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    हृदय रोग संस्थान के डॉक्टरों का कमाल:कानपुर में बिना चीरफाड़ 77 वर्षीय बुजुर्ग के दिल में फिट किया दुनिया का सबसे छोटा पेसमेकर

    2 hours ago

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    हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों ने 77 साल के एक बुजुर्ग को बिना किसी बड़े ऑपरेशन या चीरफाड़ के दुनिया का सबसे छोटा 'वायरलेस पेसमेकर' लगाकर नई जिंदगी दी है। खास बात यह है कि विटामिन के कैप्सूल के आकार वाले इस पेसमेकर की कीमत बाजार में 15 से 20 लाख रुपये है, लेकिन मरीज को यह सुविधा सरकारी योजना के तहत मुफ्त मिली है। मैनपुरी के बुजुर्ग को आता था चक्कर, धड़कन रह गई थी सिर्फ 20 मैनपुरी के रहने वाले 77 वर्षीय हरगोविंद अक्सर कमजोरी महसूस करते थे और अचानक बेहोश होकर गिर जाते थे। जब उन्हें कानपुर के हृदय रोग संस्थान लाया गया, तो जांच में पता चला कि उनके हार्ट में 'कम्पलीट ब्लॉकेज' है। उनकी धड़कन, जो सामान्यतः 70 के आसपास होनी चाहिए, गिरकर मात्र 20 से 40 तक पहुंच गई थी। नसों में ब्लॉकेज था, इसलिए फेल हो गई थी पुरानी तकनीक संस्थान के वरिष्ठ डॉ. अवधेश शर्मा ने बताया कि मरीज की स्थिति काफी गंभीर थी। सामान्य तौर पर पेसमेकर लगाने के लिए कॉलर बोन के पास सर्जरी की जाती है, लेकिन हरगोविंद की नसों में अत्यधिक ब्लॉकेज होने के कारण पारंपरिक सर्जरी मुमकिन नहीं थी। ऐसे में डॉक्टरों की टीम ने दुनिया के सबसे आधुनिक 'कैप्सूल पेसमेकर' का चुनाव किया। सामान्य पेसमेकर से क्यों बेहतर है यह 'नन्हा' डिवाइस? सामान्य पेसमेकर माचिस की डिब्बी जितना बड़ा होता है, जिसे त्वचा के नीचे सर्जरी करके लगाया जाता है। इसमें संक्रमण (इंफेक्शन) का खतरा रहता है और इसकी बैटरी भी 10-12 साल ही चलती है। इसके उलट, कैप्सूल पेसमेकर में कोई तार नहीं होता, जिससे भविष्य में नसें ब्लॉक होने की समस्या नहीं आती। साथ ही, इसकी बैटरी लाइफ भी 20 से 25 साल तक होती है, जिससे बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। 20 लाख का इलाज 'पंडित दीनदयाल योजना' में मुफ्त इस आधुनिक तकनीक के खर्च ने पहले परिवार की चिंता बढ़ा दी थी, क्योंकि बाजार में इसकी कीमत करीब 15 से 20 लाख रुपये है। हालांकि, संस्थान ने मरीज का इलाज पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत पूरी तरह निश्शुल्क किया। इस सफल ऑपरेशन के बाद कानपुर का हृदय रोग संस्थान अब 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' बनने की राह पर अग्रसर है। पैर की नस के जरिए दिल तक पहुंचा कैप्सूल डॉ. उमेश्वर पांडेय, डॉ. एसके सिन्हा और उनकी टीम ने एक जटिल प्रक्रिया को अंजाम दिया। उन्होंने मरीज के पैर की नस (ग्रोइन) के जरिए एक छोटे से तार रहित कैप्सूल पेसमेकर को हृदय के अंदर तक पहुंचाया और वहां प्रत्यारोपित कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में न तो कोई चीरा लगाया गया और न ही टांके आए।
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