रतिबन्ध के बाद जंग से जूझ रहा ईरान इमामबाड़ा बारदुआरिया के मुतवल्ली गुलजार अली ने बताया - जिस तरह से ईरान में अमेरिका और इजरायल का जुल्म जारी है । साथ ही जिस तरह से बच्चियों को मारा गया। उससे लोग ईरान में टूट गए हैं ।पिछले कई सालों से ईरान पर कई सारे प्रतिबन्ध भी लगाए गए हैं ।इन प्रतिबंधों से जूझ रहे ईरान पर हमला कर उसे और तोड़ने की कोशिश की जा रही है।इरना जूझ रहा है। ऐसे में इंसानी और दीनी फरीजा ये है कि जुल्म जिसपर हो रहा है उसकी हिमायत की जाए जिसपर हम लोग यहां ईरान की मदद के लिए जुटे हैं । हम हक़ और मजलूम के साथ गुलजार अली ने बताया - शिया कौम हमेशा हक और मजलूम के साथ है। क्योंकि इमाम हुसैन ने सं 61 हिजरी में हक के लिए ही शहदात दी थी। ऐसे में ईरान भी उसी राह पर चलते हुए हक के लिए कुर्बानियां दे रहा है। ऐसे में ईरान जहां से हिन्दुस्तान के पुराने संबंध रहे हैं। उसके लिए मदद की शुरुआत कर रहे हैं जबकि ईरान ने अभी तक कुछ भी इमदाद यानी मदद नहीं मांगी है। ईरान से हमारा दीनी रिश्ता गुलजार ने बताया - ईरान से हमारा दीनी रिश्ता है। शिया कौम के बच्चे ईरान में पढ़ने जाते हैं। वहां दीनी तालीम हासिल करते हैं। ऐसे में यहां के बच्चे अपने भाइयों की मदद के लिए और ईरान की मदद के लिए अपनी गुल्लक का पैसा भी भेज दे रहे हैं। यह उनका जज्बा है। 15 लाख रुपए भेजे जाएंगे ईरान एम्बेसी गुलजार ने बताया - तीन दिन में तकरीबन 15 लाख रुपए इकट्ठा हुए हैं। किसी ने कैश, किसी ने बरतना (तांबा/पीतल), ज्वेलरी (सोना/चांदी), बनारसी साड़ी जैसी चीजें लाकर दान में दी हैं। इन सभी को सेल करने के बाद तकरीबन 15 लाख रुपया हुआ है। जिसे हम ईरानी एम्बेसी में जमा कराएंगे। अब जानिए औरतों ने क्या कहा?.. ईरान की मदद करने के लिए दोषीपुरा इमामबाड़े पहुंची महिलाओं ने भी अमेरिका और इजरायल की बर्बादी की दुआ की और कहा कि जो ईरान में हुआ वह बिलकुल गलत है। हक और सच बोलने वालों की करें मदद मेराज बानों ने बताया - अमेरिका और इजरायल के द्वारा जो जुल्म ईरान पर किया जा रहा है वह बर्दाश्त के काबिल नहीं है। जिस तरह से बेकसूर बच्चियों को मिनाब स्कूल में मारा गया। हमारे सुप्रीम लीडर को मारा गया। तो यह हक और सच के साथ होने का एक पैगाम हम लोग दे रहे हैं। हमारे रहबर और उनके परिवार को ख़त्म कर दिया गया। जबकि वो हमेशा सच बोलते थे। मेरी सभी से अपील है कि जहां भी हैं ईरान की मदद करें ताकि वहां के जो लोग परेशान हैं उनकी मदद हो सके। जो जुल्म के साथ उसे खत्म हो जाना चाहिए जरीना ने बताया - मिनाब स्कूल में जिस तरह से बच्चियों को शहीद किया उससे बहुत गुस्सा है। मन कर रहा की ईरान जाकर जंग में इजरायल को नेस्तोनाबूद कर दें। लेकिन मजबूर हैं। ऐसे में हम लोग यहां मदद के लिए इकट्ठा हैं। हम सभी भारत में रहते हैं तो हमारा मानना है कि जो जुल्म के साथ है उसे खत्म हो जाना चाहिए।
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