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    हैलट अस्पताल की OPD में डायरिया-पीलिया के मरीज बढ़े:हर रोज 20 मामले, लू से बचाव के लिए बच्चों-बड़ों के लिए AC वार्ड तैयार

    3 hours ago

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    तपती धूप और लू के थपेड़ों के बीच कानपुर के एलएलआर (हैलट) अस्पताल की ओपीडी में डायरिया, वायरल हेपेटाइटिस और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां ओपीडी में मरीजों की संख्या सामान्य रहती थी, वहीं अब अकेले इन बीमारियों के ही रोजाना 20 से 30 नए मरीज हर ओपीडी यूनिट में पहुंच रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने बच्चों और बड़ों के लिए विशेष एयरकंडीशन्ड (AC) वार्ड तैयार कर दिए हैं, ताकि हीट स्ट्रोक या मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति में मरीजों को तुरंत राहत दी जा सके। बच्चों को दोपहर में घर से बाहर न निकालें बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि इस मौसम में छोटे बच्चों को लू लगने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि दोपहर 12 से 1 बजे के बीच बच्चों को घर से बाहर न निकालें। यदि बाहर जाना बहुत जरूरी हो, तो बच्चे का सिर और मुंह सफेद सूती कपड़े से अच्छी तरह ढंकना चाहिए। साथ ही, बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पिलाते रहना जरूरी है, ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। सड़क किनारे कटे फल और गंदी बर्फ से बढ़ रहा खतरा डॉ. गौतम ने वायरल हेपेटाइटिस यानी पीलिया के खतरों को लेकर भी लोगों को सतर्क किया। उन्होंने बताया कि यह बीमारी दूषित पानी और गंदगी से फैलती है। उन्होंने कहा कि बाजार में बिकने वाला गन्ने का जूस सीधे तौर पर नुकसानदेह नहीं होता, लेकिन उसमें इस्तेमाल होने वाली बर्फ यदि गंदे पानी की बनी हो, तो वह संक्रमण का बड़ा कारण बन सकती है। इसी तरह सड़क किनारे बिकने वाले कटे हुए तरबूज, जिन पर मक्खियां बैठती हैं, बीमारी का घर बन सकते हैं। फल हमेशा घर लाकर अच्छी तरह साफ करके ही खाने चाहिए। हीट स्ट्रोक के लिए अलग स्पेशल वार्ड तैयार एलएलआर (हैलट) अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक प्रो. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि मई-जून की भीषण गर्मी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन पूरी तरह तैयार है। अभी हीट स्ट्रोक के गंभीर मामले सामने नहीं आए हैं, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए दो अलग एयरकंडीशन्ड वार्ड तैयार किए गए हैं। वयस्कों के लिए 12 बेड और बच्चों के लिए 10 बेड आरक्षित किए गए हैं। इन वार्डों में तापमान नियंत्रित रखने के साथ रेफ्रिजरेटर, ठंडी पट्टियां, आईवी फ्लूइड और जीवन रक्षक दवाओं का पूरा इंतजाम किया गया है। बुजुर्ग और गंभीर मरीज रखें विशेष सावधानी प्रो. सौरभ अग्रवाल ने आम लोगों को सलाह दी कि वे हल्के रंग के कपड़े पहनें और शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉल का प्रयोग करें। उन्होंने विशेष रूप से शुगर, बीपी और हृदय रोगियों को सतर्क रहने की सलाह दी। ऐसे मरीजों को धूप में निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो केवल सुबह या शाम के ठंडे समय में ही निकलें। उन्होंने कहा कि प्यास न लगने पर भी नियमित रूप से पानी पीते रहना ही इस मौसम में सबसे बड़ा बचाव है।
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